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पीएम मोदी के विजन से स्पेस में ऊंची उड़ान- साल 2018 की बड़ी उपलब्धियां

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अंतरिक्ष के क्षेत्र में साल 2018 भारत के लिए कामयाबियों का वर्ष रहा। सबसे बड़ी बात है कि भारत आज विश्व का सैटेलाइट लॉन्चिंग हब तो बनता ही जा रहा है, जल्द ही स्पेस में मानव को भेजने की क्षमता भी प्राप्त करने जा रहा है। खास बात ये है कि भारत की स्पेस तकनीक गुणवत्तापूर्ण होने के बावजूद दूसरे विकसित देशों के मुकाबले बहुत किफायती है, जिसके कारण उसे इसका व्यापारिक लाभ भी व्यापक रूप से मिलना शुरू हो गया है। छोटे-मोटे देशों को तो छोड़ दीजिए, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी कम खर्च में सैटेलाइट भेजने के लिए भारत पर निर्भर होने लगे हैं। दरअसल इसरो का हुनर और परिश्रम एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन की जुगलबंदी ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 

मानव के साथ अंतरिक्ष यान भेजेगा भारत
72वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2022 तक अंतरिक्ष में मानव के साथ अंतरिक्ष यान भेजने की संकल्प जताया। इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत ऐसा करने वाले विश्व के चार देशों में शामिल हो जाएगा। अभी तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने अंतरिक्ष यात्रियों वाले मिशन लॉन्च किए हैं। इसरो ने कहा है कि वह इस काम को निश्चित समय-सीमा में पूरा करने में सक्षम है। गौरतलब है कि इसरो ने पुनः प्रवेश मिशन क्षमता, क्रू स्केप प्रणाली, क्रू मॉड्यूल कनफिगुरेशन, थर्मल सुरक्षा प्रणाली, गति नियंत्रण तथा प्लवन प्रणाली, जीवन समर्थन प्रणाली की उप-प्रणाली के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है। इस साल जुलाई में इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से मानव के साथ अंतरिक्ष उड़ान के लिए जरूरी क्रू एस्‍कैप सिस्‍टम के लिए पैड अबॉर्ट टेस्‍ट भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

सुपर नेपच्यून के आकार के ग्रह की खोज
इस वर्ष भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया, जो हमारे सौर मंडल के बाहर तारों के इर्द-गिर्द ग्रहों की खोज कर चुके हैं। अहमदाबाद के भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रोफेसर अभिजी‍त चक्रवर्ती के नेतृत्‍व में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के एक दल ने सूर्य की तरह एक तारे की परिक्रमा करने वाले उप शनि ग्रह या सुपर नेपच्यून के आकार के ग्रह की खोज की। इसका भार 27 धरती के बराबर और आकार इसकी त्रिज्‍या का छह गुना है। इस नए ग्रह को ईपीआईसी 211945201बी या के2-236बी के नाम से जाना जाएगा।

इस वर्ष इसरो की बड़ी लॉन्चिंग:

पहला- इसरो ने 12 जनवरी, 2018 को श्रीहरिकोटा से 30 सह-यात्री सैटेलाइटों के साथ 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 श्रृंखला का दूरसंवेदी सैटेलाइट लांच किया। इसे इसरो के ध्रुवीय सैटेलाइट लांच वाहन ने अपनी 42वीं उड़ान पीएसएलवी-सी40 से लॉन्च किया गया। इसमें कार्टोसेट-2 के दो भारतीय सैटेलाइट, 11 किलोग्राम के आईएनएस-1सी तथा 100 किलोग्राम के माइक्रोसेट थे। जबकि 28 सैटेलाइट कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के थे।

दूसरा-भारत ने 29 मार्च, 2018 को जीएसएटी-6ए सैटेलाइट लांच किया। इस सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच वाहन (जीएसएलवी-एफ08) ने जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ओर्बिट में छोड़ा।

तीसरा-जीएसएलवी द्वारा यह देश में विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण को ले जाने की लगातार पांचवी सफलता थी। जीएसएटी-6ए इसरो द्वारा निर्मित संचार सैटेलाइट है, जो मल्टी बीम कवरेज के माध्यम से मोबाइल संचार सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसके लिए यह एस तथा सी बैंड ट्रांसपॉन्डरों से लैस है।

चौथा- अपनी 43वीं उड़ान में इसरो के ध्रुवीय सैटेलाइट लांच वाहन पीएसएलवी-सी41 ने 12 अप्रैल, 2018 को सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र , श्रीहरिकोटा से 1,425 किलोग्राम का आईआरएनएसएस-II नैविगेशन सैटेलाइट सफलतापूर्वक लांच किया। आईआरएनएसएस-II “नैविगेशन विथ इंडियन कॉन्सटेलेशन (एनएवीआईसी)” प्रणाली का नवीनतम सदस्य है। एनएवीआईसी को भारतीय क्षेत्रीय नैविगेशन सैटेलाइट प्रणाली (आईआरएनएसएस) के नाम से भी जाना जाता है। यह स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली है, जो भारतीय क्षेत्र में मुख्य भूमि के 1,500 किलोमीटर के दायरे में स्थिति की सूचना प्रदान करती है।

पांचवां- 16 सितंबर, 2018 को इसरो के ध्रुवीय सैटेलाइट लांच वाहन (पीएसएलवी-सी42) ने सफलतापूर्वक सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र (एसडीएससी), श्रीहरिकोटा से दो सैटेलाइट-नोवाएसएआर तथा एस1-4 लांच किया। ये सैटेलाइट ब्रिटेन की सूरी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल) के हैं। इसे ब्रिटेन के गिल्डफोर्ड के एसएसटीएल के स्पेस क्राफ्ट ऑपरेशन सेंटर से चलाया जाएगा। एस1-4 उच्च रिजॉलूशन का भू-सर्वेक्षण सैटेलाइट है, जो संसाधनों का सर्वेक्षण, पर्यावरण निगरानी, शहरी प्रबंधन और आपदा निगरानी में सक्षम है।

छठा- इसरो के पीएसएलवी-सी43 ने 29 नवंबर, 2018 को सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र (एसडीएससी) से 31 सैटेलाइटों को सफलतापूर्वक लांच किया। इसमें एचवाईएसआईएस भारत का एक भू-सर्वेक्षण सैटेलाइट है, जो इसरो की मिनी सैटेलाइट-2 (आईएमएस-2) के साथ बनी है। इसका वजन 380 किलोग्राम के लगभग है। सैटेलाइट का मिशन जीवन पांच वर्ष है। एचवाईएसआईएस का प्राथमिक लक्ष्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के इंफ्रारेड तथा शॉर्टवेव इंफ्रारेड क्षेत्रों में भू-सतह का अध्ययन करना है। इस लॉन्चिंग में भारत के इस सैटेलाइट के इलावा आठ देशों के एक माइक्रो तथा 29 नैनो सैटेलाइट थे। ये सैटेलाइट ऑस्ट्रेलिया (1), कनाडा (1), कोलंबिया (1), फिनलैंड (1), मलेशिया (1), नीदरलैंड (1), स्पेन (1) और अमेरिका (23) के थे।

सातवां- 14 नवंबर, 2018 को सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र (एसडीएससी) एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से भारत का जीएसएटी-29 संचार सैटेलाइट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच वाहन मार्क-III (जीएसएलवीएमके-III-डी2) का दूसरा विकास फ्लाइट लांच किया गया। जीएसएलवीएमके-III इसरो द्वारा विकसित तीन चरण वाला हेवी लिफ्ट लांच वाहन है। जीएसएटी-29 मल्टीबैंड, मल्टीबीम संचार सैटेलाइट है, जिसका लक्ष्य अनेक नई और महत्वपूर्ण तकनीकों में परीक्षण सेवा देना है। इसके के-यू बैंड तथा के-ए बैंड पेलोड उपयोगकर्ताओं की संचार आवश्यकताओं को देखते हुए तैयार किए गए हैं। इन उपयोगकर्ताओं में जम्मू और कश्मीर तथा भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों के दूरदराज के क्षेत्र शामिल हैं।

आठवां- इसरो का सबसे भारी और अत्याधुनिक उच्च प्रवाह क्षमता का संचार सैटेलाइट जीएसएटी-11, 05 दिसंबर, 2018 को फ्रेंच गुएना स्पेसपोर्ट से सफलतापूर्वक लांच किया गया। जीएसएटी-11 भविष्य के सभी क्षमता वाले संचार सैटेलाइटों में सबसे आगे होगा। 5,854 किलोग्राम भार का जीएसएटी-11 सैटेलाइट भारत की मुख्य भूमि और इसके द्वीपों के यूजरों को उच्च डाटा गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

नौवां- इसरो की जीएसएलवी-एफ11 ने 19 दिसम्‍बर, 2018 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र (एसडीएससी) से संचार उपग्रह जीसैट-7ए का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। स्‍वदेश विकसित क्रायोजैनिक स्‍टेज से जीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित किया गया जीसैट-7ए एक बहुत भारी उपग्रह है। जीसैट-7ए एक उन्‍नत संचार उपग्रह है, जिसमें ग्रेगोरियन एंटीना और बहुत से कई अन्‍य प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्‍यक्षता में 6 जून, 2018 को केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने पीएसएलवी संचार कार्यक्रम (चरण-6) और इस कार्यक्रम के तहत 30 पीएसएलवी ऑपरेशनल फ्लाईट्स के लिए फं‍डिंग को मंजूरी दी। इस कार्यक्रम से भूमि पर्यवेक्षण, नौपरिवहन और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए उपग्रहों के प्रक्षेपण की आवश्‍यकताएं भी पूरी होंगी। इससे भारतीय उद्योगों में उत्‍पादन की निरंतरता भी सुनिश्चित होगी। इसके लिए कुल 6,131 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता होगी, जिसमें 30 पीएसएलवी वाहनों, आवश्‍यक सुविधा में वृद्धि, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान का खर्च शामिल हैं। केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसएलवी मार्क-III निरंतरता कार्यक्रम (चरण-1) के लिए फंडिंग को भी मंजूरी दी। 10 जीएसएलवी मार्क-III फ्लाईट्स सहित इस पर कुल अनुमानित लागत 4338.20 करोड़ रुपये है।

स्पेस के क्षेत्र में विदेशों से समझौते:

*भारत और उज्‍बेकिस्‍तान के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्‍यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में सहयोग के लिए अनुबंध।

*भारत और मोरक्को के बीच बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग के लिए समझौता।

*भारत और अल्जीरिया के बीच अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इस्तेमाल के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता।

*भारत और ब्रूनेई दारुसलाम के बीच उपग्रह और प्रक्षेपण यानों के लिए टेलीमेट्री ट्रेकिंग एवं टेलीकमांड स्टेशन के संचालन में सहयोग और अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान और इस्तेमाल के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता।

*भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इस्तेमाल में सहयोग पर आधारित समझौता।

*भारत और ओमान के बीच फरवरी, 2018 में मस्कट में बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के क्षेत्र में सहयोग पर आधारित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

*अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और शांतिपूर्ण उपयोगों के लिए सहयोग के बारे में भारत और तजाकिस्‍तान के बीच समझौता

इन समझौतों से पृथ्वी के दूरसंवेदी क्षेत्रों, उपग्रह आधारित खोज, अंतरिक्ष विज्ञान और आकाशीय खोज, अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष प्रणालियों और भू-प्रणाली के इस्तेमाल और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल सहित अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।

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