Home समाचार विरोधी भी मानते हैं पीएम मोदी में है सब का विश्वास

विरोधी भी मानते हैं पीएम मोदी में है सब का विश्वास

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नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में लगाता दूसरी बार अपना कार्यभार संभाल चुके हैं। शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने ने साथ ही विभागों का भी बंटवारा किया जा चुका है। लेकिन विरोधियों के बीच अभी भी लोकसभा चुनाव 2019 में मिले अपार बहुमत की चर्चा जारी है। अब तो विरोधी भी मानने को मजबूर है कि मोदी को सभी का विश्वास हासिल है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में दूसरे दलों के नेताओं में इतना विश्वास बढ़ गया है कि वे अब अपनी पार्टी के जहाज से कूदकर सत्तारूढ़ दल के बैंड में शामिल होने लगे हैं। मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिली शानदार सफलता से प्रेरित होकर दूसरे दलों के नेता भी मोदी की नया भारत बनाने की इच्छा से उत्साहित हैं। कई पार्टियों के नेताओं ने तो मोदी में विश्वास की अपनी मंशा जाहिर भी कर चुके हैं।
विरोधी दलों के नेताओं में इस प्रकार की व्यापक सोच भारतीय राजनीति के भविष्य के परिदृश्य और उसके आगे के रास्ते को भी रेखांकित करती है। मोदी के राजनीतिक विरोधियों को यह महसूस होना कि उनके दृष्टिकोण भारत के हर क्षेत्र के लोगों द्वारा अपनाया जा रहा है अपने आप में एक नई राजनीतिक कहानी की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है। यह महज हवा में की गई टीवी डिबेट शो में हुई चर्चा नहीं बल्कि कुछ ठोस संकेत पर आधारित हैं।

टीएमसी के 3 विधायक और 60 पार्षदों का भाजपा में आना
पश्चिम बंगाल में मोदी ने भाजपा का सुदृढ़ आधार जमा दिया है इसका सबूत तो लोकसभा चुनाव में आए परिणाम से ही मिल जाता है। लेकिन भाजपा का कितना प्रसार हो चुका है इसका सबूत टीएमसी से बाहर होकर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या से मिलता है। हाल ही में टीएमसी के तीन विधायक और 60 पार्षदों ने जिस प्रकार भाजपा का दामन थामा है इससे यह अंदाजा लगाना कतई गलत नहीं होगा कि विधानसभा चुनाव में भी भाजपा का परचम लहराना तय है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में एक घटना और हुई है वह है टीएमसी से मुसलिम विधायक मोनिरुल इस्लाम का भाजपा में शामिल होना। क्योंकि ममता दीदी पश्चिम बंगाल में अपने मुसलिम वोटरों के बल पर ही भाजपा से लोहा लेने पर अड़ी हुई है। लेकिन मोनिरुल इस्लाम के भाजपा में शामिल होने से यह साफ हो गया है दीदी का मुसलमानों पर भी पकड़ ढीली पड़ चुकी है।

गुजरात कांग्रेस में मची है हलचल
2019 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम को देखकर एक बार जरूर लगा कि भाजपा की पकड़ वहां ढीली पड़ चुकी है। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले और परिणाम आने के बाज जिस प्रकार गुजरात कांग्रेस में हलचल मची है उससे साफ लगता है कि भाजपा एक बार फिर गुजरात में मजबूत थी, है और रहेगी। गुजरात विधानसभा के कई कांग्रेस विधायकों की अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो 15 से 17 विधायक पहले ही मजबूत संकेत दे चुके हैं कि वह अपनी पार्टी को डंप कर भाजपा में शामिल होने को तैयार हैं। कांग्रेस से आई भाजपा विधायक आशा पटेल का तो यहां तक दावा है कि कांग्रेस के 30 से भी अधिक विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

भविष्य के संकेत भी उत्साहवर्धक है
मध्य प्रदेश से भी भाजपा के लिए उत्साहवर्धक संकेत मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश के सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में शामिल होने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि उनके भाजपा में शामिल होने के साथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जाएगी। एमपी में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव का कहन है कि कई ऐसे नेता हैं जो वहां अपनी ही सरकार ने से नाराज और नाखुश हैं। वे किसी प्रकार अपनी सरकार और पार्टी से पार पाने की बाट जोह रहे हैं। बहुत जल्द ही मध्य प्रदेश की सरकार अपने ही विक्षुब्ध नेताओं की वजह से गिर जाएगी और फिर वहां भी मोदी का डंका बजेगा। क्योंकि जो भी नेता कांग्रेस से भाजपा में शामिल होंगे वे यही कहेंगे कि वे प्रधानमंत्री मोदी की सोच से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हुए हैं।

राजस्थान में भी कांग्रेस के भीतर है गहरा असंतोष
राजस्थान में भी सरकार और पार्टी के व्यवहार की वजह से नेताओं में असंतोष अपने चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस के असंतुष्ट नेता भाजपा में जाने को इच्छुक हैं। बस उन्हें एक ही चिंता सता रही है कि वे संवैधानिक अयोग्यता की जद में न आ जाएं। जिस दिन संवैधानिक अयोग्यता से बचने का रास्ता उनके पास आ गया वे कांग्रेस से अपना नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हो जाएंगे। खासकर जब से लोकसभा चुनाव का परिणाम सामने आया है तब से राजस्थान में कांग्रेसी नेताओं में असंतोष और भी बढ़ गया है। इसलिए कहा जा रहा है कि बहुत जल्दी राजस्थान में सत्ता परिवर्तन या फिर सरकार परिवर्तन होने ही वाला है।

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