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प्रदूषण फैलाने पर मिलेगी सजा, मोदी सरकार ने सख्त किया अपना रुख

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दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। वहीं अब मोदी सरकार भी प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई का प्लान बना रही है। पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों सहित दूसरे विभागों के आला अफसरों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में कहा मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ हर किसी की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय कर सजा भी दी जाएगी।

प्रदूषण पर बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक

प्रदूषण पर बुलाई गई इस उच्च स्तरीय बैठक की जानकारी देते हुए पर्यावरण सचिव सीके मिश्र ने बताया कि बैठक में प्रदूषण को रोकने के लिए एक्शन प्लान की समीक्षा की गई। साथ ही इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की ओर से प्रदूषण पर रोकथाम को लेकर दिए गए निर्देशों के अमल की भी समीक्षा हुई।


साथ ही सचिव सीके मिश्र ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक भले ही नहीं लग पाई है, लेकिन दोनों राज्यों में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। उन्होंने बताया कि बैठक में राज्यों के साथ प्रदूषण से निपटने के लिए तुरंत ही 15 दिन का एक विशेष अभियान शुरू करने पर सहमति बनी है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े सचिव और अधिकारी

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई इस बैठक में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों के साथ नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम के डीएम और दूसरे विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए। दिल्ली के मुख्य सचिव सहित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और दिल्ली के सभी नगर निगमों के आयुक्त मंत्रालय पहुंचे थे।

दिल्ली को ‘गैस चैम्बर’ में तब्दील करने के लिए केजरीवाल सरकार जिम्मेदार !

गौरतलब है कि दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार भले ही पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहरा रही है लेकिन हकीकत यह है कि दिल्ली को “गैस चैम्बर” बनाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार जिम्मेदार है।

RTI में हुआ खुलासा

एक RTI में खुलासा हुआ है कि केजरीवाल सरकार ने पिछले कई वर्षों में ग्रीन टैक्स के तहत एकत्रित किए गए अधिकतर धन राशि को खर्च नहीं किया है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने के लिए एकत्र किए गए धन का लगभग 20 फीसदी ही खर्च किया।

टाइम्स नाउ के हवाले से ऑप इंडिया ने खबर दी है कि दिल्ली सरकार ने साल 2015 में कुल ₹1174.67 करोड़ का ग्रीन टैक्स जमा किया था, जिसमें से केवल ₹272.51 करोड़ ही खर्च किए गए। इस ₹272 करोड़ में से ₹265 करोड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खर्च किए गए।दिल्ली सरकार ने सड़कों की मरम्मत के लिए ग्रीन फंड के कुछ करोड़ रुपए ही खर्च किए।

ग्रीन टैक्स की राशि खर्च करने में नाकाम 

RTI के जवाब में कहा गया है कि दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर ₹265 करोड़ खर्च किए गए। इसका मतलब यह है कि दिल्ली सरकार द्वारा ग्रीन टैक्स के रूप में एकत्र किए गए फंड में ₹902 करोड़ की बड़ी राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह भारी भरकम रकम का 77 फीसदी है।

ग्रीन टैक्स की राशि खर्च करने में पहले भी असफल  

ऑप इंडिया की खबर के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब RTI के जवाब से पता चला है कि दिल्ली सरकार किस तरह से इकट्ठा किए गए ग्रीन टैक्स को खर्च करने में असफल रही है। 2017 में इसी तरह की एक और RTI के जवाब से पता चला था कि ₹787 करोड़ ग्रीन टैक्ट जमा किए गए थे, जिसमें से केवल ₹93 लाख खर्च किए गए थे। यह राशि टोल प्लाजा पर रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के लिए दस्तावेज तैयार करने पर खर्च की गई थी।

इलेक्ट्रिक बस सेवा का वायदा खोखला 

2017 में दिल्ली सरकार ने यह भी कहा था कि 500 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के लिए अप्रयुक्त राशि का उपयोग किया जाएगा। इस साल मार्च में केजरीवाल सरकार ने 1000 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक राजधानी में इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं। 

मोदी सरकार देश में पर्यावरण सुधार के लिए उठा रही है बड़ा कदम

मोदी सरकार, देश में प्रदूषण की बढ़ती समस्या को लेकर काफी गंभीर है, जिसके लिए सरकार कई विशेष प्रोजेक्ट शुरू करने पर फोकस कर रही है। इस दिशा में अपना अगला कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने पेड़-पौधों की गिरती संख्या की समस्या से निजात पाने के लिए सीएएमपीए को 47,436 करोड़ रुपए की धन राशि दी है।

सीएएमपीए की होगी जिम्मेदारी

मोदी सरकार वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ देश पर्यावरण को प्रोत्साहन देने के लिए इस बड़े कदम को उठा रही है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 29 अगस्त को सीएएमपीए संस्था को ये फंड दिया।

इस राज्य को मिली सबसे अधिक राशि

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि बांटी गई 47,436 रुपए की राशि 27 राज्यों को दी गई है। वहीं इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ को सबसे अधिक 57 करोड़ की राशि दी गई है।

किस राज्य को कितनी राशि

इसके साथ ही क्रमश: मध्य प्रदेश को 52 सौ करोड़, झारखंड को 41 सौ करोड़, उत्तराखंड को 26 सौ करोड़, हिमाचल प्रदेश को 16 सौ करोड़, उत्तर प्रदेश को 18 सौ करोड़, हरियाणा को 12 सौ करोड़, पंजाब को 1 हजार करोड़, बिहार को 5 सौ करोड़, पश्चिम बंगाल को 2 सौ करोड़ रुपयों का आवंटन किया गया।

किन कार्यों में खर्च होगी यह राशि

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र, वन्यजीव प्रबंधन, जंगलों में लगने वाली आग की रोकथाम के साथ उस पर नियंत्रण पाने की कार्रवाईयों, वन्यजीव पर्यावास में सुधार आदि के लिए इस राशि का उपयोग किया जाएगा।

 

 

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