Home नरेंद्र मोदी विशेष पीएम मोदी के ‘सौभाग्य’ से करीब दो करोड़ घरों में उजाला

पीएम मोदी के ‘सौभाग्य’ से करीब दो करोड़ घरों में उजाला

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जगमग करते शहरों और चमचमाती बिल्डिंगों में रहने वाले लोग देश के हजारों गांव में रह रहे उन लोगों का दर्द महसूस कर ही नहीं सके, जिन घरों में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बेहद साधारण परिवार से प्रधानमंत्री पद तक के सफर में आम आदमी, गांव और गरीबों का दर्द बेहद करीब से देखा है। इसलिये उनकी हर योजना, हर कार्यक्रम के केंद्र में गांव-गरीब-आम आदमी ही होता है। बिजली से वंचित गांवों-टोलों-मोहल्लों और लोगों तक बल्ब की रोशनी पहुंचाने की योजना ‘सौभाग्य योजना’ भी एक ऐसी ही योजना है, जो उन घरों में सौभाग्य लेकर आई है, जहां आजादी के 70 साल बाद भी अंधेरे ने कब्जा कर रखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में सौभाग्य योजना के तहत 1 करोड़ 91 लाख 49 हजार 104 यानी करीब दो करोड़ घर बिजली पहुंच चुकी है। पीएम मोदी का सपना है कि देश का एक भी घर ऐसा नहीं छूटना चाहिए जहां बिजली का तार न पहुंचा हो।

सौभाग्य योजना का उद्देश्य ?
‘सौभाग्य’ का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चत करते हुए सभी घरों में बिजली पहुंचाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी शेष गैर विद्युतिकृत घरों में बिजली कनेक्शन सुलभ कराना है, ताकि देश में सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और घरों में बिजली कनेक्शन मुहैया कराने में क्या-क्या शामिल हैं?
घरों में बिजली कनेक्शन देने के कार्य में संबंधित घर से निकटतम विद्युत खंबे से सर्विस केबल घर तक लाना, बिजली मीटर लगाना, एलईडी बल्ब और एक मोबाईल चार्जिंग प्वाइंट के साथ एकल विद्युत प्वाइंट के लिए तार डालना शामिल है। यदि सर्विस केबल लाने के लिए संबंधित घर के निकट विद्युत खंबा उपलब्ध नहीं है तो कंडक्टर एवं संबंधित उपकरणों के साथ अतिरिक्त खंबा लगाया जाना भी इस योजना में शामिल है।

हर गैर विद्युतीकृत घर को बिल्कुल मुफ्त बिजली कनेक्शन
‘सौभाग्य योजना’ में गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इस योजना के तहत सिर्फ 500 रुपये के न्यूनतम भुगतान पर अन्य घरों को भी विद्युत कनेक्शन मुहैया कराया जा रहा है। ये राशि भी बिजली बिलों के साथ 10 किस्तों में डिस्कॉम/विद्युत विभागों में जमा कराई जा सकती है।

बिजली की खपत के हिसाब से बिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि हिंदुस्तान के मेहनतकश और स्वाभिमानी लोग हर उपभोग की कीमत चुकाने में यकीन करते हैं। इसलिए ‘सौभाग्य योजना’ का फायदा ले रहे लोगों से बिजली कनेक्शन का तो भुगतान नहीं लिया जाता लेकिन उपभोग की गई बिजली का स्थानीय डिस्कॉम/ विद्युत विभाग के तय की गई दरों के मुताबिक चार्ज लिया जाता है।

भारत सरकार के पूर्ववर्ती कार्यक्रम ‘सभी के लिए 24×7 बिजली’ का भी समान उद्देश्य है। अतः यह इस कार्यक्रम से किस तरह भिन्न है?
‘सभी के लिए 24×7 बिजली’ राज्यों के साथ एक संयुक्त पहल है जिसमें विशिष्ट राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के रोडमैप एवं कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए विद्युत क्षेत्र के सभी सेगमेंटों अर्थात विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, उर्जा दक्षता, डिस्कॉम की माली हालत इत्यादि को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर सभी को 24 घंटे बिजली सुलभ कराई जा सके। सभी के लिए बिजली से संबंधित दस्तावेजों में विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यू चेन के लिए आवश्यक विभिन्न कदमों का विवरण शामिल है।

सभी घरों को कनेक्टिविटी मुहैया कराना 24×7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। ‘सौभाग्य’ बिजली मुहैया कराने के मसले का समाधान करने की दिशा में एक आवश्यक संरचनात्मक सहायता है।

वितरण क्षेत्र में दो प्रमुख योजनांए यथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए DDUGJY और शहरी क्षेत्रों के लिए IPDS पर पहले से ही अमल किया जा रहा है, अतः एक नई योजना की आवश्यकता क्यों हुई?
दीन दयाल उपाध्यायाय ग्राम ज्योति योजना ( डीडीयूजीजेवाई) के तहत गांवों/ घरों में बुनियादी विद्युत ढांचे का सृजन, मौजूदा बुनियादी ढांचे को मज़बूत एवं विस्तार करना, मौजूदा फीडरों/ वितरण ट्रांसफॉर्मरों/उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाना शामिल है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनियता बेहतर की जा सके। इसके अलावा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के साथ-साथ केवल उन बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन मुहैया कराए जाते हैं, जिसकी पहचान राज्यों द्वारा अपनी सूची के मुताबिक की जाती है। हालांकि ऐसे कई गांव हैं जहां काफी पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है लेकिन कई कारणों से अनेक घरों में बिजली कनेक्शन अब तक सुलभ नहीं हो पाए हैं। कई ऐसे गरीब परिवार है जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, लेकिन ये परिवार आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है। औपचारिक शिक्षा से वंचित कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि विद्युत कनेक्शन कैसे लिया जाता है? दूसरे शब्दों में, ऐसे लोगों को बिजली कनेक्शन लेने के मार्ग में बाधाएं आती है। कई जगहों पर आस-पास बिजली के खंबे नहीं है। विद्युत कनेक्शन लेने के लिए संबंधित घरों से अतिरिक्त खंबे एवं कंडक्टर लगाने का प्रभार लिया जाता है।

इसी तरह शहरी क्षेत्रों में एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत बिजली सुविधा मुहैया कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाता है, लेकिन कुछ परिवारों को मुख्यतः उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं क्योंकि वे आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है।

इन सभी कमियों को दूर करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी गैर विद्युतिकृत परिवारों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने से संबंधित प्रवेश बाधा दूर करने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मुहैया कराने के मुद्दे को सुलझाने के लिए ही ‘सौभाग्य योजना’ का शुभारंभ किया गया है।

क्या ‘सौभाग्य’ योजना की लागत DDUGJY के तहत उपलब्ध बजट से अलग है?
हां, सौभाग्य योजना पर आने वाली 16,320 करोड़ रूपये की लागत डीडीयुजीजेवाई के तहत किए जा रहे निवेश के अलावा है।

राज्यों को धनराशि के आवंटन का पैमाना क्या है?
योजना के तहत परियोजनाओं को मंजूरी राज्यों द्वारा पेश की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्टों (डीपीआर) के आधार पर दी जाएगी। इस योजना के तहत धनराशि का कुछ भी अग्रिम आवंटन नहीं किया जाता है।

योजना को पूरे देश में कैसे लागू किया जा रहा है?
परियोजना से संबंधित प्रस्ताव राज्यों की डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे हैं और और भारत सरकार के सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय निगरानी समीति द्वारा स्वीकृत किए जा रहे हैं । मंजूर परियोजनाओं के तहत विद्युतीकरण कार्य संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा पूरे किए जा रहे हैं । ये कार्य टर्नकी ठेकेदारों अथवा विभाग अथवा उन उपयुक्त एजेंसियों के जरिए पूरे किए जा रहे हैं जो मानकों के मुताबिक इस कार्य को पूरा करने में समर्थ है।

समयबद्ध ढंग से लक्ष्य प्राप्ति के लिए रणनीति

घरों को बिजली कनेक्शन तेजी से मुहैया कराने के लिए गांवों/ग्रामीण कलस्टरों में लाभार्थियों की पहचान के लिए शिविर लगाए गए हैं। इसके तहत मोबाइल ऐप/ वेब पोर्टल के साथ अत्याधुनिक सूचना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिजली कनेक्शन से संबंधित आवेदनों को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से भी पंजीकृत किया जा रहा है और आवेदक की फोटो, पहचान कार्ड की प्रति और/अथवा विभिन्न विवरण जैसे की मोबाइल नंबर/आधार नंबर/बैंक खाता संख्या इत्यादि सहित समस्त दस्तावेजीकरण कार्य संबंधित शिविरों में ही मौके पर पूरे किए जा रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द कनेक्शन दिए जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/सार्वजनिक संस्थानों को भी आवेदन पत्र इकट्ठा करने एवं प्रलेखन कार्य पूरा करने के साथ-साथ बिजली बिलों के वितरण, राजस्व संग्रह और अन्य मान्य गतिविधियों के लिए भी अधिकृत किया गया है।

विद्युत नेटवर्क में 4 करोड़ घरों को शामिल करने पर बिजली की मांग में अनुमानित वृद्धि कितनी होगी?
प्रतिघर 1 किलोवाट के औसत लोड और प्रतिदिन 8 घंटे तक लोड के औसत उपयोग को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष लगभग 28000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली और लगभग 80000 मिलियन यूनिट अतिरिक्त उर्जा की आवश्यकता है। यह आंकड़ा बदल सकता है। आय के साथ-साथ बिजली उपयोग की आदत बढ़ने पर बिजली की मांग में परिवर्तन होना तय है। इन अनुमानों के परिवर्तित होने पर भी इस आंकड़े में तब्दीली जरूर आएगी।

उन घरों के लिए क्या प्रावधान है जहां ग्रिड लाइन उपलब्ध कराना संभव नहीं है?
सुदुर एवं दूर-दराज के इलाको में अवस्थित घरों को 200 से लेकर 300 वाट के सोलर पावर पैक और 5 एलईडी लाइट, 1 डीसी पंखा, 1 डीसी पावर प्लग के साथ बैटरी बैकिंग सुलभ कराई जा रही है। इसके साथ ही 5 वर्षों के लिए मरम्मत एवं रखरखाव सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है।

सौभाग्य योजना’ के तहत कितने गैर विद्युतीकृत घरों को कवर किया जाएगा?
देश में लगभग 4 करोड़ गैर विद्युतिकृत घर होने का अनुमान है, जिनमें से लगभग 1 करोड़ बीपीएल ग्रामीण परिवारों को डीडीयुजीजेवाई की मंजूर परियोजनाओं के तहत पहले भी कवर किया जा चुका है। अतः कुल तीन करोड़ घरों को इस योजना के तहत कवर किए जाने की आशा है जिनमें से 2.50 करोड़ घर ग्रामीण क्षेत्रों में और 50 लाख घर शहरी क्षेत्रों में है।

क्या इस योजना में अवैध उपभोक्ताओं को माफ करते हुए इसमें उन्हें पंजीकृत कराने की सुविधा दी जाएगी? क्या स्कीम में कुछ इस तरह का भी लक्षित किया गया है?
अवैध कनेक्शनों की समस्या से संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग अपने-अपने नियमों/नियमनों के अनुसार निपट ही रहा है। हालांकि इस योजना में स्पष्ट शब्दों में यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे डिफॉल्टरों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा जिनके कनेक्शन काटे जा चुके हैं।

यह योजना लोगों के लिए उनके दैनिक जीवन मे किस तरह उपयोगी साबित होगी?
बिजली सुविधा मुहैया कराई जाने से निश्चित तौर पर लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मानव विकास पर हर पहलू से सकारात्मक असर पड़ रहा है। पहला, बिजली सुलभ होने से घर को रोशन करने के लिए केरोसिन का विकल्प मिल रहा है  और घर के अंदर केरोसिन से होने वाला प्रदूषण खत्म हो रहा है और इस तरह से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी मुक्ति मिल रही है। इसके अतिरिक्त बिजली मिलने से देश के सभी हिस्सों में दक्ष एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में मदद मिलने का अनुमान है। सूर्यास्त के बाद घरों के रोशन होने से वहां रहने वाले लोगों विशेषकर महिलाओं को सुरक्षा का अहसास हो रहा है। इसी तरह बिजली मिलने से सूर्यास्त के बाद सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही है। बिजली सुलभ होने से सभी क्षेत्रों में शिक्षा सेवाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है। सूर्यास्त के बाद घरों में बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों के लिए अपनी पढ़ाई पर और ज़्यादा समय दे पाना और करियर में ज़्यादा आगे बढ़ पाना संभव हो रहा है। घरों के रोशन होने से इस बात की भी संभावना बढ़ गई है कि महिलांए पहले के मुकाबले पढ़ाई और रोजगार पर ज्यादा फोकस कर सकें।

आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा

घरों को रोशन करने के लिए केरोसिन के बजाए बिजली का उपयोग होने पर केरोसिन पर वार्षिक सब्सिडी घट रही है। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों का आयात घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हर घर में बिजली सुलभ होने से संचार के सभी साधनों यथा रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि का कहीं अधिक उपयोग संभव हो पा रहा है जिससे लोगों को इनके जरिए सभी तरह की आवश्यक सूचनाएं मिल रही है। इसके अलावा किसानों को नई एवं बेहतर कृषि तकनीकों, कृषि मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण बीजों इत्यादि के बारे में जानकारी मिल रही है जिससे कृषि उत्पादन के साथ-साथ उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव हो गई है। इसके अतिरिक्त किसान एवं युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही है।

विश्वसनीय विद्युत सेवाएं उपलब्ध होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं वाली नई दुकानें, विनिर्माण कार्यशालाएं, आटा मिलें, कुटीर उद्योग इत्यादि खोलने मे भी आसानी हो रही है। इस तरह की आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हो रहे हैं। साथ ही इस योजना के क्रियान्वयन से भी रोजगार सृजित हुए हैं क्योंकि घरों में विद्युतीकरण कार्य के लिए अर्द्धकुशल/कुशल कामगारों की आवश्यकता पड़ती है। इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान लगभग 1,000 लाख दैनिक श्रम दिवस सृजित हो रहे हैं। 16,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि व्यय होने से कुछ सकारात्मक बाह्य असर पड़ेंगे जिससे और अधिक रोजगार सृजन में मदद मिलने और उससे अर्थिक विकास की गति बढ़ने का अनुमान है।

सौभाग्य योजना’ के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने की पहल
भारत सरकार रेडियो, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, साइन बोर्डों इत्यादि के जरिए प्रचार-प्रसार अभियान चला रही है। विभिन्न शोध अध्ययनों से पता चला है कि बिजली कनेक्शन की लागत, बिजली के उपयोग, केरोसिन के मुकाबले बिजली उपयोग की लागत, बिजली उपयोग के फायदों (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) इत्यादि सहित बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता न होने के कारण भी घरेलू विद्युतिकरण की प्रक्रिया धीमी है। अतः इस योजना के सभी पहलुओं से लोगों को अवगत कराने के लिए मल्टीमीडिया अभियान चल रहा है। डिस्कॉम के अधिकारी बिजली के साथ-साथ ‘सौभाग्य’ के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिविर लगा रहे हैं। विद्यालय के शिक्षकों, ग्राम पंचायत के सदस्यों और स्थानीय साक्षर/शिक्षित युवाओं को भी इस जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है।

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