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रोहिंग्या मामले में केवल कानूनी पहलुओं पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

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”रोहिंग्या मुस्लिम आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उन्हें देश से जाना ही होगा” केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही साफ कर दिया था कि केंद्र सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर कोई समझौता नहीं करन जा रही है। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया है कि इस मुद्दे के केवल कानूनी पहलू पर विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं बल्कि कानूनी बिन्दुओं पर आधारित होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ कानूनी बिन्दुओं पर ही बहस सुनेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि वे भावनात्मक पहलू पर बहस करने से गुरेज करें क्योंकि यह मामला मानवीय मुद्दे और मानवता से संबंधित है जिस पर परस्पर सम्मान के साथ सुनवाई की आवश्यकता है।

13 अक्टूबर को होगी सुनवाई
देश में अवैध रूप से रहने वाले चालीस हजार से अधिक अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने वाले हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। सरकार का तर्क है कि यह मामला कोर्ट में विचार योग्य नहीं है और इसी आधार पर रोहिंग्या मुस्लिमों के पक्ष में दायर की गई याचिका में केंद्र के इस रुख का विरोध किया।

रोहिंग्या पर केंद्र का कड़ा रूख
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह केंद्र सरकार ने पिछले 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था और देश में अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों से देश को खतरा बताया था। 16 पन्ने के इस हलफनामे में केंद्र ने कहा कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क हैं. ऐसे में ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं और इन अवैध शरणार्थियों को भारत से जाना ही होगा।

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