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क्या इस कांग्रेस को देश की जनता दोबारा मौका देगी?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिका प्रवास से लौटे तो गुजरात के रास्ते अब अमेठी जा पहुंचे। सात महीने बाद अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचते ही उन्हें किसानों की और रोजगार की चिंता सताने लगी और मोदी सरकार से छह महीने के लिए उन्हें सत्ता सौंपने की मांग कर दी, कहा- छह महीने में ही वे देश के युवाओं को रोजगार दे देंगे, किसानों की समस्याएं भी हल कर देंगे। लेकिन राहुल गांधी को यह याद दिलाना आवश्यक है कि देश में जो भी समस्याएं हैं वह किसकी देन है?  या फिर देश की जनता को वे ‘मूर्ख’ समझ रहे हैं और कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी की ‘गुहार’ लगा रहे हैं।

राहुल गांधी अमेठी में के लिए चित्र परिणाम

दरअसल हमारा देश-समाज स्वतंत्रता के पश्चात छह दशकों तक कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित रहा है। राजनीति पर भी कांग्रेस के कल्चर की ही छाया रही है। यही कारण है कि आज भी देश-समाज की सुरक्षा से लेकर शुचिता तक सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा, लूट, घोटाला, अराजकता, तुष्टिकरण, दंगा, युद्ध, आतंकवाद, कश्मीर मुद्दा, पंजाब मुद्दा, घुसपैठ, भाई-भतीजावाद, परिवारवाद… अनगिनत समस्याएं हैं जो कांग्रेस सरकारों की देन है। आइये हम पड़ताल करते हैं कांग्रेस के ऐसे ही कुछ कुकृत्यों की-

कांग्रेसियों ने जमकर लूटा देश को
कांग्रेस ने 60 सालों तक देश को खूब जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म नहीं होती। आत्महित और घोटाले कांग्रेस का हिस्सा बन गए थे। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार 2004-2014 के कार्यकाल के दौरान तो हमेशा किसी न किसी घोटाले की खबरों में रही है। इस दौरान साल दर साल घोटालों की संख्या बढ़ती ही चली गई। एक आंकलन के अनुसार अगर सिर्फ ये घोटाले न हुए होते तो भारत आज विश्व महाशक्ति होता। देखिये प्रमुख घोटालों की सूचि और उसकी रकम-

कोयला घोटाला  1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला  1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला 70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला 35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला  1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला 3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला 14 करोड़ रुपये

भ्रष्टाचार में फंसे हैं कांग्रेस के शीर्ष नेता
अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। ये सारे मामले वे हैं जिनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत राजीव गांधी, रॉबर्ट वाड्रा जैसे नामों से जुड़े हैं। यानी कांग्रेस पार्टी ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार के जद में है। क्या देश को इस कांग्रेस का नेतृत्व फिर से स्वीकार्य होगा?गांधी परिवार के लिए चित्र परिणाम

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और  उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के हवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे।

नेशनल हेराल्ड स्कैंडल
कांग्रेस के पैसे से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी 1938 में बनी और तीन अखबार चलाती थी– नेशनल हेरल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज। एक अप्रैल 2008 को ये अखबार बंद हो गए। इसके बाद मार्च 2011 में सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने यंग इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी खोली, जिसमें दोनों की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस मामले में सोनिया और राहुल के विरुद्ध संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया गया।

वाड्रा-डीएलएफ़ घोटाला
2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ़ से 65 करोड़ का ब्याजमुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना उद्देश्य था। यह भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई हिस्सों में बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज़ प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को इंदिरा सरकार की ओर से टैक्स, फ़ंड और ज़मीन को लेकर कई छूटें मिलीं।

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के बतौर याद किया जाता है। इसके छींटे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इन्वेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी कीं, लेकिन उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

कश्मीर समस्या कांग्रेस की देन
भारत के विभाजन के समय इसका हल निकाल पाने में जवाहरलाल नेहरू की असफलता की देश भारी कीमत चुका रहा है। तब न तो दिल्ली में नेहरू सरकार और न ही श्रीनगर में शेख अब्दुल्ला सरकार कभी इस बात को मान सका कि जम्मू-कश्मीर का भारत में पूरी तरह एकीकरण करने की जरूरत है। अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान है जिसे अब तक क्यों कायम रखा गया है यह भी एक सवाल है। 1971 में भी भारत ने कश्मीर मुद्दे को हल करने का मौका गंवा दिया था। 1990 में हिंदुओं के नरसंहार के बाद की चुप्पी ने तो कट्टरपंथियों के हौसले को नये उत्साह से भर दिया था।

मस्लिम तुष्टिकरण के लिए सब जायज
मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर कांग्रेस हमेशा से हिंदू विरोध की मानसिकता से ग्रस्त रही है। जिस तरह की हिंदू विरोध की भाषा कठमुल्ले बोलते हैं ठीक उसी की भाषा अब कांग्रेस के मंत्री भी बोलते हैं। मुस्लिम प्रेम में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हिंदुओं के प्रति विषवमन को अनसुना करती रही है। दरअसल यह कांग्रेस की रणनीति है कि मुसलमान वोट उनसे जुड़े रहें। इसी तुष्टिकरण का नतीजा है कि संविधान संशोधन कर धर्म निरपेक्ष शब्द जोड़ दिया गया। केरल में कांग्रेसी नेता ने खुलेआम गाय का वध किया।

सोनिया गांधी इफ्तार पार्टी के लिए चित्र परिणाम

दंगों पर सियासत करती है कांग्रेस
1984 का दंगा तो कांग्रेस पार्टी की असहिष्णुता की स्मारक के तौर पर है। हजारों सिखों को कांग्रेसियों ने किस तर मौत के घाट उतार दिया था। 1989 का भागलपुर दंगा तो कांग्रेस की कथनी और करनी का भारी अंतर दिखाता है। किस तरह कांग्रेस की सरकार के नाक के नीचे वहां लोगों का कत्लेआम किया गया था। 1992 का मुंबई के दंगे में कांग्रेसियों के कारनामे भूले जा सकते हैं क्या?

भगवा आतंकवाद की थ्योरी कांग्रेसी सोच की उपज
17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल गांधी की जो बात सार्वजनिक हुई उसने देश के 100 करोड़ हिंदुओं के बारे में राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी की सोच को सबके सामने ला दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ”भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।” जाहिर तौर पर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी हिंदुओं को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं चूकती। कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है। भगवा आतंकवाद  और हिंदू आतंकवाद जैसे शब्द कांग्रेसी सोच की ही उपज है। इस कृत्य में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी शामिल रहा है। जाहिर है देश  की जनता इतना तो अवश्य समझती है कि देशहित किसमें है। कांग्रेस और भगवा आतंकवाद के लिए चित्र परिणाम

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