Home चार साल बेमिसाल वर्षांत विशेषः साकार होने लगा है कलकल-निर्मल गंगा का सपना

वर्षांत विशेषः साकार होने लगा है कलकल-निर्मल गंगा का सपना

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गंगा के पानी से वोट नहीं निकला करते, यही वजह है कि दशकों से मैली पतितपावनी गंगा की सफाई के लिए योजनाएं तो बनीं लेकिन सरकारों की प्राथमिकता में यह मुद्दा कभी नहीं रहा। मोदी सरकार ने कमान संभालते ही गंगा की सफाई के लिए न सिर्फ अलग मंत्रालय बनाया, बल्कि प्राथमिकता के आधार पर तेज गति से इस पर काम शुरू किया। अब ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट का असर दिखने लगा है। आइए, गंगा और जल संरक्षण को लेकर 2018 में सरकार की उपलब्धियों पर एक नजर डालते हैं।      

पुनि दरसन होए पुनमति गंगे…’नमामि गंगे’ का दिख रहा असर

भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रवाह की प्रतीक गंगा को साफ करने का सियासी वादा तो दशकों पुराना है, लेकिन यह मोदी सरकार ही है जिसने सत्ता संभालते ही गंगा सफाई के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन कर दिया। सिर्फ 2018 में ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत 254 परियोजनाओं के लिए 24,672 करोड़ रुपये की राशि तय की गई। इनमें 131 परियोजनाएं गंगा और यमुना नदी में प्रदूषण के स्तर को कम करने से जुड़ी हैं। 

STP प्लांट से प्यूरिफाई हो रहा नालों का गंदा पानी

गंगा में गंदगी का सबसे बड़ा कारण उसमें गिरने वाले नालों का गंदा पानी है। मोदी सरकार ने ऐसे नालों के पानी को प्यूरीफाई करने के लिए कई बड़े शहरों में गंगा के किनारे STP प्लांट लगाए हैं। कानपुर में एशिया के सबसे बड़े नाले सिसामऊ के साथ ही 15 दूसरे बड़े नालों के पानी को गंगा में जाने से रोका जा रहा है। अब पानी एसटीपी संयत्र में साफ कर गंगा में डाला जा रहा है। इससे 14 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में गिरना बंद हो गया। प्रयागराज में भी 27 करोड़ लीटर गंदा पानी को गंगा में गिरने से रोका जा रहा है। काशी में गंदे पानी के 23 नालों में से 20 को बंद कर दिया गया है। कानपुर, वाराणसी, हरिद्वार, उन्नाव, फरुखाबाद, प्रयागराज जैसी जगहों पर पानी की सफाई पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पहले के मुकाबले अब गंगा का पानी काफी साफ हो गया है।   

पक्के घाटों, श्मशान घाटों का निर्माण 

घाटों और श्मशान घाटों के बेहतर रख-रखाव के बिना गंगा को साफ करना मुश्किल होता। इसे ध्यान में रखकर सरकार गंगा के तटों के विकास के लिए 145 घाटों और 53 शमशान गृहों का निर्माण करा रही है। इस काम के मार्च 2019 तक पूरा हो जाने की संभावना है।

उद्योगों को प्रदूषण की छूट नहीं

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाले 961 उद्योगों की पहचान की गई। नवम्बर 2018 तक सर्वाधिक प्रदूषण करने वाले 961 उद्योगों में से, 795 इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर की ऑनलाइन निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया है। नियमों का पालन न करने वाली 209 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 10 इकाइयों को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। शीरा आधारित 32 शराब फैक्ट्रियों में शून्य तरल उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया गया।

‘नदी जोड़ो परियोजना’ का काम जारी

मोदी सरकार नदी जोड़ो परियोजना पर भी पूरा ध्यान दे रही है। इससे सिंचाई और बिजली की व्यवस्था में भी मदद मिल रही है। केन-बेतवा सम्पर्क परियोजना, दमनगंगा-पिंजाल सम्पर्क परियोजना और पार-ताप्ती-नर्मदा सम्पर्क परियोजना पर काम जारी है। चार अंतः राज्य सम्पर्क परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना पर भी काम हो रहा है। इनमें बिहार की बूढ़ी गंडक-नून-बाया-गंगा सम्पर्क, कोसी-मिचि सम्पर्क तथा तमिलनाडु की पोन्नाइयार-पालार सम्पर्क शामिल हैं। 

बांध से सिंचाई और बिजली की व्यवस्था

बांध से सिंचाई और बिजली उत्पादन को ध्यान में रखकर कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। शाहपुर कांडी बांध परियोजना के तहत पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सितंबर, 2018 में एक समझौता हुआ। इस परियोजना से पंजाब राज्य में 5000 हेक्टेयर और जम्मू-कश्मीर में 32173 हेक्येयर भूमि की सिंचाई में मदद मिलेगी। लखवार परियोजना से यमुना नदी के ऊपरी हिस्से पर काम किया जा रहा है। इस पर 3966.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे कई राज्यों के 33,780 हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई की व्यवस्था होगी। इस परियोजना से 300 मेगावाट बिजली भी पैदा होगी। बिहार और झारखंड की उत्तर कोएल जलाशय परियोजना पर भी फिर से काम शुरू हो चुका है।

हर खेत को पानी और बूंद-बूंद पानी के उपयोग का प्रयास

देश के हर खेत में सिंचाई की सुविधा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गई। राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर पहले से जारी 99 छोटी-बड़ी परियोजनाओं को नए सिरे से सक्रिय किया जा रहा है। इन योजनाओं पर 77,595 करोड़ की अनुमानित लागत से 7.03 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा पहुंचाई जा सकेगी। इन योजनाओं को दिसम्बर, 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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