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भारतीय वायु सेना को यूपीए सरकार ने नहीं लेने दिया था 26/11 का बदला

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सरकार के साहसिक फैसले का परिणाम कितना सुखद होता है उसे आज हमारी वायु सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देकर साबित कर दिया है। भारतीय वायु सेना ने पुलवामा आतंकी हमले का जो सबक पाकिस्तान को सिखाया है यही सबक 26/11 हमले के बाद भी सिखा सकती थी। लेकिन आज की मोदी सरकार ने अपनी सेना के सामर्थ्य और शौर्य पर भरोसा कर उन्हें खुली छूट दे दी, जबकि साल 2008 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने सेना के सामने अवरोध खड़ा कर दिया था। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर हुए आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार वायु सेना सरकार के आदेश का इंतजार करती रह गई। यह खुलासा कोई और नहीं बल्कि सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल फली होम मेजर ने किया है।

मेजर ने कहा कि 26/11 को हुए आतंकी हमले के दो दिन बाद ही 28/11/2008 को तीनों सेना प्रमुखों के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री एके एंटनी तथा रक्षा सचिव की मौजूदगी में बैठक हुई थी। उस बैठक में भारतीय वायु सेना प्रमुख ने कहा था कि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी है। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक का विकल्प भी सुझाया था। लेकिन मनमोहन सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के विकल्प को ही अवरुद्ध कर दिया। हमारी सेना को खून का घूंट पीने को विवश होना पड़ा।

महीनों तक अलर्ट पर तैनात रहा सुखोई 30 विमान
मुंबई आतंकी हमले पर जवाबी कार्रवाई पर यूपीए सरकार ने चर्चा तो की लेकिन फैसला नहीं ले पाई। मोदी सरकार और यूपीए सरकार में अंतर देखना चाहते हैं तो 2008 में मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले तथा उरी और पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई में देख सकते हैं। एक तरफ यूपीए सरकार के समय हुए आतंकी हमले का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया वहीं मोदी सरकार ने दो बार सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को करारा सबक सिखा दिया है। यह खुलासा भारतीय वायु सेना के तत्कालीन प्रमुख ने यह खुलासा किया है कि सेना ने तो साल 2008 में भी पाकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बना ली थी। लेकिन युपीए सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के विकल्प को ही खत्म कर दिया था। पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंप को ध्वस्त करने के लिए सुखोई 30 विमान को महीनों उत्तर भारत में एलर्ट पर तैनात रखा गया। लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने कभी भी इस मामले में आवश्यक निर्देश नहीं दिए। इसलिए एक अशक्त सरकार का खामियाजा न केवल देश के नागरिकों को भुगतना पड़ा बल्कि भारतीय वायु सेना के साथ देश के जवानों को भी चूपचाप बैठ कर भुगतना पड़ा

 

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