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मोदी सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पॉलिसी से बेहतर हुआ कारोबारी माहौल

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26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली तो देश की सवा सौ करोड़ जनता ने माना कि सिर्फ देश की सत्ता नहीं बदली है बल्कि देश का मूड बदला है। उम्मीदों भरे माहौल के बीच पीएम मोदी ने देश की क्षमता के अनुरूप उसे अवसर के रूप में बदलने का संकल्प लिया और उसे सिद्धि के रास्ते पर लेकर आगे बढ़े। सर्व समावेशी नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की गई और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है।

7000 से अधिक सुधार किए गए
देश में बेहतर कारोबारी माहौल के लिए ही ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति अपनाई गई। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की कल्पना को साकार रूप दिया गया है। देश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए केंद्र अब राज्यों के साथ काम मिलकर काम कर रहा है। बदले वातावरण में अब राज्यों को भी लगने लगा है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस महत्वपूर्ण एजेंडा है और उन्हें भी इस रास्ते पर चलना चाहिए।

मोदी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए चित्र परिणाम

बिजनेस के लिए बेहतर माहौल
पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में कई बड़े सुधारों की प्रक्रिया शुरू की है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए जो कदम उठाए गए हैं उनमें आवेदनों पर कार्रवाई के लिए समय निर्धारण, कई रक्षा उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग के लाइसेंस की जरूरत खत्म करना, एकल खिड़की मंजूरी के लिए ‘ई-बिज’ पोर्टल की शुरुआत, निर्यात और आयात के लिए जरूरी कागजात की संख्या में कमी लाना और एक फॉर्म के जरिए सभी रिटर्न फाइल करना शामिल हैं।

मोदी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए चित्र परिणाम

‘ई-बिज’ से आसान हुईं प्रक्रियाएं
भारत में बिजनेस करना आसान बनाने के लिए मोदी सरकार ने 20 फरवरी, 2015 को ई-बिज पोर्टल लांच किया। ये सिंगल विंडो ई-बिज पोर्टल 11 सरकारी सेवाओं के लिए है। इसके जरिए फॉर्म्स ऑनलाइन भरे जाते हैं उनकी प्रोसेसिंग होती है और पेमेंट भी ऑनलाइन होते हैं। इस पोर्टल के जरिए देश में निवेश के प्रस्तावों पर सभी प्रकार की मंजूरी हासिल की जा सकती है। इसके अलावा कोई भी उद्यमी अब ई-बिज पोर्टल के जरिए पैन कार्ड (स्थायी खाता संख्या) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।

बेहतर वातावरण से बढ़ा निवेश
व्यापार के माहौल में सुधार से देश में घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार के निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलती है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) इक्विटी प्रवाह 9 प्रतिशत बढ़कर 43.48 अरब डॉलर रहा, किसी एक वित्त वर्ष में यह सर्वाधिक है। वहीं पिछले तीन वित्त वर्ष (2014-17) के दौरान एफडीआई इक्विटी का प्रवाह करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 114.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इससे पिछले तीन वित्त वर्ष (2011-14) में 81.84 अरब डॉलर था।

मोदी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ई बिज के लिए चित्र परिणाम

एफडीआई में बड़ी बढ़ोतरी
सरकार की नीतिगत सुधारों के कारण देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 60.08 अरब डॉलर (19 मई, 2017 तक) की नई ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछले साल यह 55.56 अरब डॉलर थी। जाहिर है यह अब तक का सबसे ज्यादा निवेश है। इससे पहले वित्त वर्ष 2015-16 में एफडीआई सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी। दरअसल एफडीआई में वृद्धि का मुख्य कारण मोदी सरकार द्वारा एफडीआई व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने के लिए किए गए साहसिक नीतिगत सुधार है। एफडीआई नीति में बदलाव तथा विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा मंजूरी की सीमा में वृद्धि और देश में ‘व्यापार में आसानी’ (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) नीति को बढ़ावा देने से एफडीआई में बढ़ोतरी हुई है।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। दरअसल व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठान ली थी, जिसे उन्होंने लागू करके ही दम लिया। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा था, Goods & Services Tax यानि GST सही में Good And Simple Tax साबित हुआ है और अब तक व्यापारी से लेकर उपभोक्ता तक इसके अभ्यास में आ चुके हैं। भारत जैसे विविधता वाले देश में जीएसटी लागू होने से पूरी दुनिया हैरान है।

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टॉप फिफ्टी में शामिल होना लक्ष्य
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में वित्त वर्ष 2015-16 में भारत 30 विकासशील देशों के बीच 13 पायदान बढ़कर दूसरे स्थान पर आ गया था। ग्लोबल रिटेल डेवलपमेंट इंडेक्स (जीआरडीआई) में भारत की रैंकिंग बताती है कि देश में कारोबार बेहतर हुआ है। लेकिन एक अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष विश्व बैंक ने जो रैंकिंग कि है उसमें 190 देशों में भारत की रैंकिंग 130 है। हालांकि बीते साल भारत की रैंकिंग 131 से 130 पर आया था। सरकार इस रैंकिंग को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और भारत को दुनिया के टॉप-50 देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है।

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