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कुरान, उपनिषद और गीता ज्ञान की ‘अज्ञानता’ में फंसे युवराज

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”मैं बीजेपी और आरएसएस से लड़ने के लिए गीता और उपनिषद पढ़ रहा हूं।”
ये खुलासा खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने किया है। लेकिन राहुल के गीता प्रेम से एक नई राजनीतिक बहस चल पड़ी… क्या कांग्रेस ने अपनी पुरानी लाइन बदलते हुए नरम हिंदुत्व की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं? जाहिर है राजनीतिक बहस ने जो दिशा ली उससे कांग्रेस एक बार फिर कन्फ्यूज्ड होती दिखी। कांग्रेस नेताओं की जैसे ही नींद टूटी और दूसरे दिन 150 अल्पसंख्यक नेताओं का राहुल गांधी से मिलने का प्लान बन गया। मीडिया को बताया गया… और एक डॉयलॉग भी सुझाया गया…. ”गीता और कुरान दोनों का सम्मान, लेकिन सबसे ऊपर संविधान।” राहुल गांधी का ये डायलॉग मीडिया की सुर्खियां तो बनी लेकिन एक बार फिर कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को सरेआम कर गई।

राजनीतिक भविष्य का अंधेरा दूर करने को गीता ज्ञान !
दरअसल गीता और उपनिषद वे आरएसएस और बीजेपी से मुकाबले के लिए पढ़ रहे हैं, न कि देश की सभ्यता के स्तंभ को जानने समझने के लिए। राहुल गांधी गीता के ज्ञान का अध्ययन अपनी ‘अज्ञानता’ दूर करने के लिए नहीं राजनीतिक भविष्य का अंधेरा दूर करने के लिए कर रहे हैं। बहुसंख्यक समाज से कट चुकी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी गीता-उपनिषद के माध्यम से मानवता का भाव जानने के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष गीता और उपनिषद को देश के सम्मान और स्वाभिमान को जानने समझने के लिए नहीं पढ़ रहे बल्कि राजनीति अभियान के लिए कर रहे हैं।


क्या राष्ट्रवाद की राजनीति की ओर चलना चाहती है कांग्रेस!
राहुल गांधी आरोप लगाते हैं कि बीजेपी देश में एक धर्म विशेष की सोच को थोपने की कोशिश कर रही है। लेकिन इसके साथ ही ये सवाल उठते हैं कि आखिर राहुल को आज गीता-उपनिषद का ज्ञान कहां से आया। मुस्लिम तुष्टिकरण और नकारात्मक राजनीति की बुनियाद पर खड़ी कांग्रेस को गीता और उपनिषद की याद कैसे आ गई? दरअसल आज कांग्रेस की जो गत हो गई है उसकी जड़ में पार्टी की नकारात्मक राजनीति है। मुस्लिम तुष्टिकरण की आड़ में देश की अस्सी प्रतिशत आबादी को कांग्रेस ने कभी एक नहीं होने दिया। बहुसंख्यकों को टुकड़ों में बांट कर मुस्लिमों की गोलबंदी से राजनीति खेलती रही है कांग्रेस। लेकिन बीते वक्त में कांग्रेस न तो बहुसंख्यकों को साध पाई और न ही मुस्लिमों को गोलबंद रख सकी। जाहिर है कांग्रेस को गीता ज्ञान तो याद आएगी ही।

सरेआम गोहत्या के बाद खुला राहुल का ‘ज्ञान चक्षु’!
केरल के कन्नूर में कांग्रेस के एक नेता ने सरेआम गोहत्या कर दी। इतना ही नहीं उसे वहीं पकाया भी गया और बांटा भी गया। जाहिर है कांग्रेस की किरकिरी पूरे तौर पर हो गई। पार्टी से जुड़े नेताओं ने विरोध भी जताया और पार्टी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन कांग्रेस ने राजनीतिक मजबूरियों के चलते आरोपी नेता को सिर्फ निलंबित किया। जाहिर है बहुसंख्यक समाज में अब भी कांग्रेस के इस कृत्य पर गुस्सा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे में राहुल को गीता ज्ञान का याद आना स्वाभाविक है।


अल्पसंख्यकों को फिर लुभाने की कोशिश
हम-आप ये सोच रहे हैं कि शायद कांग्रेस अब सकारात्मक तरीके से सोचने लगी है। लेकिन क्या यही सच है? दरअसल राहुल गांधी कितने कन्फ्यूज्ड हैं ये बात तो उनके एक के बाद एक परस्पर विरोधाभासी बयान से पता लगता है। उनका एक्शन भी इस बात की पुष्टि करता है कि वे राजनीतिक रूप से कितने अपरिपक्व हैं। दरअसल गीता-उपनिषद के बयान के बाद मुस्लिम को गोलबंद करने की राजनीति फिर छेड़ दी।

कहा जा रहा है कि पार्टी के ही कुछ नेताओं ने उन्हें कहा कि गीता-उपनिषद की बात करने से मुसलमान उनसे नाराज हो जाएंगे। फिर क्या था, राहुल का ज्ञान चक्षु खुल गया और फटाफट अहमद पटेल, मोहसिना किदवई, शकील अहमद, इमरान मसूद, हारुन यूसूफ, प्रदीप जैन आदित्य और ऑस्कर फर्नांडीज जैसे नेताओं से मुलाकात फिक्स कर दी। जाहिर है राहुल ने अल्पसंख्यक राजनीति को फिर से रेखांकित करने की कोशिश की। साफ है कि कांग्रेस जहां एक तरफ अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति पर चल रही है, वहीं बहुसंख्यकों को लेकर अभी भी भ्रम की स्थिति में है। लब्बोलुआब ये कि कांग्रेस के युवराज गीता-कुरान के वास्तविक ज्ञान को लेकर अब भी कन्यफ्यूज्ड हैं।


कांग्रेस की ‘फूट डालो-राज करो’ की राजनीति
पीएम मोदी ने जहां देश की एकता के लिए ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा दिया वहीं कांग्रेस की राजनीति अर्से से ‘फूट डालो-राज करो’ की राजनीति करती रही है। कश्मीर समस्या सबके सामने है। खालिस्तान के नारे अब भी लग रहे हैं। हाल-फिलहाल द्रविड़नाडु की मांग भी कांग्रेसियों ने ही की है। नॉर्थ-ईस्ट में आबादी का समीकरण बिगाड़ दिया गया है।

हिंदू, मुसलमान, दलित, सिख, ईसाई में बंटे हुए हैं देशवासी। सिख दंगा हो, भागलपुर का दंगा हो या गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई का मामला, सब में कांग्रेस का कनेक्शन निकला है। जाहिर है राष्ट्र का भाव पनपने ही नहीं दिया कांग्रेस ने। लेकिन अब वक्त बदला है, लोगों में देश की भावना बलवती होती जा रही है, लेकिन कांग्रेस अपनी वही पुरानी ‘फूट डालो-राज करो’ की राजनीति के आसरे आगे बढ़ने की जुगत में है।

क्या है आइडिया ऑफ इंडिया?
राहुल गांधी अक्सर कहते हैं कि ‘माय आइडिया ऑफ इंडिया’ । कांग्रेस की सोच के मुताबिक वो भारत को एक भौगोलिक दायरे में देखती है और बात संविधान की करती है। लेकिन ये भी सच है कि जिन्हें छियालीस वर्ष की उम्र में देश को जानने समझने के लिए उपनिषद और गीता ज्ञान की आवश्यकता पड़ी हो वे भला आइडिया ऑफ इंडिया की क्या बात करेंगे। दूसरी तरफ पीएम मोदी ने देश के सामने अपना विजन रखा है। उन्होंने आइडिया ऑफ इंडिया की जो तस्वीर पेश की है उसे भी देखिए।

पीएम मोदी का ‘आइडिया ऑफ इंडिया’
1. सत्यमेव जयते अर्थात सत्य की सदा जीत होती है।
2. अहिंसा परमो धर्म: अर्थात अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।
3. पौधों में परमात्मा दिखना।
4. आ नो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वत: अर्थात संपूर्ण विश्व से अच्छे विचारों को आने दो।
5. सर्वपंथ समभाव अर्थात सभी आध्यात्मिक पंथ समान हैं।
6. वसुधैव कुटुंबकम अर्थात पूरा विश्व एक परिवार है।
7. सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: अर्थात सभी सुखी एवं समृद्ध हों सभी रोग मुक्त हों।
8. सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह वार्य करवावहै तेजस्वी नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै अर्थात हम सदा सुरक्षित रहें हम सदा पोषित रहें हम सदा पूरी उर्जा से मिलकर काम करते रहें हमारी बुद्धि तीक्ष्ण हो जिसमें द्वेष न पनपे।
9. न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं न पुनर्भवम अर्थात सत्ता, धन मोक्ष अथवा पद की लालसा में प्रसन्नता नहीं मिलती। प्रसन्नता सभी मानव मात्र के दुख और पीड़ा दूर करने से मिलती है।
10. वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड पराई जाणे रे अर्थात ईश्वर का सच्चा भक्त वही है जो दूसरों की पीड़ा को समझे।
11 दरिद्र नारायण सेवा अर्थात दरिद्र की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है।
12. नर करनी करे तो नारायण हो जाए अर्थात मानव यदि कर्म करे तो ईश्वर बन सकता है।
13. नारी तू नारायणी।
14. यत्र नार्यन्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया: अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है। जहां उनका असम्मान होता है वहां कोई कर्म फलदायी नहीं होता।
15. जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात मां और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।


ये हैं राहुल के धर्मगुरु
बहरहाल इन सबके बीच एक सवाल है कि आखिर राहुल गांधी को ये गीता और उपनिषद कौन सिखा रहा है? तो जान लीजिए उनके राजनीतिक गुरु को भी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता जयराम रमेश राहुल गांधी को गीता और उपनिषद के एक-एक अध्याय विधिवत समझाकर पढ़ा रहे हैं।
दरअसल पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को गीता के सभी 18 अध्याय कंठस्थ हैं। रमेश ने अन्य हिन्दू धर्मग्रंथों का भी अध्ययन कर रखा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं को जब पता चला कि राहुल गांधी गीता और उपनिषद का अध्ययन करना चाहते हैं तो उन्होंने जयराम रमेश को इसके बारे में बताया। और इस तरह जयराम रमेश राहुल के ‘धर्मगुरु’ बन गए।

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