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आपदा में पीएम मोदी के नेतृत्व कौशल की कायल है दुनिया

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2001 में भुज में आए भूकंप के बाद रिकॉर्ड पांच सौ दिनों में आठ लाख छिहत्तर हजार से ज्यादा घरों का निर्माण हो, या केदारनाथ त्रासदी, नेपाल भूकंप, कश्मीर की बाढ़, यमन संकट, अफगानिस्तान भूकंप और हुदहुद तूफान जैसी आपदाओं से निपटने का तौर-तरीका हो, लगता है आपदा प्रबंधन में पीएम मोदी ने मास्टरी हासिल की है। अब गुजरात में भारी बारिश ने तबाही मचाई है और पीएम मोदी ‘एक्शन’ में हैं। मंगलवार को तमाम व्यवस्तताओं के बीच पीएम मोदी ने हवाई सर्वेक्षण किया, मीटिंग की, अधिकारियों से राहत प्रबंध का ब्योरा लिया और तुरंत ही 500 करोड़ के राहत पैकेज का एलान कर दिया। जाहिर है ऐसे वक्त में पीएम मोदी फैसले लेने में कतई देर नहीं करते हैं।

गुजरात आपदा पर एक्शन में पीएम मोदी
गुजरात के 10 जिले इस समय भंयकर बाढ़ से प्रभावित हैं। इसमें सबसे ज्यादा बनासकांठा जिला बाढ़ से पीड़ित है। अब तक 110 लोगों की मौत की खबर है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पीएम मोदी ने स्थिति का जायजा लिया और कहा, ”केंद्र सरकार राज्य को 500 करोड़ रुपये की तत्काल मदद मुहैया कराएगी और एक विस्तृत सर्वेक्षण के पूरा होने के बाद जो भी जरूरी होगा, सहायता मुहैया कराई जाएगी।”

  • बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए किसानों की मदद के लिए हरसंभव उपाय किए जाएंगे।
  • बाढ़ के कारण मारे गए लोगों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से भी दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
  • घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे जो राज्य सरकार से मिलने वाली मदद के अतिरिक्त होगी।
  • केंद्र सरकार शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में संपत्ति एवं फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द से जल्द टीमें भेजेगी।
  • बनासकांठा एवं पाटन जिलों में राहत तथा बचाव अभियान के लिए सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ को भेजा गया है।

आपदा के वक्त मोदी की अद्भुत नेतृत्व शैली
आपदा कोई भी हो पीएम मोदी का नेतृत्व इससे उबरने में बेहद मददगार साबित होता है। उनके अधीनस्थ विभिन्न मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय का तो जवाब नहीं है। नेतृत्व कौशल और विभागों के बीच समन्वय से बड़ी से बड़ी आपदा के असर को कम कर दिया जाता है। पीएम मोदी ने एक नहीं कई अवसरों पर अपनी इस अद्भुत नेतृत्व कला का प्रदर्शन किया है।

बिहार में बाढ़ के खतरे को टाला
अगस्त 2014 में नेपाल में भू-स्खलन हुआ और भोटे कोसी नदी में मलबा जमा हो गया। नेपाल सरकार ने जमे मलबे को हटाने के लिए विस्फोट करने का फैसला किया। लिहाजा सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, अररिया, मधुबनी, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा की करीब पच्चीस लाख आबादी पर जल प्रलय का खतरा मंडराने लगा। लेकिन पीएम मोदी की पहल पर नेपाल सरकार ने विस्फोट टालने का फैसला किया और जमा 28 लाख क्यूसेक पानी को नियंत्रित विस्फोट के जरिये धीरे-धीरे निकालने का फैसला किया।

मालदीव के लोगों की प्यास बुझाई
दिसंबर 2014 में मालदीव का वाटर प्लांट जल गया, जिससे पूरे देश में पीने के पानी की किल्लत हो गई। पूरे देश में त्राहिमाम मच गया और आपातकाल की घोषणा कर दी गई। तब भारत ने पड़ोसी का फर्ज अदा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्वरित फैसला लिया। मालदीव को पानी भेजने का निर्णय कर लिया गया और इंडियन एयर फोर्स के 5 विमान और नेवी शिप के जरिये पानी पहुंचाया जाने लगा।

नेपाल भूकंप में राहत का अद्भुत उदाहरण
27 अप्रैल 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए। नेपाल में जिस तेजी से मदद पहुंचाई गई वो अद्भुत था। भारतीय आपदा प्रबंधन की टीम ने हजारों जानें बचाईं। सबसे खास रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय का नेपाल सरकार से बेहतरीन समन्वय रहा। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों की मदद
सितंबर 2014 में कश्मीर में भयंकर बाढ़ आई। बारिश, बाढ़ और भू-स्खलन ने तबाही मचा रखी थी। सड़कें, पुल, घर, फसलें बुरी तरह तबाह हो गईं थीं। घाटी में कई स्थानों पर 30 से 40 फुट तक पानी जमा हो गया था। हाहाकार मच गया, लोगों की जान पर बन आई थी। बाढ़ के पहले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई सर्वेक्षण किया किया और तुरंत स्वर्ग को सैलाब के कहर से मुक्ति दिलाने का निर्णय किया। पीएम मोदी ने इस कार्य में सेना को लगा दिया और सेना ने देवदूत बनकर लगभग पांच लाख लोगों की जान बचाई।

आंध्र-ओडिशा में ‘हुदहुद’ से बचाव
अक्टूबर 2014 में हुदहुद चक्रवाती तूफान ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तबाही मचाई। लेकिन मौसम विभाग की सटीक जानकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अग्रिम रणनीति ने जान का नुकसान बेहद कम कर दिया। समय रहते तटीय इलाकों को खाली करा लिया गया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्राकृतिक आपदा में केंद्र और राज्य सरकार दोनों ‘कंधे से कंधा मिलाकर’ काम किया और एक ‘मुश्किल’ समस्या से सफलतापूर्वक निपटा जा सका।

यमन और खाड़ी देशों में राहत कार्य
जुलाई 2015 में यमन गृहयुद्ध की चपेट में था और सुलगते यमन में पांच हजार से ज्यादा भारतीय फंसे हुए थे। बम गोलों और गोलियों के बीच हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को सुरक्षित निकालना मुश्किल लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व और विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह के सम्यक प्रबंधन और अगुवाई ने कमाल कर दिया। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय से भारत के करीब पांच हजार नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया वहीं 25 देशों के 232 नागरिकों की भी जान बचाने में भारत को कामयाबी मिली। इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए मजबूर कर दिया ।

अफगानिस्तान में भूकंप में राहत
अक्टूबर 2015 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 7.5 तीव्रता के भूकंप से 300 लोगों के मौत हो गई। पीएम मोदी ने तत्काल दोनों देशों को मदद की पेशकश की। अफगानिस्तान में भारतीय राहत टीम को बिना देर किए रवाना किया गया और मलबे में फंसे सैकड़ों लोगों को निकालने में सफलता पायी।

सऊदी अरब में फंसे हजारों भारतीयों को निकाला
सऊदी अरब में गलत हाथों में जाकर फंसे करीब 20 हजार भारतीय तीन महीने के भीतर अपने वतन वापस लौट पाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से सऊदी अरब सरकार ने भारतीयों को 90 दिन के लिए ‘राजमाफी’ दी है। ‘राजमाफी’ के तहत 20 हजार से ज्यादा लोगों ने भारत लौटने के लिए अर्जी दाखिल की है।

पूर्वोत्तर के भूकंप में टीम मोदी चमकी
4 जनवरी, 2016 को जब पूरा देश चैन की नींद सो रहा था पूर्वोत्तर इलाकों में आज 6.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया, जिसमें कम-से-कम 8 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए। मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में कई इमारतें या तो ध्वस्त हो गईं या क्षतिग्रस्त हो गईं। पूरा पूर्वोत्तर भूकंप की जद में था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर सेना और वायु सेना राहत कार्य संभाला और एनडीएमए के कई दलों को मणिपुर, असम भेजा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को राहत कार्य का जिम्मा सौंप दिया लेकिन स्वयं मॉनिटरिंग करते रहे। इसी का नतीजा रहा कि शुरुआती दौर में नुकसान के बाद कोई हानि नहीं होने दी गई।

उत्तराखंड बाढ़ में राहत पहुंचाई
अगस्त 2016 में उत्तराखंड में प्रलंकारी बाढ़ आई। तब केंद्र की सरकार ने एनडीआरएफ और सेना की मदद से राहत अभियान चलाया। इस अभियान में दूर-दराज के इलाकों में फंसे लोगों को बचाने में सफलता मिली। कई दिनों से भूखे प्यासे लोगों को एम-17 हेलीकॉप्टर की मदद से सेना ने सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया और उनकी जान बचायी।

चेन्नई में वरदा का कहर से बचाया
दिसंबर 2016 में चेन्नई में वरदा तूफान ने तबाही मचाई, 100 किलोमीटर की तेज रफ्तार से हवाएं चलीं, हजारों पेड़ उखड़ गए लेकिन जान का नुकसान बेहद कम हुआ। दरअसल समय पूर्व आपदा प्रबंधन की वजह से तटीय इलाके के लोगों को बाहर निकाल लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसकी मॉनिटरिंग की और जानी नुकसान को कम करने में कामयाबी पायी।

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