Home पोल खोल कार्रवाई प्रणय रॉय-NDTV के भ्रष्टाचार पर, दर्द ‘SICKउलरों’ को!

कार्रवाई प्रणय रॉय-NDTV के भ्रष्टाचार पर, दर्द ‘SICKउलरों’ को!

1519
SHARE

कार्रवाई NDTV पर हुई और मिर्ची लग रही है ‘SICKउलरों’ को। यानी बारिश कहीं और हुई और छाता कहीं और तन गया। ये बीमार धर्मनिरपेक्ष सोच वाले लोग, जिन्हें हम ‘SICKउलर’ लिखेंगे तर्क क्या दे रहे हैं- ‘अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला’, आवाज़ दबाने की कोशिश, मीडिया पर नकेल कसने की कोशिश। अगर आपको याद हो, तो असहिष्णुता के मुद्दे उठाते वक्त भी यही तर्क दिए गये थे।

एनडीटीवी पर कार्रवाई के विरोध में प्रतिक्रिया और असहिष्णुता के मुद्दे पर प्रतिक्रिया- दोनों में बड़ा फर्क है जबकि ‘SICKउलर’ प्रतिक्रिया एक जैसी है। फर्क ये है कि असहिष्णुता के मुद्दे में कथित अन्याय का विरोध था, जबकि एनडीटीवी पर कार्रवाई मामले में भ्रष्टाचार का समर्थन। एक फ्रॉड हुआ है। बैंक को ठगा गया है। सीबीआई उसकी जांच कर रही है। क्या सीबीआई को जांच के लिए ‘SICKउलरों’ से परमिशन लेनी होगी?

अगर ये आशंका सही भी हो कि एनडीटीवी को निशाना बनाया जा रहा है तो भी परीक्षा देने से आप बच नहीं सकते। अगर जांच में आंच न आए, तो बात समझ में आती है। आपकी आशंका को तथ्य मिलता है। आप अपनी आवाज़ को बुलन्द कर सकते हैं। परन्तु, भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी रही मीडिया बिना जांच के ही खुद को निर्दोष मानकर कैसे चल सकती है? जांच की कार्रवाई को ही ‘आवाज़ दबाने की कोशिश’ कैसे बताया जा सकता है?

आप नेता आशुतोष ने पत्रकारों के बीच कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि भ्रष्टाचार का ये मामला सही है या गलत है,लेकिन इस कार्रवाई के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। अजीब बात है। आपको पता भी नहीं है कि भ्रष्टाचार का मामला सही है या गलत और आपने ये मान लिया कि सीबीआई एनडीटीवी को निशाना बन रही है। ये कैसी सोच है! आश्चर्य होता है ऐसी राजनीति पर।

सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति फर्जीवाड़ा करता है, भ्रष्टचार करता है तो उसके खिलाफ या उसकी संस्था पर कार्रवाई को मीडिया पर कार्रवाई कैसे कहा जा सकता है ? यही नहीं, क्या किसी भ्रष्टाचारी को सिर्फ इसीलिए छोड़ दिया जा सकता है, क्योंकि वो एक न्यूज चैनल का मालिक है? क्या मीडिया का मालिक भर होने से वो देश के कानून, संविधान सबसे ऊपर हो जाता है? जिस देश में पुरानी सरकारें बिना किसी सबूत के मुख्यमंत्रियों तक को झूठे मामलों में घसीट चुकी हैं, क्या वहां एक भ्रष्ट पत्रकार पर कार्रवाई होना गलत है? सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका चैनल उनके सरकार और देश विरोधी एजेंडे के प्रचार-प्रसार का काम करता है ?

कानून ताक पर रखकर ‘फ्री स्पीच’ का रोना
एनडीटीवी मीडिया समूह के सह-संस्थापक प्रणय रॉय के ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी ने देश की सियासत को फिर से गर्मा दिया है। सीबीआई ने प्रणव रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय समेत एक प्राइवेट कंपनी व अन्य के खिलाफ केस भी दर्ज किया है। यह केस ICICI बैंक को कथित तौर पर 48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में दर्ज किया गया है। इसी केस के सिलसिले में सीबीआई ने दिल्ली और देहरादून में चार जगहों पर छापेमारी की है। इसी बहाने देश के फ्री स्पीच गैंग को फिर से सक्रिय होने का मौका मिल गया है। छाती पीटी जा रहा है कि एनडीटीवी के प्रमोटरों पर कार्रवाई क्यों हो रही है? इस मामले को भड़काने के लिए ‘SICKउलर’ गैंग, फ्री स्पीच गैंग, विकृत वामपंथी विचारधारा, याकूबों और अफजल गुरुओं के नाते-रिश्तेदार सब सक्रिय हो गए हैं। सब एक सुर में यही रोना रो रहे हैं कि ये मीडिया पर हमला है।

प्रणय रॉय और उनकी कंपनी पर हैं गंभीर आरोप
ऐसा भी नहीं है कि, प्रणय रॉय या उनकी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई अचानक शुरू हो गई है। ये प्रक्रिया सालों से चल रही है। अलबत्ता यूपीए सरकार के दौरान भले ही उसे दबाने की कोशिशें हुई हों। लेकिन इस सरकार में भी लंबी प्रक्रिया गुजरने के बाद छापेमारी की कार्रवाई शुरू हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो Income Tax, Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI) और Delhi Police’s Economic Offences Wing (EOW), Serious Frauds Investigation Office (SFIO) and Registrar of Companies (RoC) प्रणय रॉय और उनकी कंपनियों के खिलाफ काफी समय से जांच में जुटी हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय ने फेमा प्रावधानों का उल्लंघन करने को लेकर NDTV के खिलाफ 2,030 करोड़ रुपये का नोटिस भी जारी किया था । जानकारी तो यहां तक है कि ED के अनुसार NDTV ने FEMA को ताक पर रखकर 1,113 करोड़ रुपया हासिल किया था। यही नहीं इनकी RRPR (Radhika Roy Prannoy Roy) Holdings के नाम की शून्य आय वाली कंपनी को ICICI बैंक ने 375 करोड़ रुपये का लोन कैसे दे दिया ये भी जांच का विषय है। इसी रकम में से रॉय दंपति ने 90 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त लोन के तौर पर अपने खातों में डाल लिए। इसके अलावा एक बार SEBI आयकर की घोषणा में देरी के चलते NDTV पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना भी ठोक चुका है। वो 2जी स्कैम के पैसे को चिदंबरम के साथ मिलकर ब्लैक से व्हाइट करने के मामले में भी इनकम टैक्स की जांच में आरोपी हैं। आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव भी चिदंबरम और प्रणय रॉय की मिलीभगत का पर्दाफाश कर चुके हैं।

आलम ये है कि एनडीटीवी की धोखाधड़ी पर श्री अय्यर एक किताब तक लिख चुके हैं

कानून पर सवाल उठाने वालों का स्वार्थ क्या है ?
सवाल है कि सीबीआई की कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले प्रणय रॉय एंड कंपनी के घोटालों से पूरी तरह आंखें क्यों मूदें रखना चाहते हैं ? इसमें उनका निहित स्वार्थ क्या है ? क्या ये भी देश विरोधी और मोदी विरोधी एजेंडे की ही अगली कड़ी है? क्या इस देश में मीडिया चलाने वाले लोग ( एजेंडा चलाने वाले) कानून से ऊपर हैं? किसी भ्रष्टाचारी पर कानून के तहत कार्रवाई मीडिया पर हमला कैसे हो गया ? सवाल ये भी है कि देश कानून से चलेगा या मोदी विरोधी और देश विरोधी सोच से? जो प्रोपेगेंडा फैलाने में जुटे हैं क्या उन्हें शांत रखने के लिए सरकारी एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे बैठी रह जाएं ? जो सरकार ही भ्रष्टाचार और कालेधन पर शिकंजा कसने के वादे के साथ आई है वो क्या एक भ्रष्टाचारी को इसीलिए छोड़ देगी क्योंकि उसका रिश्ता मीडिया और पूर्ववर्ती सरकार की दलाली से रहा है ?

अपने देश के कानून से क्यों डरते हैं प्रणय रॉय ?
प्रणय रॉय और उनकी पत्नी के खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई सीबीआई कर रही है, जो कि एक स्वतंत्र संस्था है। उसके रुटीन कार्यों में मौजूदा सरकार ने कभी किसी तरह का दखल नहीं दिया है। सवाल ये भी है कि अगर प्रणय रॉय इतने पाक-साफ हैं तो कानूनी तौर पर इस मामले का सामना क्यों नहीं करते ? अगर वाकई उन्हें लगता है कि उन्हें फंसाया जा रहा है, तो उन्हें अदालत में जाने से कौन रोक रहा है? लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि उनका चैनल एक खास विचारधारा को प्रमोट करता है, उनके गैर-कानूनी कार्यों को कैसे आंख मूंद कर बर्दाश्त किया जा सकता है ?

जब सीबीआई का सच में दुरुपयोग हुआ था, तब ‘फ्री स्पीच गैंग’ कहां थी ?
यही सीबीआई है जो एक समय झूठे मामले में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से 9 घंटों तक पूछताछ की थी, तब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे। अदालत में साबित हो चुका है कि तब की सरकार ने मोदी जी को झूठे मामले में फंसाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया था। अब सवाल उठता है कि जब एक झूठे केस में किसी राज्य के मुख्यमंत्री से सीबीआई कई घंटों तक पूछताछ कर सकती है, तो क्या प्रणय रॉय के खिलाफ जांच नहीं कर सकती ? जब उनके खिलाफ सबूतों के अंबार होने की बात है। जब मनमोहन-सोनिया सरकार के दौरान कानून का मजाक बनाया गया था तब ये ‘सिकुलर गैंग’, फ्री स्पीच, विकृत वामपंथी विचारधारा, याकूबओं एवं अफजल गुरुओं के नाते-रिश्तेदार किस बिल में दुबके हुए थे ? लेकिन तब वो सच्चाई के लिए क्यों खड़े होते ? क्योंकि उनकी ठेकेदारी तो सिर्फ झूठ का प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए है।

दरअसल ये वो दौर है जब हर गुनहगार खुद के एक्सपोज होने पर ‘मेरे खिलाफ साजिश हो रही है’ का नारा लगाकर खुद को पवित्र बताने के तिकड़मों में जुट जाता है। ऐसी ही कोशिश लोग याकूब और अफजल गुरु जैसे आतंकियों को लेकर भी कर चुके हैं। एनडीटीवी ने तो एक चैनल के तौर ऐसी विकृत मानसिकता को हवा देना अपना पेशा बना रखा है। ये वो चैनल है जो सरकार को बदनाम करने के लिए अपनी स्क्रीन काली कर चुके हैं। लेकिन ये देश मीडिया का छद्म मुखौटा पहने लुटरों से नहीं संविधान और कानून के पालन से चलेगा। न ही इन मुट्ठीभर लोगों की सोच से राष्ट्रभक्त पत्रकारों की पत्रकारिता कलंकित हो सकती है। देश विरोधी ताकतें जितनी जल्दी ये बात समझ जाएं उसी में नकारात्मक मानसिकता वाले पत्रकारों और उनका वित्त पोषण करने वाले उनके भ्रष्ट आकाओं की भी भलाई है। इसी में सबका हित छिपा है।

 

Leave a Reply