Home तीन साल बेमिसाल पांच हजार साल की सांस्कृतिक विरासत को सहेजता संस्कृति मंत्रालय

पांच हजार साल की सांस्कृतिक विरासत को सहेजता संस्कृति मंत्रालय

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कला एवं संस्कृति का हमारे समाज में सर्वोच्च स्थान है, इसके अभाव में, लोग किसी रोबॉट के समान होंगे। -नरेन्द्र मोदी 

संस्कृति किसी राष्ट्र या समाज की अमूल्य सम्पत्ति होती है। समाज बनते हैं और बिगड़ते हैं लेकिन संस्कृति ना तो एक युग में बन जाती है और ना बिगड़ती ही है। वह युगों-युगों की गोद में पलती है उसके पन्नों में अनेकों उत्थान, पतन, आघात, अवरोधों का इतिहास होता है। संस्कृति ही किसी देश, समाज या जाति का प्राण है। किसी भी देश की सामाजिक प्रथायें, व्यवहार, आचार-विचार, पर्व, त्यौहार, सामुदायिक जीवन का पूर्ण ढांचा ही संस्कृति की बुनियाद पर खड़ा रहता है। विभिन्न परंपराओं और रिवाजों से भरपूर इस देश को एक सूत्र में प्राचीन समय से संस्कृति की अदृश्य डोर ने बांधे रखा है। संस्कृति की इस अदृश्य शक्ति को शब्दों और चित्रों में नहीं समेटा जा सकता है, इसको जीने से ही अनुभव किया जा सकता है। हमारी इसी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के इस अनुभव को देश के जन-जन तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने पिछले तीन साल में ऐसी योजनाओं की नींव डाली है।

देश की विरासत को पर्यटन के जरिए समझने से बेहतर तरीका और कोई नहीं हो सकता, इसके लिए मोदी सरकार ने 2014-14 में स्वदेश योजना की शुरुआत की, इसके तहत थीम पर आधारित पर्यटन केन्द्रों का विकास किया जा रहा है।
प्रमुख थीम हैं- बुद्ध सर्किट, पूर्वोत्तर भारत सर्किट, तटीय सर्किट, हिमालय सर्किट,कृष्ण सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, रामायण सर्किट, और धरोहर सर्किट।

इन सर्किटों के अलावा देश के प्राकृतिक सौदंर्य पर आधारित भी कई सर्किट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें मरु सर्किट, वन्य जीव सर्किट, आदिवासी सर्किट, और ग्रामीण सर्किट हैं।

भगवान बुध्द से जुड़े महोत्सव और स्थानों को अहमियत—
बौद्ध धर्म का जन्म भारत में हुआ और यहीं से इसका प्रचार-प्रसार हुआ। भगवान बुद्ध से जुड़े आठ प्रमुख स्थानों में सात स्थान भारत में ही है। बौद्ध धर्म से जुड़े सभी स्थानों को एक पर्यटन सर्किट में जोड़कर, सुविधाओं के स्तर को बढ़ाने की योजना पर मोदी सरकार पिछले तीन सालों से काम कर रही है, जल्द ही इसका परिणाम भी दिखेगा।


बौद्ध सर्किट-

सर्किट 1: धर्मयात्रा- 5 से 7 दिनों के इस सर्किट में, गया (बोधगया), वाराणसी (सारनाथ), कुशीनगर, पीपरवा (कपिलवस्तु) की यात्रा के साथ-साथ नेपाल के लुम्बिनी की एक दिन की यात्रा शामिल है।

सर्किट 2: विस्तारित धर्मयात्रा -10 से 15 दिनों के इस सर्किट में, बोधगया (नालंदा, राजगीर, बाराबर गुफा, प्रागबोधी हिल, गया), पटना (वैशाली, लोरिया नंदनगढ़, लोरिया अरेराज, केसरिया, पटना संग्रहालय), वाराणसी (सारनाथ), कुशीनगर, पीपरवा (कपिलवस्तु, श्रावस्ती, सनकिसा) के साथ-साथ नेपाल में लुम्बिनी की एक दिन की यात्रा शामिल है।

सर्किट 3: बौद्ध विरासत स्थल (राज्य सर्किट)
1. जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, श्रीनगर (हरवन, परिहासपोरा) और जम्मू (अम्बारन)
2. हिमाचल प्रदेश- धर्मशाला, स्पीति, किन्नौर और लाहौल
3. पंजाब- सांघोन
4. हरियाणा- जींद (अस्सान), यमुनानगर (सुघ)
5. महाराष्ट्र- औरंगाबाद (अजंता, एलोरा, पिथालकोरा गुफा), पुणे (कारला गुफा), मुंबई (कन्हेरी गुफा), पुणे (भाजा गुफा) और नासिक (पांडवलेनी गुफा)
6. आंध्र प्रदेश- अमरावती, नागार्जुनकोंडा, विजाग (बोर्रा गुफा, सलीहुंदुम गुफा)
7. मध्य प्रदेश- सांची, सतधारा, अंधेर, सोनारी, मुरुलकुर्द
8. ओडिशा (धौली, रतनागिरी, ललितगिरी, उदयगिरी, लंगुड़ी, खंडागिरी)
9. छत्तीसगढ़- सिरपुर
10. पश्चिम बंगाल- कोलकाता (भारतीय संग्रहालय)
11. सिक्किम- रुमटेक, इंचाय और अन्य मोनास्ट्रॉ
12. अरुणाचल प्रदेश- तवांग और बोमडीला

भगवान राम के जीवन पर आधारित रामायण सर्किट—
रामायण सर्किट में 11 स्थानों पर फोकस किया गया है। इनमें अयोध्या, नंदीग्राम, श्रृंग्वेरपुर और चित्रकूट यूपी में है। पहले दौर में इन चार स्थानों पर फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर और दरभंगा, छत्तीसगढ़ में जगदलपुर, तेलंगाना में भद्राचलम्, कर्नाटक में हंपी और तमिलनाडु के रामेश्वरम् को भी दूसरे चरण में रामायण सर्किट में जोड़ने की योजना है।


रामायण सर्किट में वाल्मीकि और तुलसी रामायण के हिसाब से भगवान राम के जीवन से जुड़ी घटनाओं से जुड़े स्थान हैं। अयोध्या में राम और रामायण संग्रहालय बनाया जायेगा। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरयू नदी के किनारे 25 एकड़ की जमीन उपलब्ध कराई है। अब केंद्र और यूपी सरकार के सहयोग से यह संग्रहालय बनाया जाएगा। इसमें 225 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसमें प्राचीन परंपरा को दिखाने के लिए 3डी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक भारत-श्रेष्ठ भारत के विचार के तहत राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन किया जाता है। देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक महोत्सवों का आयोजन करके सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का मोदी सरकार का यह एक अहम कदम है। देश के सीमावर्ती और पहाड़ी राज्यों के लोगों को संस्कृति से जोड़कर मुख्यधारा में लाने का प्रयास हो रहा है। इसी के मद्देनजर सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के बाद अब जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव मनाने की तैयारी की है। जून 2017 में यह महोत्वस लद्दाख में होगा, जहां देश दुनिया से लोग पहुंचेंगे।

भारत महोत्सव का आयोजन
विश्व में अपने संगीत, कला, नृत्य और विरासत के जरिए देश के सकारात्मक पक्ष को दुनिया के सामने रखने के लिए, अलग-अलग देशों में समय-समय पर भारत महोत्सव का आयोजन होता है। यह आयोजन यूक्रेन, कंबोडिया, घाना, नीदरलैंड, ओमान आदि देशों में हुआ। कंबोडिया में होने वाले भारत महोत्सव में रामायण पर आधारित नाटक का मंचन किया गया, क्योंकि कंबोडिया की संस्कृति का मूल भारतीय संस्कृति ही है। जाहिर है ऐसे महोत्सवों के जरिये भारत हर देश विशेष की संस्कृति से अपनी संस्कृति को जोड़ने का प्रयास करता है।

 एक भारत-श्रेष्ठ भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2015 को सरदार पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की शुरुआत की थी। इस परिकल्पना में यह महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के एक राज्य दूसरे राज्य की संस्कृति, खेल कूद और व्यंजनों से परिचित हों। इसे हकीकत में बदलने के लिए राज्य एक-दूसरे से अपनी जोड़ी बना करके आयोजन कर रहे हैं। नीति आयोग इन राज्यों के बीच जोड़ी बनाने और अन्य पहलुओं में मदद करता है। महाराष्ट्र ने 2016 में अगले चार सालों के लिए चार राज्यों ओड़िशा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से जोड़ी बनायी है।

इसी तरह 21 जनवरी 2017 को छत्तीसगढ़ और गुजरात ने इस प्रकार की जोड़ी बनाने के सहमति पत्र पर भुज में हस्ताक्षर किये। जिसके तहत अभी हाल ही में बड़ोदरा में ग्रामीण खेलों का आयोजन किया गया। इस ग्रामीण ओलंपिक में छत्तीसगढ़ के लोक खेलों पिट्ठूल, तुवे, लंगड़ची, संखली, फुगड़ी, गेंड़ी का खेल दर्शकों को दिखाया गया।

अभी तक गोवा की झारखंड से, हरियाणा की तेलगांना से, पंजाब की आंध्र प्रदेश से, पुड्डचेरी की दमन व दीव से और चंडीगढ़ की दादर नागर हवेली से जोड़ी बनी है।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया गया
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से जुड़ी गोपनीय जानकारियों की फाइल जो सात-आठ दशकों से सार्वजनिक नहीं की गई थी, उन्हें सार्वजनिक करने का फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया। 100 फइलों में कैद इन सूचनाओं को किस्तों में जारी करने का निर्णय लिया गया, जिसकी पहली किस्त डिजिटलीकरण के बाद 23 जनवरी 2016 को नेताजी की 119वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जारी किया। इसके बाद किस्तों में इन फाइलों की सूचनाएं www.netajipapers.gov.in जारी की जाती रही हैं।

1957 में राष्‍ट्रीय अभिलेखागार भारत को रक्षा मंत्रालय की ओर से आजाद हिन्‍द फौज के संबंध में 990 डी-क्‍लासिफाइड फाइलें प्राप्‍त हुई थीं। इसके बाद 2012 में खोसला आयोग से संबंधित 271 फाइलें/सामग्री तथा न्‍यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग की 759 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुई थीं। इस तरह गृह मंत्रालय से कुल 1030 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुईं। ये सभी फाइलें सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए खोल दी गई हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा भुला दिए गए नायकों का स्मरण
मोदी सरकार ने पिछले तीन सालों में उन सभी देश की संस्कृति से जुड़े महानायकों को जीवंत करने का प्रयास किया जिनको पूर्व की सरकारों ने भुला दिया था। इनकी जयंती पर विशेष आयोजन करके जनता में भारतीय संस्कृति के उच्च मूल्यों के लिए जागरूगता पैदा करने का प्रयास किया।

श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन की 500वीं जंयती
वृंदावन में चैतन्य महाप्रभु के आगमन के 500वें साल पर 500 रुपये के स्मारक वाले और 10 रुपये के चलने वाले सिक्कों को सरकार ने जारी किया है। इस अवसर को भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने विशेष आयोजन किये। 1515 में चैतन्य महाप्रभु वृदांवन आये थे और उनका आने का उद्देश्य यही था कि भगवान श्री कृष्ण से जुड़े स्थानों को खोजकर उन्हें पुनः स्थापित किया जाए। इस कार्य को करने में वे सफल रहे।

गुरुगोविंद सिंह की 350वीं जयंती
गुरुगोविंद सिंह की 350वीं जयंती पर इसी साल 5 जनवरी को पटना में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं शामिल हुए।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी
पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी को वर्ष भर 2015 में मनाया गया। अंत्योदय की जिस विचारधारा को मोदी सरकार लागू कर रही वह पंडित दीनदयाल की ही देन है।

सतगुरु राम सिंह की 200वीं जयंती
सत गुरु राम सिंह कूका आंदोलन एवं नामधारी सिख संप्रदाय के एक महान नेता की 200वीं जयंती है। उनकी जयंती मनाने का फैसला समाज के कल्‍याण की दिशा में उनके द्वारा किये गये योगदानों को ध्‍यान में रखकर किया गया।

नानाजी देशमुख जन्म शताब्दी
11 अक्टूबर 2016 से 11 अक्टूबर 2017 तक जन्म शताब्दी मनायी जा रही है। नानाजी की कर्मभूमि चित्रकूट का विकास भी 43 करोड़ रुपये खर्च होगी।

प्रसिद्ध स्‍वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिन्‍ल्‍यू के जन्‍म शताब्‍दी
पूर्वोत्तर की प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिन्ल्यू की जन्मशती वर्ष 2015 में उनकी याद में सौ रुपये का स्मरणोत्सव सिक्का और पांच रुपये का चलन वाला सिक्का जारी करते हुए रानी मां कहकर संबोधित किया।

लाला लाजपत राय की 150वीं जयंती
‘पंजाब केसरी’ या ‘शेरे-ए-पंजाब’ लाला लाजपत राय की 28 जनवरी 2015 से 28 जनवरी 2016 तक 150वीं जयंती वर्ष मनाई गई। उनकी स्मृति में 28 जनवरी को 150 रुपये का एक सिक्का और 10 रुपये का इस्तेमाल किया जाने वाला सिक्का जारी किया ।

भीष्म साहनी जन्मशती
हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक भीष्म साहनी का जन्म शताब्दी वर्ष 2015 में मनाया गया।

महाराणा प्रताप की 475 वीं जयंती
9 मई 2015 -2016 तक महाराणा प्रताप की 475वीं जयंती वर्ष मनाया गया। इस स्मृति में 100 रुपये और 10 रुपये के सिक्के जारी किए गये।

खान अब्दुल गफ्फार खान की 125वीं जयंती
20 मई 2015-2016 को सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान की 125वां जयंती मनाई गई। इस अवसर पर 20 मई 2016 को उनके वंशजों यानि प्रपौतियों यास्मिन खान और तनजीम खान तथा प्रपौत्र दानिश खान को सम्मानित किया गया। खान अब्दुल गफ्फार खान एक महान व्यक्ति थे जो भारत की स्वतंत्रता और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्पित थे। उन्होंने कभी भी दो राष्ट्र सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया और भारत के विभाजन का जोरदार विरोध किया था। भारत की एकता में विश्वास करने वाले और कट्टर गांधीवादी थे। उन्हें 1987 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्‍म स्‍थान पर राष्‍ट्रीय स्‍मारक
24 जून 2015 को मोदी सरकार ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्‍म स्‍थान बिहार के छपरा (सारण) जिले में लाला का तोला, सिताब, दियारा में एक राष्‍ट्रीय स्‍मारक स्‍थापित करने का निर्णय लिया। इस स्‍मारक में एक संग्रहालय और एक संस्‍थान भी होगा।

चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी- ‘स्वच्छाग्रह-बापू को कार्यांजलि’:
चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में राष्ट्रीय अभिलेखागार में ‘स्वच्छाग्रह-बापू को कार्यान्जलि’ पर एक प्रदर्शनी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 अप्रैल को शुरू किया। महात्मा गांधी के सत्याग्रह से प्राप्त हुई चपांरण की सफलता को देश को स्वच्छ करने के लिए गांधी के इस विचार का यह एक अभिनव प्रयोग है। इस साल इस के तहत और भी आयोजन किये जा रहे हैं।

गंगा संस्कृति यात्रा
गंगा की सांस्कृतिक विरासत को खोजने वाली ‘गंगा संस्कृति यात्रा’ की शुरुआत 14 फरवरी, 2016 को गंगोत्री से किया गया। इसे गंगा नदी को सुरक्षित रखने और पुनर्जीवित करने के प्रति आम लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए किया गया। गंगोत्री से प्रारंभ होने वाली यात्रा 13 मार्च, 2016 को गंगा सागर में समाप्त हुई और इस दौरान गंगा के किनारे 262 स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए करीब ढाई करोड़ लोगों को जोड़ा गया।

गंगा की सांस्कृतिक विविधता का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि गंगा की लहरों के किनारे 62 धुनें, 254 तरह के गीत और नाटक, 122 नृत्य शैलियां, 200 शिल्प, लोक चित्रकला की 12 शैलियां और 26 भाषाएं और बोलियां पाई जाती हैं। आज भी गंगा के किनारे सौ से अधिक समारोह और 50 प्रमुख मेलों का आयोजन होता है, जिसमें प्रति वर्ष करोड़ों लोग शामिल होते हैं। गंगा नदी से लगभग एक करोड़ लोग अपनी आजीविका अर्जित करते हैं।

विरासत धरोहरों का संरक्षण

भारत से चुराई गई मूर्तियां वापस लौटीं
भारत की अपार विरासत में मूर्तियां, बर्तन, गहने, अन्य सामान देश के कोने- कोने मे फैले हुए हैं, जिनकी सुरक्षा सरकारें नहीं कर सकीं और इनको व्यापारियों ने दूसरे देशों में बेच कर जबरदस्त कमाई की। ऐसी ही कुछ मूर्तियां जो विभिन्न देशों में चुराकर ले जायीं गई थी, वे मोदी सरकार के आने के बाद से वापस आने लगी हैं। सितंबर 2016 में ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने तीन प्राचीन कलाकृतियों को वापस किया। इन लौटाई गई कलाकृतियां में बैठे हुए बुद्ध, देवी प्रत्यांगिरा और बुद्ध के भक्तों की मुद्रा दर्शायी गई हैं।

नव नालंदा महाविहार, नालंदा पर नई पहल 
13 नवंबर 2006 को नव नालंदा महाविहार को विश्वविद्यालय का दर्जा, मानव संसाधन मंत्रालय ने दिया था। भारत के इस प्राचीन विश्वविद्यालय की उच्चकोटी का स्तर बनाये रखने के लिए कई प्रकार की नई पहल की गई।

पाली त्रिपिटक के 41 खंडों का फिर से मुद्रण 
पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से यह आउट ऑफ प्रिंट पाली त्रिपिटक का पहली बार देवनागरी में 41 खंडों में प्रकाशन किया गया।

मास्‍टर जुआन जैंग के अवशेषों को जुआन जैंग स्‍मृति परिसर में लाया 
चीनी यात्री भिक्षु जुआन जैंग प्राचीन नालंदा विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षक रहे। 12 जनवरी, 1957 को भारत सरकार की ओर से तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी अस्थि प्राप्‍त की थी। इसे बिहार म्‍यूजियम में सुरक्षित रखा गया था। विश्‍व बौद्ध समाज भिक्षु जुआन जैंग से भावनात्‍मक रूप से जुड़ा है। उनकी मांगों के अनुसार जुआन जैंग के अवशेष को पटना से नालंदा लाने की दिशा में कदम उठाये गये हैं।

राष्‍ट्रीय संग्रहालय में कलाकृतियों की 3-डी फोटोग्राफी
राष्‍ट्रीय संग्रहालय की 15,759 वस्‍तुओं का 2 डी फॉरमेट में डिजिटलीकरण हो चुका है। लेकिन इन वस्तुओं का आनलाइन एक विशेष अनुभव देने के लिए 3-डी डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इसे पुणे के डेकन कॉलेज के शोधकर्ताओं और फोटोग्राफरों की एक टीम के साथ राष्‍ट्रीय संग्रहालय कर रहा है। ये 3-डी छवियां लोगों को एक समृद्ध अनुभव कराएंगी। यह अपने आप प्रकार की देश में पहली योजना है।

देश का सांस्‍कृतिक मानचित्रण 
भारत के सांस्‍कृतिक मानचित्रण योजना के तहत देश भर के कलाकारों का डाटा एकत्रित करने की शुरुआत मई 2015 में की गई है। दो सालों के दौरान एक करोड़ कलाकारों का डाटा एकत्रित करके वेबपोर्टल culturemapping.nic.in पर डाल दिया गया है। यह किसी कलाकार के संग्रह (रिपाजिटोरी) के तौर पर काम करता है और विभिन्‍न सांस्‍कृतिक योजनाओं के आयोजन के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

पुरातत्व संस्थान के लिए नया भवन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरातत्व संस्थान के लिए नोएड़ा में नया भवन बन रहा है। इस भवन पंडित दीन दयाल उपाध्धाय की जन्मशती के वर्ष पर उन्हें समर्पित किया गया है। यह भवन 38,000 वर्ग मीटर में बन रहा है।

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