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भारत और जापान का साझा विजन हमारे भविष्य को नई रोशनी देगा- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को जापान के समकक्ष शिंजो आबे के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। भारत और जापान की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच हाईस्पीड ट्रेन और नेवी कॉर्पोरेशन समेत 6 समझौते हुए। इस दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के बीच 2+2 वार्ता को लेकर भी सहमति बनी। पीएम मोदी ने जॉइंट स्टेटमेंट के दौरान कहा, ‘हम दोनों डिजिटल पार्टनरशिप से साइबर स्पेस, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्र से अंतरिक्ष में सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमत हुए हैं। श्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान का आज का साझा विजन कल के भविष्य को नई रोशनी देगा।

साझा व्यक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो और यामानाशी में हुए स्वागत के लिए प्रधानमंत्री आबे का धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि इस स्वागत ने मेरी इस जापान यात्रा की सफलता को और भी अविस्मरनीय बना दिया है। जापान पूरब और पश्चिम की सभ्यताओं के सर्वश्रेष्ठ पहलुओं का संगम है। यह वही महान देश है जिसने सिखाया है कि मानव जाति के विकास का रास्ता पुरातन और नूतन के बीच टकराव का नहीं, बल्कि उनके सह-अस्तित्व और सृजन का है। नये का स्वागत और पुराने का सम्मान – यह जापान की विश्व सभ्यता को प्रमुख देन है। और साथ ही भारत और जापान की एक गहरी समानता भी।

श्री मोदी ने कहा कि जापान और भारत के सम्बन्धों को हिन्द और प्रशांत महासागरों सी गहराई और विस्तार प्राप्त हैं। ये सम्बन्ध लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रताओं के प्रति और Rule of Law के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। अपने संबंधों के आगामी विकास के लिए एक विशाल विज़न पर प्रधानमंत्री आबे के साथ बहुत उपयोगी बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच पूरी सहमति है कि हम अपने सहयोग को digital partnership से cyber space तक, स्वास्थ्य से रक्षा-सुरक्षा तक और सागर से अंतरिक्ष तक, हर क्षेत्र में अबाध गति देंगे। श्री मोदी ने कहा कि जापान के निवेशकों ने भारत में 2.5 बिलियन डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है। इससे भारत में लगभग 30 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा। इसी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय करेन्सी स्वाप व्यवस्था पर हुई सहमति में हमारा आपसी विश्वास और हमारी आर्थिक साझेदारी की निरन्तर बढ़ती हुई नज़दीकी साफ़ तौर पर झलकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी है, लेकिन इसके रुप-स्वरुप पर प्रश्न हैं। किसका फायदा होगा, क्या करना होगा, ऐसे बहुत से सवाल हैं, लेकिन एक बात साफ है कि भारत और जापान के सहयोग के बिना 21वीं सदी एशिया की सदी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि दोनों देश विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच 2+2 Dialogue के लिए सहमत हुए हैं। इसका उद्देश्य विश्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

International Solar Alliance में जापान का प्रवेश, विश्व के हित में ऐसे सहयोग का एक और उज्जवल उदाहरण बनेगा। पीएम मोदी ने जापान को जी-20 समिट, रगबी वर्ल्डकप और 2020 ओलिंपिक की मेजबानी के लिए भी शुभकामनाएं दीं। 

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