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हर घर बिजली के बाद अब हर घर पानी पहुंचाने को पीएम मोदी ने बनाया नया जल शक्ति मंत्रालय

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देश में बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए लंबे समय से जल संरक्षण और जल प्रबंधन की जरूरत महसूस की जाती रही है। विशेषज्ञ लंबे समय से इस दिशा में युद्ध स्तर पर जल प्रबंधन शुरू करने की बात कहते रहे हैं। लेकिन, अब तक यह मसला उपेक्षित ही रहा था। पीएम मोदी ने लोकसभा चुनावों के दौरान ही पेयजल और सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए एक नया जल शक्ति मंत्रालय बनाने का वादा किया था। मंत्रिमंडल के गठन और मंत्रालयों के वितरण के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजेपी के विजन डॉक्यूमेंट का एक वादा पूरा कर दिया है। उन्होंने पहली बार जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है, जिसका वादा उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी किया था। पहली बार बनाए गए जल शक्ति मंत्रालय की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालयों का पुनर्गठन

पेयजल और सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाए गए जल शक्ति मंत्रालय में पहले के कई मंत्रालयों को मिला दिया गया है। जल शक्ति मंत्रालय पहले के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय को पुनर्गठित कर बनाया गया है। पिछली सरकार में ये मंत्रालय नितिन गडकरी के पास था। अब पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को भी इसमें जोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले महीने तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली में मतदाताओं से वादा किया था कि अगर वह दोबारा केंद्र की सत्ता में वापस आते हैं तो अलग से एक जलशक्ति मंत्रालय का गठन करेंगे। इसके साथ ही, कई चुनावी रैलियों में पीएम मोदी ने जलशक्ति मंत्रालय के गठन का वादा किया था। मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री ने अपना ये वादा पूरा कर दिया।

जल जीवन मिशन का हिस्सा है यह पहल 

जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन का ही एक हिस्सा होगा। जल शक्ति मंत्रालय के तहत देश के हर घर में पाइपलाइन के जरिए जल यानि नल में जल योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार ने साल 2024 तक देश के हर घर में पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पहली सरकार में देश के हर घर में शौचालय सुनिश्चित करने के अभियान और स्वच्छ भारत मिशन के बाद अब दूसरी पारी में मोदी सरकार का फोकस घर-घर पीने का पानी पहुंचाने का है। अधिकारियों के मुताबिक देश प्रयुक्त होने वाले कुल जल का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा पेयजल के तौर पर इस्तेमाल होता है, जबकि कुल जल का 80 प्रतिशत कृषि में खर्च होता है।    

इजरायल से ली जाएगी तकनीकी मदद

मोदी सरकार देश में जल संकट से निपटने के लिए और हर घर तक पेयजल की सुविधा पहुंचाने के लिए इजरायल से तकनीकी मदद लेने पर विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीने से इजरायल के सरकारी अधिकारियों के साथ जल से जुड़े कुछ मंत्रालयों के अधिकारियों और नीति आयोग की बैठक हुई है, ताकि इजरायल से जल संरक्षण को लेकर टेक्नोलॉजी शेयर की जा सके। एक अधिकारी ने कहा, “भारत के विपरीत इजरायल का अधिकांश इलाका शहरी है, जहां इजरायल मीटर्ड वाटर कनेक्शन को लागू करने में सफल रहा। इस प्रणाली को भारत में लागू करने के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी।” उन्होने कहा- चूंकि जल का मामला कई मंत्रालयों से जुड़ा होता है, इसलिए कभी भी जल संकट से निपटने के लिए एक व्यापाक योजना नहीं बन सकी। दरअसल, पूरे देश में उपलब्ध जल संसाधनों के नक्शे भी एक स्थान पर उपलब्ध नहीं हैं।

2030 का दोगुनी हो जाएगी जल की मांग

2018 के नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 600 मिलियन भारतीय गहन जल संकट की समस्या से प्रभावित हैं। पूरे देश में करीब 2 लाख लोग स्वच्छ पेयजल के अभाव की वजह से मरते हैं। 2030 तक देश में उपलब्ध संसाधनों के मुकाबले पानी की मांग दोगुनी होने वाली है। जाहिर है, इससे देश में गहरा जल संकट पैदा हो सकता है। इन सब बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने समय पर कदम उठाते हुए नए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। 

पानी रे पानी…

गौरतलब है कि अप्रैल से जुलाई के महीने में जब देश में भीषण गर्मी पड़ती है, लगभग पूरे देश में लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इस दौरान आठ राज्यों में भीषण सूखे और आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। प्रत्येक वर्ष इन्हीं चार महीनों में बहुत से लोगों और जानवरों की जान चली जाती है। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए हाल में ही केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु को विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी। इन राज्यों से कहा गया था कि वे अपने क्षेत्र में विवेकपूर्ण तरीके से पानी का इस्तेमाल करें, क्योंकि बांधों में पानी का भंडारण खतरनाक स्तर तक गिर चुका है। इससे कभी भी इन राज्यों में भीषण जल संकट पैदा हो सकता है।

समय रहते पीएम मोदी ने उठाया कदम

भारत के ज्यादातर राज्यों में जल संकट तेजी से बढ़ रहा है। फिलहाल देश में कृषि और घरेलु उपयोग के लिए पानी आवश्यकता पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर है। तेजी से बढ़ रहे जल संकट को देखते हुए विशेषज्ञ लंबे समय से युद्ध स्तर पर जल प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। अब मोदी सरकार ने नया मंत्रालय जलशक्ति गठित कर इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की पहल की है। अपने पहले कार्यकाल में भी मोदी सरकार ने नदियों की सफाई, नदियों को जोड़ने, नदी मार्ग बनाने और जल प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए थे। अब अलग मंत्रालय बनने से माना जा रहा है कि इस काम में और तेजी आएगी।

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