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देश की प्रतिष्ठा डुबोने में जुटी केजरीवाल की पार्टी, विदेश में झूठी हैकॉथन की अफवाह उड़ाई

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दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के एक और फरेब का पर्दाफाश हो गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि झूठ की राजनीति के लिए केजरीवाल गैंग अब देश के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने पर तुला हुआ है। ‘आप’ के इस नए झूठ का मामला भी ईवीएम हैकिंग (जिसे चुनाव आयोग गलत साबित कर चुका है ) से जुड़ा है। इस मामले में केजरीवाल की चौकड़ी ने देश से बाहर बोत्सवाना में भारत की प्रतिष्ठा गिराने का काम किया है। राहत की बात ये है कि आम आदमी पार्टी के नेता अपने घृणित मकसद में कामयाब हो पाते, उससे पहले ही उनकी साजिश बेनकाब हो गई और दूध का दूध-पानी का पानी साफ हो गया।

बोत्सवाना में भारतीय EVM पर हैकॉथन का झूठ
अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बोत्सवाना में भारतीय EVM को लेकर कोई हैकॉथन का आयोजन नहीं किया गया था, जैसा कि आम आदमी पार्टी की ओर से दावा किया गया था। जानकारी के अनुसार आप ने आरोप लगाया था कि EVM बनाने वाली कंपनी Bharat Electronics Limited (BEL) बोत्सवाना में आयोजित हैकॉथन से पीछे हट गई है। लेकिन BEL ने साफ किया है कि बोत्सवाना की Independent Electoral Commission ने किसी हैकॉथन का आयोजन ही नहीं किया था। BEL ने साफ किया है कि IEL ने उसे सिर्फ EVM का DEMO देने का निमंत्रण दिया था। लेकिन आप ने बिना तथ्यों की ठीक से छानबीन के ये अफवाह उड़ा दिया कि बोत्सवाना में EVM पर हैकॉथन होना है, जिसमें जाने से कंपनी ने मना कर दिया है।

हार के बाद ठानी EVM से रार
EVM एक मशीन है, तकनीकी वजहों से उसमें खराबी आ सकती है। दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री ने दिल्ली की जनता का बेड़ा गर्क कर पंजाब और गोवा में भी लोगों को गुमराह कर सत्ता हथियाने सपना देखा था। लेकिन, जब मतदाताओं ने रिजेक्ट किया तो उन्हें EVM पर दोषारोपण करके झेंप मिटाने का बहाना खोजा। मतदाताओं ने उनकी करतूतों के चलते बार-बार उन्हें रिजेक्ट किया लेकिन वो EVM के हैक कर लिए जाने का दावा करते रहे।

चुनाव आयोग का बहुत अपमान किया
अपनी ओर से जांच-पड़ताल करने के बाद चुनाव आयोग ने बार-बार कहा कि EVM को हैक करना संभव नहीं है। लेकिन अराजकता के पैरोकार केजरीवाल ने चुनाव आयोग की एक न सुनी। उनके इशारे पर दिल्ली विधानसभा के अंदर संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं। AAP के स्वयंभू वैज्ञानिक विधायक सौरभ भारद्वाज ने घंटों सदन के अंदर एक फर्जी EVM को हैक करने का नाटक किया। नकारात्मक गतिविधियों में अपने ज्ञान के बल पर एक तरह से आम आदमी पार्टी ने विधानसभा के अंदर चुनाव आयोग के प्रतिनिधि की गैर मौजूदगी में उसका मजाक उड़ाने की कोशिश की।

EC से चुनौती मिली तो दुबक गए
कमाल देखिए कि जब चुनाव आयोग ने सियासी पार्टियों को EVM को हैक करके दिखाने की चुनौती दी, तो न केजरीवाल पहुंचे न ही उनकी पार्टी का कोई प्रतिनिधि। सवाल है कि EVM की तकनीक पर सबसे ज्यादा हो-हल्ला करने वाली आम आदमी पार्टी का मकसद क्या है ? उसने चुनाव आयोग के हैकॉथन में पहुंचने से इनकार तो कर ही दिया, बल्कि उसके जवाब में एकबार फिर से अपना हैकॉथन करने का भी एलान कर दिया। 

बीएमसी चुनाव के समय भी हुई थी किरकिरी
बीएमसी चुनाव में एक उम्मीदवार ने झूठा दावा किया था कि उसे खुद का वोट भी नहीं मिला। उसने अपने दावे को पुख्ता बताने के लिए ईवीएम पर संदेह जता दिया। केजरीवाल की पार्टी ने जरा भी देरी किए बिना हो-हल्ला मचाना शुरू कर दिया। जब चुनाव आयोग ने बीएमसी चुनाव में शिकायत करने वाले श्रीकांत सिरसाट नाम के उस उम्मीदवार के दावों की पोल खोल दी, तो उसने बिना समय गंवाए चुनाव आयोग से माफी मांग ली। लेकिन, उसकी बातों की पड़ताल किए बिना EC पर सवाल उठाने वाली आप अभी तक निर्लज्ज बनी हुई है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट भी दे चुका है चेतावनी
आम आदमी पार्टी समेत बाकी विपक्षी पार्टियों ने EVM में गड़बड़ी के बहाने जिस तरह से हाल में चुनाव आयोग को संदेह के घेरे में लाने का कुटिल प्रयास किया, उससे अदालत भी बहुत आहत है। यही कारण है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों, व्यक्तियों, एनजीओ और सभी तरह की मीडिया पर EVM के मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना पर रोक लगा रखी है। अदालत ने कहा है कि, चुनाव आयोग ने सफलतापूर्वक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का आयोजन कराया है। इसीलिए राजनीतिक पार्टियों को एक संवैधानिक संस्था की छवि बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। कोर्ट की जिम्मेदारी है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखे और बे-सिर पैर की आलोचनाओं से उसे बचाया जाए। अगर इसे छोड़ दिया गया तो लोकतंत्र का आधार ही कमजोर हो जाएगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब ये नहीं कि बेवजह किसी भी संवैधानिक संस्था की आलोचना की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने कहा है कि चुनावों के सफल आयोजनों के बाद भी चुनाव आयोग को नकारात्मक अटकलों का विषय बना दिया गया है।

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