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मोदी सरकार की नई योजनाओं से होगा वृद्धों-वंचितों का उत्थान

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मोदी सरकार गरीबों की सरकार है। वृद्ध, वंचित, निर्धन और संपूर्ण रूप से उपेक्षित वर्ग इस सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं। समय-समय पर अनेक ऐसी योजनाएं इनके लिए बनाई जाती रही हैं; और निरंतर बनाई जा रही हैं, जिनसे इस वर्ग को सीधे, संपूर्ण विकास की धारा से जोड़ा जा सके। आइए डालते हैं उन योजनाओं पर एक नजर-

एनपीएस से जुड़ने की आयु 65 तक हुई

केंद्र सरकार ने अपने ताजा निर्णय में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़ने की आयु-सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है। अब पेंशन खाता से जुड़ना भी 65 वर्ष की आयु तक सुलभ हो गया है, जिसे 70 साल की आयु तक जारी रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त ऐसे खाताधारक, जो 60 वर्ष से अधिक की आयु में जाकर राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़ पा रहे हैं, उन्हें भी पेंशन कोष तथा निवेश के वही विकल्प उपलब्ध होंगे, जो इस योजना से 60 वर्ष की आयु से पहले जुड़ चुके लोगों को प्राप्त हैं।

60 वर्ष की आयु के बाद इस योजना से जुड़ने वाले लोगों के पास यह विकल्प भी होगा कि वे 3 साल की समय-सीमा पूरी होने के बाद सामान्य रूप में ही खाता बंद कर सकें। ऐसा करने पर उन्हें अपनी 40 प्रतिशत राशि की वार्षिक वृत्ति लेनी होगी और जो शेष राशि होगी, वह उन्हें मिल जाएगी। ऐसी स्थिति में, जिसमें यदि कोई 3 वर्ष की समयावधि पूरी होने से पहले ही खाता बंद करना चाहता है तो वह ऐसा भी कर सकता है। इसमें प्रावधान यह किया गया है कि उस व्यक्ति को अपनी 80 प्रतिशत राशि से वार्षिक वृत्ति खरीदनी होगी। बाकी जो राशि बचेगी, उसे वह प्राप्त कर सकता है। साथ ही यदि खाता-अवधि में ही उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो पूरी की पूरी राशि उस खाताधारक द्वारा नामित व्यक्ति को दे दी जाएगी। सरकार का यह कदम उस व्यक्ति के लिए गहरा संतोष जुटाता है, जो अपनी आयु के उस पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां अपने अब तक के परिश्रम का प्रतिफल ससम्मान पाना उस व्यक्ति का अधिकार होता है। निसंदेह देश के वरिष्ठ नागरिकों को इस कदम से बहुत लाभ पहुंचेगा।

प्रधानमंत्री व्यय वंदना योजना

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना की प्लानिंग में 60 वर्ष तक के आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए पेंशन योजना आरंभ की गई। प्रधानमंत्री व्यय पेंशन योजना नाम से जारी इस पेंशन प्लान को लाइफ इंश्योरेंस कार्पोरेशन द्वारा ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों ही रूपों में खरीदा जा सकता है। इसके अंतर्गत अगले 10 सालों तक 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर 60 हजार रुपये की राशि प्रतिवर्ष दी जाएगी, जो कि प्रतिमाह 5 हजार रुपये के रूप में होगी। इस सालाना पेंशन को प्राप्त करने के लिए 7,22,890 की राशि को एकमुश्त जमा कराना आवश्यक है। इसके अंतर्गत न्यूनतम राशि के तौर पर 12 हजार रुपये सालाना दिये जाएंगे, जो कि मासिक रूप में 1 हजार होंगे। यदि इस योजना की समय-सीमा तक पेंशनर जीवित है तो उसे इंस्टॉलमेंट पेमेंट नियमित रूप से प्राप्त होती रहेगी। पेंशन को मासिक, तिमाही, छमाही अथवा सालाना रूप से अपनी सुविधानुसार प्राप्त किया जा सकता है। 60 वर्ष तक के आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिक मई 2018 तक इसे खरीद सकते हैं। इस योजना को जीएसटी में छूट दी गई है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम

गरीबों के उत्थान के लिए उठाया दूसरा कदम यह है, जिसके अंतर्गत जल्दी ही खाद्य और ईंधन पर सब्सिटी खत्म कर दी जाएगी और इसके बदले प्रत्येक लाभार्थी परिवार के मुखिया के खाते में सीधे 2600 रुपये की राशि जमा करा दी जाएगी। यह बात इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फंड द्वारा कही गई है। गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह एक बड़ा ही महत्वाकांक्षी प्रयास है, जिसका सीधा-सीधा लाभ 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 50 प्रतिशत शहरी आबादी को मिलेगा। यह तथ्य गरीबों के सरकारी आंकड़ों के आधार पर उभरकर सामने आया है।

पिछली यूपीए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया था, जिसमें घोषणा तो प्रत्येक गरीब को अनाज उत्पन्न कराने की की गई थी, लेकिन अपने आरंभ से लेकर ही इस योजना की निष्पक्षता संदेह के घेरे में रही। लगातार भ्रष्टाचार का शिकार रही इस योजना को शुरू तो गरीबों के नाम पर किया गया था, मगर लाभ किसी और ही वर्ग को पहुंच रहा था और जरूरतमंद उपेक्षित वर्ग और अधिक उपेक्षित होता चला गया। सरकार अभी तक जन वितरण प्रणाली के अंतर्गत 6 करोड़ 52 लाख लोगों को सस्ती दर पर गेंहू और चावल उपलब्ध कराती रही है तथा एपीएल श्रेणी वाले 11.5 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिलता था। सब्सिटी खत्म कर दिए जाने के बाद 2600 रुपये की राशि इन परिवारों के खाते में सीधे पहुंच जाने से इस क्षेत्र के भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना

मोदी सरकार द्वारा अगस्त 2014 से इस योजना की शुरुआत की गई, जिसे सुखद रूप में इतना जन समर्थन मिला कि योजना आरंभ होने के पहले ही दिन डेढ़ करोड़ खाते खोले गए। इसके साथ ही सभी खाताधारकों को 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिला। अब तक इस योजना का लाभ लेते हुए 3.02 से भी अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 1500 करोड़ रुपये बैंकों में पहुंचे हैें। यह क्रम वर्तमान में भी जारी है। इसी के साथ Ru-pay कार्ड भी अस्तित्व में आया। जीरो बैलेंस वाले इन खातों द्वारा चयन का पूरा अधिकार सीधे खाताधारक को दिया गया है। जिस व्यक्ति के श्रम की लगातार अनदेखी हुई, उसका शोषण हुआ, यह योजना उसका सशक्त समाधान प्रस्तुत करती है।

खुले में शौचमुक्त और स्वस्थ भारत

देश की एक बड़ी आबादी गांवों में है। अनेक सरकारें आईं-गईं, मगर इस वर्ग का विकास एक अनसुलझा प्रश्न ही रहा। जहां गांव खुले में शौच के संकट को झेलने के लिए विवश थे, जो कि मानवीय गरिमा का भी खुला उपहास था। वहीं दूसरी ओर शहर अपनी ही गंदगी के बोझ से दबे हुए थे। उनका संपूर्ण विकास तो एक ऐसा नारा बन गया था, जिसे पूर्ववर्ती सरकारें केवल चुनाव के समय ही भुनाती थीं। मोदी सरकार ने इस समस्या के मूल को समझा कि एक स्वच्छ परिवेश से ही स्वच्छ मनो-मस्तिष्क निर्मित होता है। किसी भी वर्ग का बड़ा विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक कि उसकी छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान न ढूंढ़ा जा सके। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने स्वयं झाडू उठाकर, पूरे देश से इस अभियान में अपने साथ जुड़ने का आह्वान किया, जिसके परिणामस्वरूप विशिष्ठ से लेकर सामान्य वर्ग तक इस कार्य में जुट गया। लोगों में जागरुकता बढ़ी।

खुले में शौच की विवशता को समझते हुए घरों में शौचालय के निर्माण के लिए सरकारी तौर पर आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। अब तक लगभग 2.50 लाख गांव खुले में शौचमुक्त हो चुके हैं। 160 से अधिक जिले इस लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त कर चुके हैं। अगस्त 2017 तक यह अनुपात 67.30 प्रतिशत पहुंच चुका था, जिससे यह आशा विश्वास में बदल जाती है कि वर्ष 2019 तक ये योजनाएं अपने उद्देश्य को पूर्ण रूप से प्राप्त कर लेंगी।

सांसद आदर्श ग्राम योजना

इस योजना के आरंभ के द्वारा मोदी सरकार ने प्रत्येक सांसद को यह लक्ष्य दिया कि वह अपने क्षेत्र के तीन गांवों को विकास के उस स्तर पर पहुंचाएं, जहां वे आदर्श रूप ले सकें। उस क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का पूरा-पूरा उपयोग करते हुए उस क्षेत्र की मूल-भूत समस्याओं को दूर करें। बिजली, पानी, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक से गांवों का संपूर्ण इस योजना का उद्देश्य है। सरकार द्वारा इस वर्ग के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं समय-समय पर बनती रही हैं, परंतु यह अत्यंत दुखद है कि लोग इन के विषय में जानते तक नहीं हैं। अब यह उस सांसद का दायित्व बनता है कि वह लोगों को इस विषय में न केवल जागरूक करे, बल्कि उसका लाभ पाने में सहायता करे। वर्ष 2019 तक संपूर्ण लक्ष्य प्राप्ति के संकल्प के साथ इस योजना को मूर्त रूप दिए जाने हेतु निर्देश दिए गए हैं।

 

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