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प्रधानमंत्री मोदी ने रखी भ्रष्टाचार मुक्त भारत की नींव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रतिबद्धता के साथ मुनाफाखोरों, कालाबाजारियों और जनता का शोषण करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। लालफीताशाही की नींद हराम हो गयी है। आतंकवादियों एवं उग्रवादियों की भी कमर टूट गयी है। सरकार ने दशकों से चली आ रही लालफीताशाही और भ्रष्टाचार में लिप्त कार्य संस्कृति को बदलने का काम किया। सरकारी योजनाओं में दूर​दर्शिता और समयबद्धता के साथ पारदर्शिता भी स्पष्ट दिखने लगी है। मोदी सरकार की नीतियों और निर्णयों में स्पष्टता है और उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त भारत की नींव रख दी है।

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अब तक 800 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त
भ्रष्टाचार का एक बड़ा माध्यम है बेनामी संपत्ति और लेनदेन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसपर अंकुश लगाने के लिए बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 को बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधित अधिनियम, 2016 के माध्यम से व्यापक रूप से संशोधित किया। यह संशोधित अधिनियम 1 नवंबर, 2016 से प्रभावी होने के बाद से 800 से अधिक करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों को कुर्क किया गया है, जो 400 से अधिक बेनामी लेनदेन मामलों के अंतर्गत है। संशोधित कानून लागू होने के बाद से 400 से अधिक बेनामी लेनदेन की पहचान की गई। इसके अतिरिक्त इस अधिनियम के तहत संपत्तियों को 230 से अधिक मामले में अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। गौरतलब है कि सरकार ने बेनामी अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए पूरे भारत में 24 बेनामी निषेध इकाईयां स्थापित की हैं।

बेनामी संपत्ति जब्त के लिए चित्र परिणाम

तीन साल में सवा लाख करोड़ से ज्‍यादा काला धन वापस
केंद्र सरकार के बनाए कठोर कानून और नोटबंदी के कारण गरीबों के मन में यह विश्वास पैदा होने लगा है कि यह देश ईमानदारों के लिए है। बेनामी संपत्ति रखने वाले परेशान हैं और सवा लाख करोड़ से अधिक कालेधन का पता लग गया है। दरअसल नोटबंदी के बाद बैंकों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त धन बैंकों में वापस आ गए। इनमें से करीब पौने दो करोड़ रुपये की राशि शक के घेरे में है। सवा लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा कालाधन की पहचान कर ली गई है और उसको surrender करवाया गया है। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद तीन लाख करोड़ रुपये जो कभी banking system में वापस नहीं आते थे वो बैंकों में आ गए हैं। इसके साथ ही 18 लाख संदिग्ध खातों की पहचान हो चुकी है। 2.89 लाख करोड़ रुपये जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा अडवांस्ड डेटा ऐनालिटिक्स के जरिए 5.56 लाख नए मामलों की जांच की जा रही है। साथ ही साढ़े चार लाख से ज्यादा संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़े गए हैं।

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57 लाख से अधिक नये लोग इनकम टैक्स के दायरे में 
5 अगस्‍त, 2017 तक ई-रिटर्न भरने की संख्‍या पिछले वर्ष इसी अवधि तक भरे गए 2.22 करोड़ ई-रिटर्न की तुलना में बढ़कर 2.79 करोड़ हो गई यानि 57 लाख की वृद्धि। एक साल के भीतर टैक्स पेयर्स की संख्या में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि बड़ी बात कही जा सकती है। इसके अतिरिक्त पूरे वित्‍त वर्ष 2016-17 के दौरान दायर सभी रिटर्न की कुल संख्‍या 5.43 करोड़ थी जो वित्‍त वर्ष 2015-16 के दौरान दायर रिटर्नों से 17.3 प्रतिशत अधिक है।

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दो लाख मुखौटा कंपनियों पर ताला लगा
हाल में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने ऐसी कंपनियों को नोटिस जारी किए थे जिनके बारे में माना जाता है कि वे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के रूप में काम कर रही हैं लेकिन उन्होंने रिजर्व बैंक में पंजीकरण नहीं करा रखा है। गौरतलब है कि डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले कंपनी रजिस्ट्रार के पास 13 लाख से अधिक कंपनियां पंजीकृत थीं। लेकिन 2,10,000 कंपनियों का पंजीकरण रद्द होने के बाद करीब 11 लाख कंपनियां बची हैं। वहीं 2,09,032 संदिग्ध शैल कंपनियों के बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए हैं ताकि अवैध लेन-देन और कर चोरी पर रोक लगाई जा सके।

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डीबीटी से दलाली सिस्टम पर जबरदस्त प्रहार
मोदी सरकार ने देश में एक नयी चुस्त-दुरूस्त, पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति को जन्म दिया है। अब तक 48 मंत्रालयों 364 योजनाएं डीबीटी यानि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्लेटफॉर्म से जुड़ गई हैं। वर्तमान में सरकार सालाना 35 करोड़ खातों में 74 हजार करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर कर रही है। इसमें से एक महीने में 6 हजार करोड़ ट्रांसफर होते हैं। अब तक दो लाख करोड़ रुपये डायरेक्ट खातों में पहुंचाए गए हैं। मई 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार ने 2014 से लेकर मार्च 2017 तक डीबीटी के जरिये कुल 57,029 करोड़ रुपये बचाए हैं। आधार से डीबीटी योजना के जुड़ने से बिचौलिये और फर्जी लाभार्थी खत्म हो चुके हैं। आधार लिंक की प्रक्रिया शुरू होने से पहल योजना के तहत 2015-16 के तहत पकड़े 3.5 करोड़ फर्जी और नकली LPG खाते पकड़े गए। इस साल अप्रैल 2017 तक 1.30 लाख फर्जी ग्राहकों की पहचान हुई है।

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आधार से लगभग तीन करोड़ फर्जी राशन कार्ड पकड़े
नोटबंदी के बाद सरकार ने काला धन जमा करने के लिए बनाई गई तीन लाख से भी अधिक फर्जी कंपनियों का पता लगाया है। इनमें से 1,75,000 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है। इतना ही नहीं कई ऐसी कंपनियों का पता लगा है जहां एक पते पर ही 400 फर्जी कंपनियां चलाई जा रहीं थी। अगस्त के पहले सप्ताह में ही शेयर बाजार नियामक ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (सेबी) ने ऐसी 331 कंपनियों पर व्यापार प्रतिबंध लगा दिया, जिन पर फर्जी कंपनियां होने का संदेह था। इनमें कम से कम 145 कंपनियां कोलकाता में रजिस्टर्ड हैं और 127 कंपनियां गंभीर जांच के घेरे में हैं।

72 हजार करोड़ से अधिक बेनामी संपत्ति जब्त की
”न खाऊंगा, न खाने दूंगा”… केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस संकल्प को आयकर विभाग अपनी कार्रवाई से आगे बढ़ा रहा है। बेनामी संपत्ति के मामले में देश भर में कार्रवाई जारी है। सरकार कई स्तर पर ऐसी अघोषित-बेनामी संपत्तियों का पता लगाने में लगी हुई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने सघन खोज, जब्ती और छापे में करीब 71,941 करोड़ रुपये की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया है।

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प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी
प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी- मोदी सरकार ने सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं। यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला, स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे घोटालों में देश का इतना खजाना लूट लिया गया था कि देश के सात आठ शहरों के लिए बुलेट ट्रेन चलवायी जा सकती थी। कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई। 

ऑनलाइन सरकारी खरीद से सिस्टम में आई पारदर्शिता
सरकार ने दशकों से चली आ रही लालफीताशाही और भ्रष्टाचार में लिप्त कार्य संस्कृति को बदलने का काम किया। सरकारी योजनाओं में दूर​दर्शिता और समयबद्धता के साथ पारदर्शिता भी स्पष्ट दिखने लगी है। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार ने सरकारी विभागों में सामानों की खरीद के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इसकी वजह से पारर्दशिता बढ़ी है और खरीद में होने वाले घोटालों में रोक लगी है।

मनरेगा में ‘दलाली’ पर रोक, बचाए 8,185  करोड़ रुपये
मनरेगा के तहत जॉब कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने से करोड़ों रुपये की बचत हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में मनरेगा के लिए डीबीटी भुगतान से 8,741 करो़ड़ रुपये की बचत की, जबकि पहल के जरिये बचत की राशि 8,185 करोड़ रुपये रही। दरअसल अब मनरेगा खातों को आधार से लिंक करने से एक करोड़ फर्जी जॉब कार्ड खत्म किए जा सके। मनरेगा के तहत जॉब कार्ड्स की कुल संख्या 13 करोड़ थी, जो 2016-17 में घटकर अब 12 करोड़ हो गई है। सरकार ने अभियान चलाकर पिछले एक साल में इस स्कीम से जुड़ी गड़बड़ियों को खत्म किया है। गौरतलब है कि जून के पहले सप्ताह तक 85 प्रतिशत मनरेगा खातों को आधार से लिंक कर दिया गया है।

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