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मोदी राज में अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन: निर्यात पांच साल के उच्च स्तर पर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। उद्योग और व्यापार में मजबूती आई है। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2018-19 के निर्यात में नौ प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 के 314.4 अरब डॉलर के निर्यात के रिकॉर्ड को तोड़ कर यह वित्त वर्ष 2018-19 में 331 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही मार्च में निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो अक्टूबर, 2018 के बाद से सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वैश्विक मंदी के रूप में आई बड़ी गिरावट के बावजूद व्यापारिक निर्यात 2018-19 में 331 अरब डॉलर दर्ज किया गया जो कि अब तक उच्च स्तर है। यह उपलब्धि चुनौतिपूर्ण वैश्विक माहौल में हासिल की गई है।

आइये हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है।

शेयर बाजार की रिकॉर्ड रफ्तार
मंगलवार, 16 अप्रैल को शेयर बाजार के दोनों प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने रिकॉर्ड बनाए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 39,364.34 के सर्वकालिक ऊंचाई तक पहुंच गया। इसके साथ ही एनएसई के 50 शेयरों के निफ्टी ने इतिहास में पहली बार 11,800 का स्तर पार कर 11,807.85 के सर्वोच्च स्तर को छू लिया।

भारतीय बाजार ने अमेरिका-ब्रिटेन सहित पूरी दुनिया को पछाड़ा
मोदी राज में भारतीय शेयर बाजारों ने पिछले वित्त वर्ष में रिटर्न के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन और चीन जैसे दुनिया के प्रमुख बाजारों को पछाड़ दिया है। मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष 2018-19 में बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने 17.3 प्रतिशत, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी के 14.9 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यह अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, ब्राजील, जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के शेयर बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन है। इस दौरान अमेरिका ने 7.6 प्रतिशत, ब्रिटेन ने 3.2 प्रतिशत, ब्राजील ने 11.8 प्रतिशत, चीन ने -2.5 प्रतिशत (निगेटिव), जापान ने -1.2 प्रतिशत (निगेटिव), दक्षिण कोरिया ने -12.5 प्रतिशत (निगेटिव) और हांगकांग ने -3.5 प्रतिशत (निगेटिव) रिटर्न दिया। निगेटिव रिटर्न में निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा। हिंदुस्तान की खबर के अनुसार भारत में पूंजी बाजार का आकार 2018-19 में 6 प्रतिशत बढ़कर 151 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड की प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति 11.4 प्रतिशत बढ़कर 24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गयी। वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का निवेश बढ़कर 30 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई। बांड और इक्विटी के जरिये जुटायी गई राशि 5.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

विदेशी मुद्रा भंडार 1.87 अरब डॉलर बढ़कर हुआ 413.80 अरब डॉलर
देश का विदेशी मुद्रा भंडार पांच अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 1.87 अरब डॉलर बढ़कर 413.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है। रिजर्व बैंक ने कहा कि इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 5.23 अरब डॉलर बढ़कर 411.90 अरब डॉलर हो गया था। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब के करीब था।

मार्च में रिकॉर्ड 1.06 लाख करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा देश में लागू किया गए वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन में मार्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। मार्च में जीएसटी कलेक्शन 1.06 लाख करोड़ रुपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। देश में जीएसटी लागू होने के बाद यह अब तक की सबसे अधिक वसूली है। 1,06,577 करोड़ रुपये में 20,353 करोड़ रुपये का सीजीएसटी, 27,520 करोड़ रुपये का एसजीएसटी, 50,418 करोड़ रुपये का आईजीएसटी और 8,286 करोड़ रुपये का उपकर या सेस शामिल हैं। मार्च, 2018 में राजस्‍व 92,167 करोड़ रुपये था और मार्च, 2019 में राजस्‍व वसूली पिछले वर्ष के समान महीने में की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है।

FPI का बढ़ा भारतीय बाजार में भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भरोसा बढ़ा है। एफपीआई ने मार्च में पूंजी बाजार मे 38,211 करोड़ रुपये का निवेश किया है। फरवरी में एफपीआई ने 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने एक से 22 मार्च के दौरान शेयरों में शुद्ध रूप से 27,424.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि इस दौरान उन्होंने ऋण या बांड बाजार में 10,787.02 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस तरह उनका कुल निवेश 38,211.20 करोड़ रुपये रहा।

मोदी सरकार ने 2018 में जुटाये रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये
मोदी सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। विनिवेश में यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

सिर्फ साढ़े चार साल में जुटाई यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि
पिछले पांच साल में सरकार ने विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड राशि जुटाई है। विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। अपने साढ़े 4 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

देश की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक विशेषज्ञों व रेटिंग एजेंसियों की टिप्पणियां –

भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ बनी रहेगी सबसे तेज- IMF
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में बना रहेगा। आईएमएफ का अनुमान है कि 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत और 2020 में 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगी। आईएमएफ ने चीन की ग्रोथ रेट 2019 में 6.3 और 2020 में 6.1 प्रतिशथ रहने का अनुमान लगाया है रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी के कारण भारत की स्थिति और मजबूत होगी। रिपोर्ट में एनपीए की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की गई है।

आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान- विश्व बैंक
भारत की जीडीपी विकास दर 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है। विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया पर जारी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही। चालू वित्त वर्ष 2019-20 में यह बढ़कर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी निवेश में मजबूती आने, खपत में वृद्धि, मांग बेहतर होने और निर्यात में सुधार इसकी मुख्य वजह है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2018 से खाद्य वस्तुओं के दाम में गिरावट और तेल के दाम में नरमी के साथ रुपये की विनिमय दर में तेजी से महंगाई दर में कमी आई है। विश्वबैंक ने कहा कि सकल मुद्रास्फीति फरवरी 2019 में 2.6 प्रतिशत रही और 2018-19 में यह औसतन 3.5 प्रतिशत रही।

7.5 प्रतिशत रहेगी विकास दर- संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक-समाजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गुरुवार को जारी एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण 2019 में कहा गया है कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2018-19 में देश की अनुमानित विकास दर 7.2 प्रतिशत रही है जिसके चालू वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2020-21 में इसके 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट ने भारत को एशिया-प्रशांत की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बताया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार घट रही है जबकि कई मोर्चों पर भारतीय अर्थव्यवस्था उसे पछाड़ रही है।

जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान
रिजर्व बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ने कहा कि वाणिज्यिक क्षेत्र में बेहतर वित्तपोषण ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक खर्च बढ़ने और कर लाभ के कारण लोगों की खर्च करने योग्य आमदनी अधिक होने से निजी उपभोग बढने का अनुमान है। कारोबारी धारणा भी सकारात्मक बने रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘2019-20 में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली छमाही में यह 6.8 -7.1 प्रतिशत और अंतिम छमाही में 7.3- 7.4 प्रतिशत रह सकती है।’

7.2 प्रतिशत रहेगी आर्थिक वृद्धि दर- एडीबी
हाल ही में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 7.2 प्रतिशत की तेजी से वृद्धि कर सकती है। एडीबी ने एशियाई विकास परिदृश्य 2019 में कहा है कि नीतिगत दर में कटौती और किसानों को सरकार से आय समर्थन मिलने के कारण घरेलू मांग में तेजी आएगी जिससे देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में 7.2 प्रतिशत और 2020 में 7.3 प्रतिशत रहेगी।

7.3 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ से बढ़ेगा भारत- मूडीज
देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2019-20 में 7.3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि वर्ष 2019 और 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अन्य प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और उभरते बाजारों की तुलना में वैश्विक विनिर्माण व्यापार विकास में आई मंदी से भारत थोड़ा कम प्रभावित हुआ है। भारत के समक्ष अपेक्षाकृत कम जोखिम है। यह अगले दो वर्षों में स्थिर गति से बढ़ने की ओर अग्रसर है।

ब्रिटेन को पछाड़ कर भारत इसी वर्ष बन जाएगा विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था
वैश्विक सलाहकार कंपनी पीडब्ल्यूसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी विकास दर को लेकर बेहद उत्साहजनक अनुमान लगाया है। अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि भारत इसी वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में ब्रिटेन को पीछे छोड़ पांचवें स्थान पर आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग समान विकास दर और आबादी के कारण ब्रिटेन और फ्रांस दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में आगे-पीछे होते रहते हैं। लेकिन यदि भारत इस सूची में आगे निकलता है तो उसका स्थान स्थायी रहेगा। पीडब्ल्यूसी की वैश्विक अर्थव्यवस्था निगरानी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष ब्रिटेन की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 1.6 फीसदी, फ्रांस की 1.7 फीसदी तथा भारत की 7.6 फीसदी रहेगी। 2017 में भारत 2,590 अरब डॉलर के बराबर जीडीपी के साथ फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था।

अर्थव्यवस्था मजबूत: अगले वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत रहेगी ग्रोथ रेट
देश की अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। फिच समूह की कंपनी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

फिच ने पहले भी लगाया था 7.5% आर्थिक ग्रोथ का अनुमान 
फिच ने इसके पहले भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है और मजबूत हो रही है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने 2019-20 के लिए वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.5 प्रतिशत तय किया था। 

अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा भारतः फिच
फिच ने इसके पहले यह भी कहा था कि भारत विकास के मामले में अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। फिच के अनुसार भारत अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। इसके साथ ही भारत सबसे तेजी से विकास करने वाला देश भी बन जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत फिच रेटिंग ग्लोबल इकॉनोमिक आउटलुक में शामिल 10 सबसे बड़े उभरते बाजारों की सूची में शीर्ष पर है। फिच ने बताया कि अगले 5 सालों में चीन की जीडीपी जहां 5.5 प्रतिशत रहेगी वहीं भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 रहेगी। फिच ने बताया कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है। युवा आबादी के ही चलते भारत अगले 5 सालों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत-विश्व बैंक
विश्व बैंक ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विश्व बैंक की ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अगले कुछ वर्षों में 7.5 प्रतिशत पर बने रहने का पूवार्नुमान है। रिपोर्ट में सरकार द्वारा किये गये ढांचागत सुधारों की सराहना करते हुए कहा गया है कि उनके परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

उम्मीद से अधिक 7.5 प्रतिशत से ऊपर रहेगी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट: नीति आयोग
मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है। नीति आयोग का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में कम से कम 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और यह 7.8 प्रतिशत के स्तर को छू सकती है। उन्होंने कहा कि यह आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की ओर से लगाए गये अनुमान से ज्यादा रहने वाली है। 

7.5 प्रतिशत की दर के बढ़ेगी जीडीपी- क्रिसिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार विकास की गति जारी रहेगी और वित्त वर्ष 2019 में ग्रोथ को 7.5 प्रतिशत तक ले जाएगी। इसमें कहा गया कि ग्रोथ को निवेश के सहारे के साथ खपत में बढ़ोतरी का साथ मिलेगा। 

भारत अगले दशक की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था- हार्वर्ड
हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने कहा है कि भारत अगले 10 साल दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना रहेगा। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विकास केंद्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर सालाना 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस लिहाज से भारत की वृद्धि दर चीन और अमेरिका से अधिक रहेगी। हार्वर्ड की रिपोर्ट ने 2026 में चीन की वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत और अमेरिका की वृद्धि दर तीन प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पिछले कुछ सालों में जो सुधार हुए उससे अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने की संभावना पैदा हो रही है।

दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा- हार्वर्ड
इसके पहले की भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। CID के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। CID के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली
भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक बताया है। यूएन ने साल 2019 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। ‘वर्ल्ड इकोनोमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट 2018’ रिपोर्ट में यूएन ने कहा है कि कुल मिला कर दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल नजर आ रहा है।

अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहा भारत- अलीसा एयर्स
एक अमेरिकी टॉप थिंक-टैंक काउंसिल में भारत, पाकिस्तान और साउथ एशिया मामलों की वरिष्ठ सदस्य अलीसा एयर्स ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उसे व्यापक वैश्विक महत्व और देश की सैन्य क्षमताओं के विस्तार तथा आधुनिकीकरण के लिये ऊर्जा दे रही है। अलीसा के अनुसार, ‘भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर वैश्विक उछाल दिया है। इसकी मदद से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।’ फोर्ब्स में छपे आर्टिकल में अलीसा कहती हैं, ‘पिछले वर्षों में भारत दुनिया भर में विदेशी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा कारक बनकर उभरा है और अब वैश्विक मंच पर अब भारत ज्यादा मुखर दिखाई दे रहा है। दरअसल भारत खुद को एक ‘प्रमुख शक्ति’ के रूप में देख रहा है।’

‘सपनों’ के साथ आगे बढ़ रहा भारत
मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विश्लेषक फ्रिट्ज लॉज ने ‘द सिफर ब्रीफ’ में एक लेख में भी भारत की प्रशंसा की है और पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। फ्रिट्ज लॉज ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी भारत को आर्थिक, सैन्य, भू-राजनीतिक शक्ति से योग्य बनाने के अपने सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’

भारत बना विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह- चीन
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है। इस नई टैक्स व्यवस्था से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र के विभिन्न करों को मिला दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी।

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