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मोदी सरकार 2 साल पहले पूरा करेगी अपना लक्ष्य, 2020 तक सभी को मिल जाएगा अपना घर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में केंद्र की सत्ता संभालते ही घोषणा कर दी थी कि वो 2022 तक सबको पक्का मकान दिलाकर ही दम लेंगे। ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के संकल्प के साथ तभी से उनकी सरकार सबको आवास उपलब्ध कराने के लिए मिशन मोड में जुटी हुई है। पीएम मोदी की इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सबको ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ का सपना लक्ष्य से दो साल पहले ही साकार होने जा रहा है। आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 20 अगस्त, 2019 को दावा किया कि हर एक भारतीय को अपना घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य 2020 में ही हासिल कर लिया जायेगा।

12 करोड़ अतिरिक्त घरों के निर्माण की मंजूरी

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हमने 84 लाख घरों को मंजूरी दी है। मुझे पूरा भरोसा है कि दिसंबर 2019 तक सभी 1 करोड़ घरों को मंजूरी दे दी जाएगी। हमने 12 करोड़ अतिरिक्त घरों के साथ अपने लक्ष्य को 1.12 करोड़ किया है। इन 12 करोड़ घरों को साल 2020 के पहले तीन महीनों में मंजूरी दे दी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि घरों का निर्माण निश्चित समय-सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएमएवई के लाभार्थियों को 24 लाख घर प्रदान कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “हमने 48 लाख घरों की ग्राउंडिंग का काम पूरा कर लिया है। यह आंकड़ा जल्द ही 75 लाख तक पहुंच जाएगा। हमने 24 लाख घर सुपुर्द भी कर दिए हैं और यह आंकड़ा जल्द ही 50 लाख का होगा।” 

चुनौतियों के बावजूद दो साल पहले लक्ष्य होगा हासिल

रीयल एस्टेट क्षेत्र के उद्योगपतियों के संगठन नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के 15वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन हरदीप पुरी ने कहा कि हर एक भारतीय को अपना घर उपलब्ध कराने का एक बड़ा मिशन है। यह सरकार का बहुत महत्वकांक्षी एजेंडा है जिसमें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन हम अपने इस लक्ष्य को 2022 से दो साल पहले ही हासिल कर लेंगे।

शहरी योजनाओं के लिए छह गुना बजट बढ़ाया
पुरी ने कहा कि उनका मंत्रालय सभी को अपना घर तय समय से पहले देने के लिए पूरी तरह से कार्यरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-शासन में शहरी कायाकल्प कार्यक्रमों के लिए 1,50,000 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी, जबकि वर्तमान सरकार के दौर में यह आंकड़ा छह गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2019 तक 100 स्मार्ट शहरों में से सरकार 50 स्मार्ट शहरों में इस बदलाव को लागू करने में सक्षम होगी।

RERA से मिल रही शानदार सफलता 

रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून (RERA) के बारे में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ‘‘रेरा एक शानदार सफलता रही है, लेकिन चूंकि यह दो साल पुराना कानून है, इसलिए हमें एक बार में ही सभी समस्याओं के हल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हम आगे भी RERA प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की प्रक्रिया में हैं। लेकिन, यह खुशी की बात है कि नियामक को क्षेत्र के सभी हितधारकों ने अच्छी तरह से स्वीकार किया है। वहीं यूपी RERA के सदस्य बलविंदर कुमार ने कहा कि खरीदारों की 70 हजार शिकायतें मिली हैं। इसमें दस हजार का निपटारा किया गया है। 

बिल्डर माफिया और भ्रष्ट नेताओं के गठजोड़ के दबाव में कांग्रेस ने सालों तक RERA को लटकाए रखा। नतीजा धरातल पर दिख रहा है, देश के गांव-गांव में मकान बन रहे हैं, शहरों में लोगों को अफोर्डेबल घर मिल रहा है और बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगनी शुरू हो गई है। जो कभी अपना घर लेने का सपना देखना भी भूल चुके थे उनके लिए भी सरकार की ओर से लगातार कोई न कोई योजना सामने लाई जा रही है। यूं समझ लीजिए कि 2014 में देश की जनता ने जो अच्छे दिन का सपना देखा था, वो पूरा हो रहा है।

रीयल एस्टेट बनाएगा 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था
नारेडको के चेयरमैन राजीव तलवार ने इससे पहले कहा कि सरकार लगातार नए कदम उठा रही है और आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जमीन जायदाद कारोबार भारत को 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा समर्थन देगा। नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने सस्ते आवास की सरकार की पहलों को समूचे रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिए बदलाव वाला कदम बताया और कहा इससे क्षेत्र में गतिविधियां तेज हुई हैं। 

होम लोन हुआ सस्ता
होम लोन पर ब्याज दरें कम होने लगी हैं। 1 सितंबर, 2019 से होम लोन रेपो रेट से जुड़ जाएगा। एसबीआई ब्याज दर में कमी के साथ अपने ग्राहकों को कई सारी सुविधाएं भी दे रहा है। इसमें ग्राहक लंबे समय के लिए भी लोन ले सकते हैं। ग्राहक को इसमें प्रोसेसिंग फीस बेहद कम देना है। इसके अलावा बैंक ग्राहक से लोन के प्रीपेमेंट पर कोई पेनाल्टी भी नहीं देनी पड़ेगी। सबसे बड़ी राहत यह भी होगी कि लोन पर ब्याज हर रोज घटती हुई राशि पर लागू होगी। जाहिर है कि होम लोन सस्ता होने से लोगों के लिए घर खरीदना आसान हो गया है। EMI कम होने से उनका हौसला बुलंद हुआ है। उन्हें लग रहा है कि अपना घर खरीदने के लिए शायद इससे बेहतर मौका मिलना मुश्किल है।

2030 तक 600 मिलियन से अधिक लोग शहरों में रहेंगे

आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री ने रेंटल हाउसिंग नीति तैयार करने के मोर्चे पर सरकार द्वारा की गई प्रगति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया है, जिसके दौरान कुछ चिंताएं व्यक्त की गई हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में कई सकारात्मक सुझाव भी सामने आए हैं। पुरी ने योजनाबद्ध शहरीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में पहले पीएम होने की बात को सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दे रही है। एक अनुमान के अनुसार, 2030 तक 600 मिलियन से अधिक लोग शहरों में रहेंगे, जिस समय भारत को एसडीजी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे को पूरा करने की आवश्यकता है। मंत्री ने विश्वास जताया कि ‘हम 2030 से पहले 2030 के सतत विकास लक्ष्यों के एजेंडे का पालन करने के लिए आश्वस्त हैं।’

इनके अलावा मोदी सरकार के उन प्रयासों पर भी एक नजर डालते हैं, जिसने हर व्यक्ति को घर उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।

मोदी सरकार ने ‘सबको घर’ के लिए बनाई ठोस कार्ययोजना
देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रमीण और शहरी के करीब डेढ़ करोड़ लाभार्थियों के दिल से प्रधानमंत्री मोदी के लिए दुआएं निकल रही हैं। ऐसा हो भी क्यों नहीं, आखिर आजादी के इतने वर्षों बाद एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला है, जिसने गरीबों और वंचितों की परेशानियों और जरूरतों को न सिर्फ समझा है, बल्कि उसके लिए ठोस कदम भी उठाए हैं। आजादी के बाद से देश में पहले भी कई सरकारें आईं, गरीबों का जीवनस्तर सुधारने के वादे किए, लेकिन धरातल पर किया कुछ भी नहीं। मोदी सरकार ने इंसान की सबसे बड़ी जरूरत, जिंदगी के सबसे बड़े सपने यानि अपना घर, को पूरा करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई है और उस पर शिद्दत के साथ अमल भी किया जा रहा है। आज देशभर में डेढ़ करोड़ से अधिक लाभार्थियों के चेहरों पर जो उमंग, उत्साह, खुशी नजर आ रही है, वह मोदी सरकार के इन्हीं प्रयासों का नतीजा है।

आवास योजना में महिलाओं और कमजोर वर्गों पर फोकस
प्रधानमंत्री आवास योजना का फोकस विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों और महिलाओं पर है। यह योजना महिला सशक्तिकरण का माध्यम भी नहीं है, शहरों में 70 प्रतिशत से अधिक मकान महिलाओं के नाम पर हैं। आवास योजना के सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है, जैसे निर्माण के लिए मनरेगा, शौचालय के लिए स्वच्छ भारत मिशन, बिजली की सुविधा के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना, एलपीजी के लिए उज्ज्वला योजना से जोड़ा गया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को ब्याज पर भी 3 से 6 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। पीएम मोदी ने कहा है कि अगर कोई इस योजना के तहत घर बनाने के लिए पैसे की मांग करे, तो बेहिचक इसकी शिकायत कलेक्टर या म्युनिस्पिल कमिश्नर से करें।

नोटबंदी से अफोर्डेबल हुआ घर खरीदना
जानकारी के अनुसार नोटबंदी से पहले रियल एस्टेट की अर्थव्यवस्था कालेधन पर टिकी थी। रियल एस्टेट में निवेश करना कालेधन छिपाने का एक बहुत बड़ा जरिया बना हुआ था। बिल्डर भी इसका खूब फायदा उठाते थे। 5 लाख का घर कैश में ब्लैकमनी लेकर 15 लाख में बेचते थे। नुकसान सिर्फ ईमानदारी के पैसों से अपने लिए छत का सपना देखने वालों को हो रहा था। मकानों के गैर-उचित दाम देखकर उनका हौसला टूट जाता था। यूं कह लीजिए कि बिल्डरों और काले कुबेरों ने रियल एस्टेट पर कब्जा कर रखा था। लेकिन नोटबंदी ने एक ही झटके में बिल्डर माफिया और भ्रष्टाचारियों की कमर तोड़ दी। ब्लैकमनी सिस्टम से बाहर हो गई। लिहाजा धीरे-धीरे घरों की कीमतें उस स्तर पर पहुंचने लगीं जो उसकी असल कीमत होनी चाहिए थी। यही नहीं मोदी सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग के क्षेत्र में विदेशी निवेश को भी छूट दी है और इसे उद्योग का दर्जा दे दिया गया है।

ब्याज सब्सिडी से EMI में मिली बड़ी राहत
बैंकों ने होम लोन सस्ता करना शुरू किया, उससे पहले ही मोदी सरकार ने होम लोन पर लगने वाले ब्याज दरों में सब्सिडी देने की घोषणा कर दी थी। ये स्कीम मुख्य रूप से शहरी EWS,निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए है। इसके तहत कर्ज के ब्याज पर 3, 4 और 6.5 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। यानी EWS में आने वाले जिन लोगों की सालाना आय 6 लाख रुपये तक है उन्हें 6 लाख रुपये तक के होम लोन के लिए 6.5% सब्सिडी देने की व्यवस्था है। उसी तरह 12 लाख रुपये तक की आय वालों को 9 लाख रुपये तक की होम लोन के लिए 4% और 18 लाख रुपये तक की आय वालों को 12 लाख रुपये तक के होम लोन पर 3 प्रतिशत सब्सिडी सरकार की ओर से देने की व्यवस्था की गई है।

PF से डाउन पेमेंट या EMI की सुविधा
इस योजना के तहत अपना घर खरीदने के लिए पीएफ से 90 प्रतिशत तक रकम निकालने का अनुमति दे दी गई है। यही नहीं अब से होम लोन की EMI चुकाने में भी EPFO मदद करेगा। ऊंची कीमतों के कारण अपने आशियाने का सपना पूरा करना वेतन भोगियों के लिए काफी मुश्किल होता है। इसी को ध्यान में रखकर इस तरह की व्यवस्था की गई है। यानी या तो आप डाउन पेमेंट के लिए एकमुश्त पैसा अपने पीएफ से निकाल सकते हैं या फिर उसका इस्तेमाल होम लोन की EMI चुकाने में कर सकते हैं।

DBT के जरिए लाभार्थियों की आर्थिक सहायता

बेहतर गुणवत्ता के आवासों के तेजी से निर्माण के लिए लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष हस्तांतरण के जरिए आईटी-डीबीटी के जरिए सहायता राशि मुहैया कराई गई है। बेहतर गुणवत्ता के घरों के निर्माण के लिए ग्रामीण मजदूरों और मिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए निगरानी

अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए घरों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। लाभार्थियों के मकानों के निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों पर नजर रखी जा रही है। राज्यों ने निर्माण सामग्री को रियायती दामों पर उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि आवासों का निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हों। इन आवासों में शौचालय, एलपीजी कनेक्शन और पीने के पानी की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। कुछ राज्यों में इस योजना के तहत कलस्टर और कॉलोनियां भी बनाई गई हैं, जिससे आमतौर पर भूमिहीन लाभार्थी लाभांवित होंगे। इन आवासों का निर्माण दिल्ली के यूएनडीपी-आईआईटी ने किया है और संबंधित राज्यों के लाभार्थियों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपनी पसंद के अनुरूप आवासों का डिजाइन चुन सकें।

 

 

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