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मोदी सरकार का देश को 5 सैनिक स्कूलों का तोहफा, सेना को मिलेंगे अच्छे और काबिल अफसर

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देश की सेना को हर तरह से मजबूत बनाने के लिए मोदी सरकार लगातार कोशिश कर रही है। मोदी सरकार जहां सेना को आधुनिकतम हथियारों और उपकरणों से लैस कर रही है, वहीं सेना के लिए अच्छे और काबिल अफसर तैयार करने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। मोदी सरकार जल्द 5 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना करने जा रही है, ताकि देश के नौजवानों में बचपन से ही सेना में जाने का जज्बा पैदा हो। पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में बच्चे सेना के बारे में जानें और उसे नजदीक से देखें।

ज़मीन और दूसरी जरूरतों के लिए राज्यों से समझौता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि सरकार देश में पांच सैनिक स्कूल अलवर, रुद्रप्रयाग, अमेठी, वारांगल और संबलपुर में खोलेगी। ज़मीन और दूसरी जरूरतों के लिए राज्य सरकारों से भी लिखित में समझौता हो चुका है। बता दें कि 2014 से पहले यूपीए सरकार ने अलवर में सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की थी। राजस्थान की तत्कालीन गहलोत सरकार ने उसके लिए हल्दीना में जमीन भी आवंटित किया था, लेकिन उसके बावजूद स्कूल आकार नहीं ले पाया। वहीं मोदी सरकार इस स्कूल के अलावा चार अन्य स्कूलों को आकार देने में पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही है।

5 राष्‍ट्रीय सैनिक स्कूल और 31 सैनिक स्कूल

लोकसभा में सैनिक स्कूलों के बारे में जानकारी देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में इस वक्त 5 राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल चल रहे हैं। वहीं देश के 24 राज्यों में 31 सैनिक स्कूल पहले से ही संचालित किए जा रहे हैं।

आइये जानते हैं भारत में राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल कहाँ-कहाँ स्थित हैं:

स्कूल का नाम    राज्य का नाम
राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल, चैल  हिमाचल प्रदेश
राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल, अजमेर राजस्थान
राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बेलगाम कर्नाटक
राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बंगलौर  कर्नाटक
राष्‍ट्रीय मिलिट्री स्कूल, धौलपुर राजस्थान

       

सैनिक स्कूलों की उपलब्धियां

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में सैनिक स्कूलों की कामयाबी पर बात करते हुए बताया कि नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में हर साल बड़ी संख्या में सैनिक स्कूल के बच्चे भी जा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि एनडीए में जाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही हैं। 2016 में एनडीए में 595 में से 158 बच्चे सैनिक स्कूल के थे। इसी तरह से 2017 में 644 में से 179 सैनिक स्कूल के थे। वहीं 2018 में 662 में से 147 बच्चे सैनिक स्कूल के सिलेक्ट हुए थे।

प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार सेना और सैन्य परिवार की भलाई के लिए एक के बाद एक फैसला लेते रहे हैं। आइए देखते हैं कुछ महत्त्वपूर्ण फैसले…

शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में हमेशा से सेना रही है। शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च अब सरकार उठाएगी। इससे पहले शहीद के बच्चों की पढ़ाई के लिए ट्यूशन और हॉस्टल फीस की भुगतान की सीमा 10 हजार रुपए महीना निर्धारित थी, जिसे हटा लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, शहीद, विकलांग व लापता अफसरों और जवानों के बच्चों के लिए पढ़ाई खर्च की निर्धारित की गई सीमा को हटा दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के नए आदेश का लाभ विकलांग, लापता सैनिकों के साथ जंग के मैदान में शहीद हुए सैनिकों के बच्चों को मिलेगा।

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शहीदों के लिए स्मारक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी, 2019 को दिल्ली में पत्थर से बने स्तंभ के नीचे ज्योति को प्रज्ज्वलित कर 40 एकड़ में फैले युद्ध स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया। ये स्मारक आज़ादी के बाद देश के लिए जान क़ुर्बान करने वाले वीर सैनिकों के सम्मान में तैयार किया गया है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मुझे बहुत संतोष है कि देश का दशकों लंबा इंतजार खत्म हो गया है। आजादी के सात दशक बाद मां भारती के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद करने के लिए यह युद्ध स्मारक उनको समर्पति किया जा रहा है। इसमें हजारों शहीदों के नाम अंकित हैं।

वन रैंक वन पेंशन योजना
वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करना सभी सैनिकों की सेवा और त्याग के प्रति एक बड़ा प्रयास था। कांग्रेस के शासनकाल में इस विषय पर किसी भी विचार-विमर्श की योजना को वर्ष 1973 में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया थी, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आते ही इस पर नए सिरे से विचार हुआ और योजना को लागू कर दिया गया। इससे यह व्यवस्था सुनिश्चित हो गई कि सैनिकों व उनके आश्रितों को न केवल उनके सेवाकाल के दौरान आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि सेवाकाल समाप्त हो जाने के बाद भी उनकी स्थिति संतोषजनक बनी रहेगी। इससे अलग-अलग समय पर सेवामुक्त हुए दो सैनिकों की पेंशन का अंतर समाप्त हो गया। यह असमानता सेना के सभी पदों पर थी, जिस पर कांग्रेस के शासनकाल में कभी कोई प्रयास तक नहीं किया गया। 2006 से पहले तक रिटायर हुए सैनिक को अपने से जूनियर पद पर तैनात सैनिक से भी कम पेंशन प्राप्त हो रही थी। इस भारी अंतर के परिणामस्वरूप सैनिकों के मन में भारी असंतोष था। मोदी सरकार के प्रयासों ने इसे समानता प्रदान की।

‘संदेश टू सोल्जर्स’ से जुड़ा पूरा देश
देश की रक्षा में लगे सैनिकों का सम्मान तो प्रत्येक देशवासी के मन में हमेशा रहता है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे उनकी अभिव्यक्ति से जोड़कर सैनिकों के लिए एक ‘सरप्राइज’ बना दिया। ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने देश का आह्वान किया कि सभी देशवासी सैनिकों को अपनी भावनाओं से अवगत कराने हेतु अपनी रचनात्मकता का उपयोग करें। इस आह्वान का प्रभाव इतना व्यापक रहा कि किसी ने सैनिकों के लिए भावभीना पत्र लिखा, किसी ने कविताएं। किसी के बनाए चित्र दिल छूने वाले थे तो किसी के एसएमएस। सोशल मीडिया पर भी एक अभियान सा चल पड़ा। नरेन्द्र मोदी एप, मायगव एप, रेडियो पर भी संदेशों की भरमार थी। पूरा देश ही जैसे भावनाओं के सैलाब में बह चला। संभव है कि कुछ आलोचकों को मामूली सी बात लगे, परंतु सैनिकों के लिए यह बहुत अधिक अनमोल उपहार था। जिन सैनिकों तक यह सौगात पहुंची, उनकी भावुकता की कोई सीमा नहीं थी। यह प्रयास देशवासियों के प्रति सैनिकों और सैनिकों के प्रति देशवारियों के बीच एक भावनात्मक सेतु बन गया।

भोजन से लेकर हथियार तक सुव्यवस्था
मोदी सरकार के शासन की बागडोर संभालने से पहले तक सैनिकों की स्थिति इतनी शोचनीय थी कि वे दो दशक पुराने हथियारों से देश की सुरक्षा करने को मजबूर थे। इसका अर्थ यह था कि तत्कालीन सरकार के लिए एक सैनिक की जान का कोई मोल ही नहीं था। वे उनसे यह उम्मीद करती थी कि उन्हीं जंग लगे हथियारों के बल पर वे युद्ध के मैदान में उतरें और दुश्मनों को पस्त करके आएं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए तुरंत नए हथियारों की खरीद के आदेश जारी किए, जिनमें 1 लाख 85 हजार रायफल्स और 10 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट शामिल थीं। इनमें भारी संख्या में हेलमैट की खरीद को भी रखा गया था। इन नए हथियारों की विशेषता यह भी थी कि ये नए हथियार पुराने हथियारों की तरह भारी भरकम न होकर, अत्याधुनिक थे। सैनिकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी और अधिक पोषण को ध्यान में रखकर की गई।

कश्मीर में तैनात सैनिकों के लिए विशेष व्यवस्था
कश्मीर जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सैनिकों की सुविधाओं में बढोतरी की गई। हमलावरों से सैनिकों की सुरक्षा हेतु यह व्यवस्था की गई कि सैनिकों की मूवमेंट केवल बख्तरबंद गाड़ियों द्वारा ही हो, जिसमें आगे की ओर मैटल प्लेट लगी हो। सैनिकों के काफिले के आगे माइन प्रोटेक्शन व्हीकल रखने पर भी विचार किया गया। काफिलों की व्यवस्था का दायित्व सेना को सौंपा गया। सेना की बटालियन का समय बचाने के लिए तथा उनकी सुरक्षा की दृष्टि से टॉप क्लास विमान मुहैया कराए गए। विकलांग सैनिकों की पेंशन में भी भारी बढ़ोतरी की गई।

 

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