Home पोल खोल दुर्घटना के बाद वो मदद मांगती रही, पर कार से नहीं उतरे...

दुर्घटना के बाद वो मदद मांगती रही, पर कार से नहीं उतरे राहुल गांधी!

1212
SHARE

“राहुल गांधी कुछ भी बन सकते हैं प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। वे पीएम मटेरियल ही नहीं हैं।”

अब तक ये बात वे लोग बोलते रहे हैं जो राहुल के राजनीतिक विरोधी हैं। लेकिन अब, आम लोग भी ऐसा कहने लगे हैं। सिर्फ कहने ही नहीं लगे हैं, सबूत देने लगे हैं।

सब मदद को दौड़े, राहुल कार में बैठे रहे!

प्रभाकर मिश्रा नाम के युवक ने सोशल मीडिया जो घटना साझा की है उसे सुनकर तो आप भी प्रभाकर की बात से सहमत हुए बगैर नहीं रह पाएंगे। बात तब की है जब सहारनपुर रैली के लिए राहुल गांधी जा रहे थे। रास्ते में ठीक उनकी गाड़ी के सामने एक कार को बड़ी गाड़ी ने धक्का मार दिया। महिला तो बच गयी, लेकिन वह डरी हुई थी। भीड़ जमा हो गयी। जो जहां थे, वहां से मदद के लिए दौड़ पड़े। काफिला रुका, तो उस वक्त गुजर रहे प्रभाकर मिश्रा भी महिला की मदद के लिए निकले। पर प्रभाकर बताते हैं कि वहीं खड़ी गाड़ी में मौजूद राहुल गांधी और उनके साथ राज बब्बर और गुलाम नबी आजाद ने जरूरत ही नहीं समझी कि पीड़िता को मदद पहुंचायी जानी चाहिए।

“राहुल सब कुछ बन सकते हैं पीएम नहीं”

इस घटना के जरिए जो सवाल जेहन में उतरते हैं जिसने प्रभाकर को यह कहने को बाध्य किया कि राहुल पीएम नहीं बन सकते, उन सवालों में अहम हैं-

  • क्या राहुल गांधी आम आदमी जैसी संवेदनशीलता भी नहीं रखते?
  • पास घायल की मदद नहीं कर सकते, तो दूसरे उनसे क्या उम्मीद करें?
  • राहुल जैसा राष्ट्रीय स्तर का नेता बीच सड़क पर अकेली लाचार महिला को उसी हाल में छोड़कर कैसे आगे बढ़ सकता है?

काश! ऐसा होता!

लेकिन, सच तो सच होता है। प्रभाकर मिश्रा लिखते हैं कि अगर राहुल चाहते तो इस मौके पर विशाल हृदय का परिचय दे सकते थे। वो उस घटना को भी याद करते हैं जब बीच सड़क पर मिलने आती बच्ची को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाड़ी रोक दी थी। उसे गोद में  उठा लिया था।

एक मोदी हैं जो सड़क पर दौड़ती बच्ची को उठा लेते हैं गोदी…

प्रभाकर तुलना करते हैं एक मोदी हैं और एक राहुल। वो कल्पना करते हैं कि काश! राहुल ने उस महिला की मदद की होती। वह महिला हमेशा के लिए उनकी मुरीद हो जाती। मीडिया वाले इस घटना को राहुल की शान में दिखाते। मगर, राहुल को ऐसी समझ ही नहीं है। और, जिसके पास ऐसी समझ ही नहीं है, वो भला पीएम की कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है। प्रभाकर बहुत सही फरमाते हैं कि जो कुर्सी देश में सिर्फ एक है। उस कुर्सी तक पहुंचने के लिए कुछ तो अलग करना होगा, कुछ तो अलग दिखना-दिखाना होगा। लेकिन, ये गुण राहुल में है ही नहीं।

Leave a Reply