Home विचार ‘परफार्म इंडिया’ खोल रहा है ‘चौकीदार चोर है’ कहने वालों की पोल

‘परफार्म इंडिया’ खोल रहा है ‘चौकीदार चोर है’ कहने वालों की पोल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ईमानदार हैं, देश के विकास के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उनकी यह छवि देश के 125 करोड़ जनता के मन में बसी हुई है, इस छवि को तोड़ने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल झूठी खबरें फैलाने का पैंतरा आजमा रहे हैं। 

12 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर और साढ़े चार साल से प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी हमेशा बेदाग रहे हैं। उन पर या उनकी सरकार पर भी कभी भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा। लेकिन कांग्रेस की डूबती नाव को बचाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश हित में किए गये राफेल सौदे पर सवाल उठाए और कहा कि ‘चौकीदार चोर है’। झूठ के इस कहकरे को सभी विपक्षी दल दोहराने में अपने लिए संजीवनी देखने लगे।

परफार्म इंडिया, आपको बताता है कि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेताओं की तिजोरियों में कितना धन पड़ा है-

सोनिया-राहुल-वाड्रा के पास 5 बिलियन डालर से अधिक की संपत्ति कहां से आई?

आजादी के बाद देश को अपनी व्यक्तिगत संपत्ति समझने वाले गांधी परिवार ने किसानों की जमीन खरीदने-बेचने से लेकर रक्षा सौदे में दलाली से अकूत संपदा अर्जित की है। गांधी खानदान के मौजूदा दोनों नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट से जमानत पर हैं। इन दोनों ने अपनी सरकारों के जरिए देश के विभिन्न शहरों में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के नाम पर कई एकड़ जमीन आवंटित करा ली। इसकी प्रॉपर्टी की कीमत करीब 5 हजार करोड़ है। दोनों मां-बेटे ने एक कंपनी बनाकर नेशनल हेराल्ड की सारी जमीन को अपने नाम करवा ली। जब कोर्ट में मामला खुला तो दोनों को जमानत लेना पड़ा। Celebrity Net Worth के अनुसार कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के पास लगभग 2 बिलियन डालर की संपदा है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास भी 100 मीलियन डालर की संपदा है।

स्विस मैगजीन Schweizer Illustriertein  ने  नवंबर 1991 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा कि राजीव गांधी का स्विस बैंक में खाता है जिसमें 13,200 करोड़ रुपये जमा है। इस रिपोर्ट को गांधी परिवार ने आज तक कभी न तो नकारा है न ही इस पत्रिका के खिलाफ झूठी रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए कोई केस ही किया है-अब बात करते हैं गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की। प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा महज 10वीं पास है, लेकिन उनकी संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। 2004-14 के यूपीए शासनकाल में उनकी संपत्ति सबसे ज्यादा बढ़ी। उनकी या उनकी कंपनी की देशभर में घोषित या बेनामी प्रॉपर्टी है। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक उन्होंने एक लाख रुपये के निवेश से 5 साल में 325 करोड़ रुपये बना लिए। यूपीए सरकार के दौरान हुए रक्षा सौदे समेत हर घोटाले में वाड्रा की भूमिका संदिग्ध रही हैं। वो 12 कंपनियों में डायरेक्टर, एडिशनल डायरेक्टर या मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। Celebrity Net Worth के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा ने सारी संपत्ति प्रियंका गांधी से शादी करने के बाद अर्जित की है। रॉबर्ट वाड्रा के पास 2.1 बिलियन डालर की संपदा होने का अनुमान है।

मायावती के पास दो हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति कहां से आयी?

दिल्ली के इंन्द्रपुरी के झुग्गी झोपड़ी की कालोनी में रहने वाली मायावती का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता। इनके पिता प्रभुदास पोस्ट आफिस में क्लर्क थे। ऐसे परिवार की बेटी के पास हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति हैं। 2007 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते समय इनके पास कुल 52 करोड़ रुपये की संपत्ति थी जो पांच साल में 2012 तक बढ़कर 111 करोड़ रुपये हो गयी। रिपोर्टस के अनुसार 2012 में मायावती के बैंक के खातों में 13 करोड़ 73 लाख रुपये औऱ हाथों में दस लाख 20 हजार रुपये नगद थे। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये के सोने और हीरों के गहने थे। यही नहीं मायावती के पास दिल्ली के कनाट प्लेस में 20 करोड़ रुपये के दो व्यवसायिक भवन भी हैं। इनके पास दिल्ली में 62 करोड़ रुपये का और लखनऊ में 20 करोड़ रुपये मूल्य का अपना मकान हैं। माना जाता है कि मायावती की संपत्ति की बाजार में कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये है।

मायावती ने अपने लिए ही नहीं, अपने परिवार के लिए भी खुब संपत्ति बटोरी है। मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान इनके भाई आनंद कुमार ने भी खूब पैसे कमाये। 2007 में जहां आनंद कुमार के पास कुल संपत्ति महज 7.5 करोड़ रुपये थी वह 2014 में बढ़कर 1,316 करोड़ रुपये हो गई। 

मुलायम के कुनबे की हजारों करोड़ की संपत्ति का कोई हिसाब किताब नहीं 

मुलायम सिंह पर आय से ज्यादा संपत्ति का केस चल रहा है। यह आरोप है कि मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपने और अपने परिवार के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। 1977 में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में पहली बार मंत्री बने थे, तब उनकी आय 77 हजार रुपये थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम ने अपनी सम्पत्ति 15 करोड़ 96 लाख 71 हजार 544 दर्ज कराई थी। उनकी बहू ने 8 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी औऱ बेटे अखिलेश ने 16 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्यौरा दिया था। इनके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी सैकड़ों करोड़ की संपत्ति है जिसका बाजार मूल्य घोषित मूल्य से सैकड़ों गुना ज्यादा है। मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव 5 करोड़ की Lamborghini कार में चलते हैं। चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार के पास कहां से आयी अकूत दौलत

देश में सबसे अमीर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं। उनकी घोषित संपत्ति 177 करोड़ रुपए है। लेकिन ये 177 करोड़ रुपये तो सिर्फ दिखाने के लिए हाथी के दांत हैं। चंद्रबाबू नायडू का 3 साल का पोता देवांश अपने दादा से 6 गुना अधिक संपत्ति वाला है। चंद्रबाबू की पत्नी भुवनेश्वरी उनकी परिवार में सबसे अमीर हैं। यह समझना किसी के लिए भी कठिन नहीं है कि यह सारा धन चंद्रबाबू ने कैसे जमा किया है।

‘गरीबों की मसीहा’ ममता बनर्जी के पास कहां से आये हजारों करोड़ रुपये

दिखावे के लिए ममता बनर्जी हवाई चप्पल पहनती है। उनके पास अपना घर नहीं हैं लेकिन कभी उनके सबसे खासमखास रहे मुकुल रॉय का दावा है कि ममता की संपत्ति की कीमत 1200 करोड़ रुपये है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गी ने उनके सांसद भतीजे अभिषेक पर 100 करोड़ रुपये में बंगला खरीदने का आरोप लगाया है। इसके अलावा चिटफंड कंपनियों के जरिए गरीबों को लूटने वाले सारदा घोटाले के आरोपी भी उनके नजदीकी है। इनमें से कई जेल जा चुके हैं।

सामाजिक न्याय के मसीहा लालू यादव की काली सच्चाई

सामाजिक न्याय के इस कथित मसीहा को भ्रष्टाचार के मामलों में सजा हो चुकी है। तबीयत खराब होने के बाद रांची में अस्पताल करा रहे हैं। कोर्ट ने चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा रखी है। कभी उनके साथी रहे रामविलास पासवान का कहना है कि लालू यादव ने धन के लालच में अपना पूरा कुनबा डुबा दिया। लालू के बेटे तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा भारती भी आय से अधिक संपत्ति के आरोपी हैं। हाल ही में ईडी ने पटना में करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मॉल और मीसा का दिल्ली का फार्म हाउस जब्त कर लिया है। लालू परिवार के दिल्ली-पटना समेत कई शहरों में संपत्ति है। इनकी बाजार कीमतें घोषित कीमतों से कई सौ गुना ज्यादा है। 

अब देेखिए प्रधानमंत्री मोदी के भाईयों की आर्थिक स्थिति

सोमाभाई मोदीः स्वास्थ्य विभाग से रिटायर, अब स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं।

अमृतभाई मोदीः लेथ मशीन ऑपरेटर

प्रहलादभाई मोदीः अहमदाबाद में किराने की दुकान

पंकजभाई मोदीः सूचना विभाग, गाँधीनगर हेडक्वार्टर में क्लर्क

इसके अलावा नरेन्द्र मोदी के ज्यादातर रिश्तेदार जीने के लिए छोटे मोटे धंधे जैसे पतंग बेचना, कबाड़ खरीदने जैसा काम कर रहे हैं। इन लोगो का जीवन और संघर्ष वैसा ही है, जबकि मोदी 12 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री और साढ़े 4 साल से प्रधानमंत्री हैं। लेकिन मोदी ने कभी परिवारवालों को गलत तरीके से फायदा नहीं पहुंचाया। इसीलिये विपक्ष चिढ़ा हुआ है।

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