Home समाचार नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को मिली लोकसभा की मंजूरी

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को मिली लोकसभा की मंजूरी

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लोकसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पास कर दिया है। बिल के पक्ष में 311 जबकि विरोध में 80 सदस्यों ने मतदान किया। लोकसभा में बिल को पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह संशोधन देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। यह बिल पाकिस्‍तान, बांग्लादेश और अफगानिस्‍तान जैसे देशों से उत्‍पीड़न के कारण वर्ष 2014 के अंत तक भारत आ गए हिंदू, जैन, पारसी, बौद्ध और इसाई समुदाय के लोगों के लिए नागरिकता का प्रावधान करता है। गृह मंत्री ने कहा कि इस बिल के माध्यम से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरण में लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इन तीनों देशों में मुसलमानों पर अत्याचार नहीं होता क्योंकि वहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं।

चर्चा के दौरान बिल पर पर जबाव देते हुए अमित शाह ने कहा कि यह बिल किसी तरह से गैर संवैधानिक नहीं है और न ही किसी प्रकार का उल्लंघन है। अमित शाह ने कहा कि इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ और धर्म के आधार पर पाकिस्तान का निर्माण हुआ। इस सच्चाई को सभी को स्वीकारना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस धर्म के आधार पर देश के विभाजन के लिए राजी नहीं हुई होती, तो इस विधेयक में संशोधन की जरूरत ही नहीं होती।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत की जमीनी सीमा से सटे तीन देश हैं जिनकी लगभग 106 किलोमीटर की सीमा भारत से सटी हुई है और इन देशों में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के लोग प्रताड़ित होकर भारत में शरण लेने के लिए आते हैं। उनका यह भी कहना था कि आर्टिकल 371 के किसी भी प्रोविजन को यह बिल आहत नहीं करेगा बल्कि उत्‍तर-पूर्व के लोगों की समस्‍याओं का समाधान होगा। श्री शाह का कहना था कि पूर्वोत्तर के लोगों की भाषिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा करना हमारी प्रतिबद्धता है।

उन्होंने कहा कि मणिपुर को इनर लाइन परमिट (ILP) के तहत लाया जाएगा और इसके साथ ही सभी पूर्वोत्तर राज्यों की समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा। पूरा अरुणाचल, मिजोरम, नागालैंड इनर लाइन प्रोटेक्‍टेड है इसलिए सभी नार्थ-ईस्‍ट के राज्‍यों को चिंता करने की कोई आवश्‍यकता नहीं है।

अमित शाह ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 लाखों-करोड़ों शरणार्थियों को नर्कपूर्ण यात्रा जैसे जीवन से मुक्ति दिलाने का साधन बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन देशों के अल्‍पसंख्‍यक नागरिक भारत के प्रति श्रद्धा रखते हुए भारत में आए थे और यह बिल पारित होने के बाद उनको भारत की नागरिकता मिल सकेगी। उनको स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, आवास आदि सुविधा उपलब्‍ध कराई जा सकेगी। शाह ने कहा कि यह बिल गैर-संवैधानिक नहीं है और न ही आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है।

गृहमंत्री शाह ने कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था जिसके अंतर्गत भारत और पाकिस्तान को अपने-अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखना था किंतु ऐसा नहीं हुआ। श्री शाह ने यह भी बताया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने अपने संविधान में लिखा है कि वहां का राजधर्म इस्लाम है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 23% थी जो 2011 में घटकर 3% रह गई, बांग्लादेश में भी यह संख्या कम हुई। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि उनका अस्तित्व बना रहे और सम्मान के साथ बना रहे। श्री शाह ने बताया कि भारत में मुस्लिम 1951 में 9.8% था जो आज 14.2 3% है जो इस बात का सबूत है कि भारत में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है। शाह ने कहा कि यदि पड़ोस के देशों में अल्पसंख्यकों के साथ प्रताड़ना हो रही है, उन्हें सताया जा रहा है तो भारत मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि भारत में किसी तरह की रिफ्यूजी पॉलिसी की जरूरत नहीं है।

अमित शाह ने कहा कि रोहिंग्या को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सभी अल्पसंख्यकों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मोदी सरकार के होते हुए इस देश में किसी भी धर्म के नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है, यह सरकार सभी को सुरक्षा और समान अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका यह भी कहना था कि भारत का संविधान ही मोदी सरकार का धर्म है।

शाह ने कहा कि इस विधेयक में भारत के अल्पसंख्यक समुदाय को लक्षित नहीं किया गया है, लेकिन अवैध प्रवासियों को किसी भी कीमत पर देश में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने क‍हा कि किसी भी सरकार का यह कर्तव्य है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा करे, देश के अंदर आते हुए घुसपैठियों को रोके तथा शरणार्थी और घुसपैठियों की अलग अलग पहचान करें । उनका कहना था कि जब एनआरसी लाएंगे, एक भी घुसपैठिया बच नहीं पाएगा।

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