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अपनी ‘Property of Corruption’ पर कब जवाब देंगे कांग्रेस अध्यक्ष, घोटालों से भरा है परिवार का इतिहास

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अब इस बात पर से पूरी तरह से पर्दा उठ चुका है कि चुनावी मौसम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी क्यों निराधार और तथ्यहीन तरीकों से राफेल सौदे के मुद्दे को उठाने में जुटे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कांग्रेस अध्यक्ष अपने परिवार से जुड़े घोटालों को चुनावों के दौरान उभरने नहीं देना चाहते। खासकर के नेशनल हेराल्ड जैसे घोटालों को जिनमें आरोपियों के सरगना वो खुद और उनकी मां सोनिया हैं। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष से इस घोटाले पर जवाब मांगा है।

राहुल, सोनिया ‘Property of Corruption’ के मालिक!
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने शनिवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग को Property of Corruption बताया। उन्होंने कहा, ‘’ गांधी परिवार ने मध्य प्रदेश को लूटा। दशकों तक इस परिवार ने देश को लूटने का काम किया है। मेरे पीछे नेशनल हेराल्ड की इमारत है जो कि भ्रष्टाचार का एक स्मारक है। हमारे पास गांधी परिवार की सच्चाई लाने के पर्याप्त सबूत हैं। मध्य प्रदेश के लोगों को गांधी परिवार का असली चेहरा देखना चाहिए।‘’ अपने स्वार्थ को साधने के लिए सत्ता का कैसे दुरुपयोग हो सकता है, ये कांग्रेस सरकारों की करतूतों से सामने आता रहा है। अर्जुन सिंह और मोतीलाल वोरा ने सीएम रहते हुए नेशनल हेराल्ड के नाम पर जमीन ली और वहां मॉल बना दिया। अब इसका मोटा मुनाफा सोनिया-राहुल खा रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष से भ्रष्टाचार की इस इमारत को लेकर जवाब मांगा है। 

मां आरोपी नं.1, बेटा आरोपी नं.2  
दरअसल नेशनल हेराल्ड से जुड़े घोटाले में मां और बेटे की जोड़ी आरोपी नंबर एक और आरोपी नंबर दो है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ही मामले में 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर बाहर हैं। जाहिर है दोनों जेल से कुछ ही कदम दूर हैं। राहुल और सोनिया समेत भ्रष्टाचार के इस मामले में लिप्त रहने के आरोपी कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियमितताएं बरतने के गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि इन लोगों ने यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए सिर्फ 50 लाख रुपये की रकम देकर एसोसिएट जर्नल से 90 करोड़ रुपये से अधिक का अधिकार हासिल कर लिया।

मां-बेटे को लग रहा झटके पर झटका
गौर करने वाली बात है कि पिछले महीने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी को दिल्ली हाईकोर्ट से तब बड़ा झटका लगा जब अदालत ने उनकी एक याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में नेशनल हेराल्ड के स्वामित्व वाली कंपनी यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के 2011-12 इनकम टैक्स के दोबारा मूल्यांकन की मांग की गई थी। इसी वर्ष मार्च के महीने में आयकर विभाग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और ऑस्कर फर्नांडीस को नोटिस जारी किया था, जिसे इन लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं को नोटिस पर कोई आपत्ति है तो उन्हें आयकर विभाग के समक्ष अपनी बात कहनी चाहिए। आयकर विभाग की ओर से यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जारी किए गए नोटिस में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी को  संपत्ति सौदे के सौदे में असली लाभार्थी बताया गया है। 

क्या है नेशनल हेराल्ड स्कैंडल ?
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और AJL को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया। इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं। गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा।  

जाहिर है कि देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार ने 60 सालों तक देश को जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत हुए घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म ही नहीं होती।नेशनल हेराल्ड घोटाला के अलावा अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं, जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। डालते हैं नेहरू-गांधी परिवार के घोटालों पर एक नजर-

गांधी परिवार के लिए चित्र परिणामअगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1,437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के कुछ अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिए थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उन पर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं। इस मामले में हाल ही में हरियाणा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत में घोटाले के पहले ऐसे आरोपी के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुकसान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू खामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

एक नजर कांग्रेस की सरकारों में हुए कुछ प्रमुख घोटालों पर-

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008)
भारत में सबसे बड़ा घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला था, जिसमें दूरसंचार मंत्री ए राजा पर निजी दूरसंचार कंपनियों को 2008 में बहुत सस्ते दरों पर 2 जी लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया था। नियमों का पालन नहीं किया गया था, लाइसेंस जारी करते समय केवल पक्षपात किया गया था। इसमें 1.96 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। दरअसल सरकार ने 2001 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए प्रवेश शुल्क रखा था। इसमें दूरसंचार के बारे अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया था। भारत में 2001 में मोबाइल उपभोक्ता 4 मिलियन थे जो 2008 में बढ़ोतरी करके 350 मिलियन तक पहुंच गए।

सत्यम घोटाला (2009)
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुए। यह घोटाला कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46% हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (2010)
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और संचालन के लिए लिया गया धन भारी मात्रा में घोटाले में चला गया। इसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। इस घोटाले में कई भारतीय राजनेता नौकरशाह और कंपनियों के बड़े लोग शामिल थे। इस घोटाले के प्रमुख आरोपी कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी थे। उस समय, कलमाड़ी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। इसमें शामिल अन्य बड़े लोगों में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री- शीला दीक्षित और रॉबर्ट वाड्रा हैं। इसका गैर-अस्तित्व वाली पार्टियों के लिए भुगतान किया गया, उपकरण की खरीद करते समय कीमतों में तेजी आई और निष्पादन में देरी हुई थी।

कोयला घोटाला (2012)
कोयला घोटाले के कारण भारत सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। सीएजी ने एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि 194 कोयला ब्लॉकों की नीलामी में अनियमितताएं शामिल हैं। सरकार ने 2004 और 2011 के बीच कोयला खदानों की नीलमी नहीं करने का फैसला किया था। कोयला ब्लॉक अलग-अलग पार्टियों और निजी कंपनियों को बेच दिये गए थे। इस निर्णय से राजस्व में भारी नुकसान हुआ था।

आदर्श घोटाला (2012)
मुंबई के कोलाबा में बनी आदर्श सोसायटी घोटाला में कांग्रेस के कई मुख्यमंत्री संगीन आरोपों के साये में रहे हैं। इस सोसायटी का निर्माण सैनिकों की विधवाओं और भारत के रक्षा मंत्रालय के कर्मियों के नाम पर किया गया था। लेकिन आरोप है कि इसमें फ्लैटों के निर्माण से लेकर आवंटन तक में कई अनियमितताएं बरती गईं। महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। गौर करने वाली बात है कि यह जमीन रक्षा विभाग की थी और सोसायटी के लिए दी गई थी।

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