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पद, प्रतिष्ठा, पैसा से ज्यादा दूसरों की सेवा में निहित है संतोष

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पद, प्रतिष्ठा, वैभव सब मिल जाए लेकिन आत्म संतोष न मिले तो अधूरापन लगता है। Self4society के मंच से देश भर के आईटी प्रोफेशनल्स से संवाद स्थापित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “कोई भी इंसान अपने करिअर में कितना भी आगे चला जाए, वैभव कितना ही प्राप्त कर ले, पद प्रतिष्ठा कितना ही प्राप्त कर ले, एक प्रकार से जीवन में जो सपने देखे हों, सारे सपने अपनी आंखों के सामने उसने अपने स्व प्रयत्न से साकार किए हों, उसके बावजूद भी उसके मन में संतोष के लिए ये तड़पन रहती है, भीतर संतोष कैसे मिले और हमने अनुभव किया है कि सब प्राप्ति के बाद वो किसी और के लिए कुछ करता है, जीने का प्रयास करता है, उस समय उसका सटिफैक्शन लेवल बहुत बढ़ जाता है।“
‘मैं नहीं हम’ थीम के साथ आईटी पेशेवरों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम रामायाण में सुन रहे हैं कि एक गिलहरी भी रामसेतु के निर्माण में राम के साथ जुड़ गई थी। एक गिलहरी ने तो प्रेरणा पाकर उस पवित्र काम में जुड़ना अच्छा माना, लेकिन दूसरा भी एक दृष्टिकोण हो सकता है कि रामजी को भी अगर सफल होना है, ईश्वर भले ही हो उसको भी गिलहरी की जरूरत पड़ती है। जब गिलहरी जुड़ जाती है तो सफलता प्राप्त हो जाती है।“
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में हम कितनी ही पहल करें, कितनी ही योजनाएं बनाएं, बजट दें लेकिन किसी भी पहल की सफलता लोगों की भागीदारी में निहित है.’’ पीएम मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया भी अब हिन्दुस्तान को इंतजार करते हुए नहीं देखना चाहती, हिन्दुस्तान दुनिया को लीड करे इस अपेक्षा के साथ देख रही है। हमें दुनिया की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है.’’
स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में एक पेशेवर ने पीएम से जब ये कहा कि स्वच्छ भारत अभियान में चश्मा तो गांधी जी का है लेकिकन विजन आपका है, इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि- “ये चश्मे भी गांधी के हैं और ये विजन भी गांधी का है। ये मोदी का नहीं है विजन। सचमुच में तो मैं प्रायश्चित कर रहा हूं। पूरा देश प्रायश्चित कर रहा है। हम स्वच्छता कर रहे हैं वो सेवा से ज्यादा प्रायश्चित है। प्रायश्चित इस बात का है कि 50 साल तक इस महापुरुष ने देश की आजादी के लिए, हम सब के लिए अपना जीवन खपा दिया और आजादी से भी ज्यादा उसने स्वच्छता को महत्व दिया। जीवनभर वो स्वच्छता को खुद करते रहे और हिन्दुस्तान को स्वच्छ देखना चाहते थे। वो अपने नेतृत्व में देश को स्वतंत्र तो कर पाए थे स्वच्छ नहीं कर पाए थे। उनकी इतनी मेहनत के बाद भी जो अधूरा छूट गया था उसमें कहीं न कहीं हम सब जिम्मेवार हैं। हमारी पीछे की जो पीढ़ी थी वो भी जिम्मेवार है।“

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव में महिलाओं को जब खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है तो उन्हें बहुत पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि कुछ काम सरकार नहीं कर सकती और जो काम सरकार नहीं कर सकती, वह संस्कार कर सकते हैं। स्वच्छता का विषय संस्कार से जुड़ा है, ऐसे में सरकार एवं संस्कार मिल जाए तो चमत्कार हो सकता है।

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