Home चुनावी हलचल आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की जीत से कांग्रेस में हड़कंप

आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की जीत से कांग्रेस में हड़कंप

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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही कांग्रेस हार के डर से सदमे में है और अविश्वास की मनःस्थिति से गुजर रही है। ऐसा इसलिए कहना पड़ता है कि पिछले दो दिनों में कांग्रेस के दो बड़े नेता सलमान खुर्शीद और पी. चिदंबरम ने अपने बयानों में कांग्रेस के अंदर बैठे डर और अविश्वास को जाहिर किया है।

आखिर, यह भय क्या है?
कांग्रेस को पिछले चार वर्षों से यह चिंता सता रही है कि पार्टी का वजूद देश में खत्म हो चुका है औऱ उसके पास ऐसा कोई लोकप्रिय नेता नहीं है जो प्रधानमंत्री मोदी के कद की बराबरी कर सके और पार्टी को सत्ता की पटरी पर लाकर खड़ा कर दे। कांग्रेस पार्टी की इसी कमजोरी ने पार्टी को महागठबंधन करने के लिए मजबूर किया। गुजरात और कर्नाटक चुनाव में महागठबंधन के बल पर चुनाव तो लड़ा, लेकिन कांग्रेस की स्थिति बहुत ही खराब रही। नवंबर मे होने वाले पांच राज्यों के चुनाव में जिस तरह से क्षेत्रीय पार्टियों ने कांग्रेस को ठेंगा दिखाना शुरु कर दिया है उससे कांग्रेस को अपनी नाव डूबती हुई नजर आ रही है। बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ को नामंजूर कर दिया है तो समाजवादी पार्टी भी अकेले ही चुनाव लड़ने का दम भर रही है। इस दुरुह स्थिति में फंसी कांग्रेस की स्थिति के बारे में पूर्व विदेशमंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा ‘‘हमारे सभी नेताओं ने साफ कर दिया है कि देश की सरकार को बदलने के लिए गठबंधन की जरूरत है। भाजपा को जाना होगा। गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए चाहे जिस त्याग, तालमेल और बातचीत की जरूरत हो, कांग्रेस वह करने के लिए तैयार है।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन अच्छा यही रहेगा कि अन्य  पार्टियों का भी रुख ऐसा ही हो। गठबंधन कांग्रेस को रोकने के लिए नहीं होना चाहिए, गठबंधन भाजपा को हटाने के लिए होना चाहिए और हम किसी भी चीज के लिए तैयार हैं।’’

कांग्रेस के भय का कारण
कांग्रेस के बुरे कर्म आज उसका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। देश में 80 और 90 के दशक के चुनावों से उत्पन्न हुई त्रिशंकु लोकसभा में कांग्रेस ने जिस तरह से क्षेत्रीय दलों के साथ मनमानी की थी आज वही मनमानी कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने में क्षेत्रीय दलों को रोक रही है। क्षेत्रीय दल जानते हैं कि कांग्रेस उनके बल पर मजबूत होते ही उनको समाप्त करने का काम करेगी। आज, कोई भी क्षेत्रीय दल कांग्रेस पर भरोसा नहीं कर रहा है। आज कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए गठबंधन करने के लिए सारे त्याग करने को तैयार है। कांग्रेस, क्षेत्रीय दलों का भरोसा जीतने के लिए यहां तक कह रही है कि वह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं बनाएगी। आम चुनावों को लेकर बयान देते हुए पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के  वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा  है कि “2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार के तौर पर घोषित नहीं करेगी, उन्‍होंने कहा कि राहुल ही नहीं कांग्रेस अन्‍य किसी भी व्‍यक्ति की दावेदारी की घोषणा नहीं करेगी।”  चिदंबरम ने ही जनवरी 2014 में दावोस के आर्थिक मंच से कहा था  ‘‘यदि कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाता है तो मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री होंगे।’’

कांग्रेस के लिए राहुल बने मजबूरी
कांग्रेस आज राहुल गांधी की बैशाखी पर खड़ी है लेकिन राहुल गांधी ने पिछले पांच सालों में ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे कांग्रेस, भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती दे सके। महागठबंधन बनाना कांग्रेस के वजूद के लिए मजबूरी बनती जा रही है और क्षेत्रीय दल कांग्रेस को 2019 में उसके पुराने कर्मों का दंड देने के मौके के रुप में देख रहे हैं। कांग्रेस के इस दर्द को सलमान खुर्शीद ने बयां किया  ‘‘यदि अकेले दम पर बहुमत पाना उद्देश्य है तो हमें पांच साल काम करना होगा। क्योंकि आप तीन साल तक गठबंधन की दिशा में काम करके अचानक यह नहीं कह सकते कि हम  जीतने के लिए चुनाव लड़ेंगे। आपको पांच साल लड़ना होगा। आज हम गठबंधन के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे कि गठबंधन सफल हो।’’ 

2019 चुनाव के लिए कांग्रेस की नकारात्मक सोच
कांग्रेस चुनाव को सत्ता का खेल मानती है, उसके लिए चुनाव जीतना ही एक मकसद होता है। इसके लिए कांग्रेस परिस्थिति के अनुसार धर्म और जाति का चोला ओढ़ कर चुनाव जीतने का काम करती चली आयी है, कभी मुस्लिम और सर्वणों को रिझाने वाली पार्टी आज हिन्दूओं को रिझाने का काम कर रही है। पार्टी के पास देश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के समाधान में कुछ नया देने के लिए नहीं है। कांग्रेस की सारी कवायद सिर्फ औऱ सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को हराने की है। पार्टी के नकारात्मक सोच को उजागर करते हुए  कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने कहा महागठबंधन का मकसद मोदी सरकार को मात देना है। यदि महागठबंधन में शामिल होने वाले दल इस मकसद को भूलेंगे तो निश्चित तौर पर यह नहीं बन पाएगा और यह हर पार्टी एवं देश का नुकसान होगा।’’

सत्ता के लिए कांग्रेस किसी भी अवसर पर समझौता करने में पीछे नहीं रहती है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को 2019 में चुनौती देने  में कांग्रेस की यही अवसरवादिता उसके पैरों में बंधे पत्थर की तरह से है जो लोकसभा के भंवर में उसे डूबो देगी। कांग्रेस के नेता इस सत्य को समझते हैं, जो आजकल त्याग और देशहित के नाम पर अपने को बचाने के बयान दे रहे हैं।

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