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कश्मीर, अयोध्या के बाद अब समान नागरिक संहिता, NRC और नागरिकता बिल पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ !

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नरेंद्र मोदी सरकार का अपने दूसरे कार्यकाल में ताबड़तोड़ महत्वपूर्ण फैसलों का दौर जारी है। सरकार गठन के महज 5 महीने में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने घोषणापत्र में शामिल दो बड़े मुद्दों पर सफलता हासिल कर ली। अनुच्छेद 370 में व्यापक बदलाव के तहत जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हट चुका है। इसके बाद अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राम मंदिर निर्माण का रास्ता भी साफ हो चुका है। 

पांच अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों को भी निष्प्रभावी कर दिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया। इसके बाद 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया। 

बीजेपी के तीन प्रमुख एजेंडे थे- अयोध्या, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता। इनमें से दो पर काम लगभग हो चुका है और अब वह समान नागरिक संहिता पर अपना काम शुरू करेगी। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार समान नागरिक संहिता से भी पहले सरकार एनआरसी और नागरिकता बिल पर काम करना चाहेगी। आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार NRC और नागरिकता बिल पेश कर सकती है क्योंकि इस मुद्दे पर सरकार पहले ही काम कर चुकी है।  

राजनीतिक हलकों और मीडिया में चर्चा है कि अब मोदी सरकार के एजेंडे में समान नागरिक संहिता, NRC और नागरिकता बिल है। अब हम आपको बताते हैं कि समान नागरिक संहिता, NRC और नागरिकता बिल आखिर क्या हैं। 

समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नागरिक कानून का होना, फिर चाहे वो किसी भी धर्म या संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में भी सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होने की बात है। 

नागरिकता संशोधन बिल 

नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म को मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। पड़ोसी देशों के मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। विधेयक में प्रावधान है कि गैर मुस्लिम  समुदायों के लोग अगर भारत में 6 साल रह लेते हैं तो वे आसानी से नागरिकता हासिल कर पाएंगे।

file pic.

National Register of Citizens (NRC) बिल 

केंद्र सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू किया है। इसका मकसद देश में गैर-कानूनी तौर पर रह रहे विदेशी लोगों को बाहर करना है। असम में आजादी के बाद 1951 में पहली बार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन बना था। राजीव गांधी सरकार के समय हुए असम समझौते के तहत मोदी सरकार ने असम में एनआरसी को लागू किया है। अभी इसके लिए अलग से कोई एनआरसी कानून पारित नहीं किया गया। एनआरसी पूरे देश में लागू करने का विचार है, लेकिन किसी भी शरणार्थी को इसके तहत बाहर नहीं किया जाएगा।अभी एनआरसी सिर्फ असम में लागू किया गया है। इसके तहत सरकार देश में रहने वाले अवैध घुसपैठियों को बाहर कर रही है।

 

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