Home नरेंद्र मोदी विशेष लालकिले के प्राचीर से पीएम ने रचा नया इतिहास

लालकिले के प्राचीर से पीएम ने रचा नया इतिहास

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले में 15 अगस्त से इतर झंडा फहराकर देश के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इससे पहले स्वतंत्रता के 71 साल के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के अलावा लाल किले के प्राचीर में कभी भी झंडा नहीं फहराया था। पीएम ने ये झंडारोहण स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में किया। नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिन्द सरकार का गठन कर तत्कालीन ब्रितानी हुकूमत को खुलेआम चुनौती दी थी। पिछले 70 सालों तक भारतीय इतिहास के इस स्वर्णिम अध्याय को नजरअंदाज किया जाता रहा लेकिन पीएम मोदी ने आजाद हिन्द सरकार की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से तिरंगा फहराकर देश के सच्चे सपूत और महानायक नेताजी को अभूतपूर्व श्रद्धांजलि दी है।

एक परिवार को बड़ा साबित करने का गुनाह हुआ
तिरंगा फहराने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि 21 अक्टूबर की तारीख भारत के लिए ऐतिहासिक है। इसी दिन नेताजी ने आजादी की नींव रखी थी। पीएम ने कहा कि इस देश में एक परिवार को बड़ा साबित करने के लिए भारत मां के कई सपूतों को भुलाया गया।
तब की फिरंगी हुकूमत के खिलाफ दुनिया के कई देशों को एकजुट करने वाले सुभाष चंद्र बोस के योगदान को याद करते हुए पीएम ने कहा कि “ये दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए देश के अनेक सपूतों, फिर वो चाहे सरदार पटेल हों, बाबा साहेब अंबेडकर हों, या फिर नेताजी, राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान को भुलाने की कोशिश की गई।”

नेताजी के सपने को पूरा न कर पाना दुखद
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि “नेताजी ने एक ऐसे भारत का वादा किया था जिसमें हर किसी के पास समान अधिकार और समान मौके थे। उन्होंने एक ऐसे देश का वादा किया था जो हर क्षेत्र में अपनी परंपराओं और विकास पर गौरवान्वित हो। बोस ने ‘फूड डालो शासन करो’ की नीति को जड़ से उखाड़ फेंकने का वादा किया था। ये दुखद है कि इतने सालों बाद भी उनके सपने को हम पूरा नहीं कर सके हैं। हमें कई लोगों की कुर्बानी के बाद स्वराज मिला है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस स्वराज को सुराज के जरिए बनाए रखें।”

नेताजी, पटेल, अंबेडकर का मार्गदर्शन मिला होता तो हालात कुछ और होते
पीएम ने कहा कि ये उनके लिए सौभाग्य की बात है कि देश के लिए सुभाष बाबू ने जो किया, उसे देश के सामने रखने का, उनके बताये कदमों पर चलने का मौका उन्हें मिल रहा हैं। स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अमर बलिदानी नेताजी की कुर्बानी को विस्मृत कर देने की पूर्व की सरकारों की कारगुजारी पर अफसोस जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “आज मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि स्वतंत्र भारत के बाद के दशकों में अगर देश को सुभाष बाबू, सरदार पटेल, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जैसे व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन मिला होता, भारत को देखने के लिए वो विदेशी चश्मा नहीं होता, तो आज हालात अलग होते।”

अब देश नेताजी के दिखाए रास्त पर चल रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुभाष बाबू ने कैम्ब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए लिखा था “हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है, इसलिए हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है। मुझे खुशी है कि देश अब नेताजी के दिखाये रास्ते पर चल रहा है। भारत का संतुलित विकास, प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण का मौका, राष्ट्र की प्रगति में उनकी भूमिका, नेताजी के वृहद विजन का हिस्सा थी।”

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