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मोदी सरकार में रोजगार के आंकड़े पर जनसत्ता का ‘फरेब’ !

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मीडिया के एक खास तबके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना का चलन बन गया है। ये तबका मीडिया एथिक्स को भूल किसी भी स्तर पर जाकर ‘मोदी विरोध’ करता है। ऐसा लगता है कि कमजोर विपक्ष होने की कमी मीडिया का यही तबका दूर करना चाहता है। आज (26 जुलाई) जनसत्ता अखबार में सदीप सिंह और सुन्नी कुमार का संयुक्त आलेख ‘देश में बढ़ रही बेरोजगारों की फौज, हर 500 में से केवल तीन को मिल पा रहा रोजगार’ छपा है। बिना जमीनी हकीकत जाने पत्रकारिता कर रहे ऐसे पत्रकार कितने एक पक्षीय हैं इस बात की सच्चाई इस रिपोर्ट के जरिये आपके सामने है।

रोजगार कार्यालय के आंकड़ों पर ‘अटकलबाजी’
संदीप सिंह और सुन्नी कुमार ने रोजगार कार्यालयों के जरिये नौकरी दिये जाने की रिपोर्ट छापी है। इसमें यह दावा किया गया है कि पंजीकरण कराने वाले हर 500 में से केवल तीन लोगों को ही रोजगार मिल पाया। लेकिन रिपोर्ट में वे यह तथ्य जोड़ना भूल गए हैं कि आजकल ज्यादातर सरकारी नौकरियां रोजगार कार्यालयों के जरिये नहीं बल्कि कैंपस सेलेक्शन या फिर कम्पीटीटिव एग्जाम के जरिये मिलते हैं।

यूपीए सरकार का ठीकरा पीएम मोदी के सिर
इसके साथ ही जनसत्ता ने दावा किया है कि नेशनल करियर सर्विस के पोर्टल पर 2012 -2015 में पंजीकृत 14.85 लाख लोगों में से इनमें से महज 3 हजार लोगों को नौकरी मिली वह भी प्राइवेट। दरअसल ज्यादातर ऐसा होता है कि लोग रोजगार कार्यालयों के भरोसे ही नहीं रहते, वे अपनी कोशिशों से नौकरी पा जाते हैं। लेकिन रोजगार कार्यालयों से नाम नहीं कटवाते। ऐसे में इन आंकड़ों पर भरोसा करना बेमानी है। सबसे खास यह कि इस रिपोर्ट में यूपीए सरकार के ढाई साल के कार्यकाल का भी हिसाब-किताब भी मोदी सरकार के मत्थे मढ़ने की कोशिश की गई है।

NASSCOM ने खोली प्रोपेगेंडा की पोल
बीते मई को कई पत्र-पत्रिकाओं ने आईटी सेक्टर में रोजगार के अवसर घटने की बात कही थी। लेकिन NASSCOM ने उनके दावे को भी गलत साबित कर दिया। NASSCOM ने ये दावा करते हुए जानकारी दी है कि भारत में आईटी कंपनियों ने केवल पिछले साल 1.7 लाख नौकरियां दी हैं। आखिरी तिमाही में यानी 2017 के पहले तीन महीनों में ही 50 हजार लोगों को रोजगार मिला है।

IT सेक्टर में मिलेंगी अपार नौकरियां
NASSCOM ने दावा किया कि अगले दशक तक IT सेक्टर 20 से 25 लाख नौकरियों के अवसर बनाने जा रहा है। 2001 में जहां महज 4.3 लाख लोग IT सेक्टर से जुड़े थे, आज IT कंपनियों से जुड़े लोगों की तादाद बढ़कर 40 लाख हो गयी है। 2025 तक यह संख्या 60 से 65 लाख हो जाने का अनुमान है। दुनिया में IT सेक्टर के बुरे प्रदर्शन के बीच भारत में IT सेक्टर का शानदार प्रदर्शन रहा है।

8.19 करोड़ को मिला रोजगार
आंकड़े बताते हैं कि मुद्रा योजना के तहत 8.19 करोड़ लोगों ने ऋण लिया है। यदि कम से कम एक व्यक्ति के रोजगार मिलने का भी औसत मान लिया जाये तो 8.19 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। रोजगार पाने वालों की संख्या हर एक ईकाई में एक से अधिक ही होता है। लेकिन एक के औसत को ही मान लिया जाये तो 8.19 करोड़ लोगों के रोजगार मिलने की बात को नकारा नहीं जा सकता है।

6.2 करोड़ महिलाओं को मिला लाभ
08 अप्रैल 2015 को मुद्रा योजना का शुभांरभ किया। अब, सभी को इसका सीधा फायदा दिखाई दे रहा है। मोदी सरकार ने इस योजना के तहत लोगों को अभी तक 3,55,590 करोड़ रुपये का ऋण दिया है। इसमें से लगभग 50 प्रतिशत यानि 1,78,313 करोड़ रुपये 6.2 करोड़ महिलाओं को मिला है। यह कुल ऋण लेने वालों की संख्या का 78 प्रतिशत है। दो साल के अंदर, रोजगार के अवसर उपलब्ध होने का यह एक बड़ा आंकड़ा है।

मोदी सरकार का ‘एक्शन प्लान’
आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के मौके बनने की रफ्तार बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने तीन साल का एक एक्शन प्लान पेश किया है। इसमें विभिन्न सेक्टरों में रोजगार सृजित करने की बात की गई है। सीआईआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2012 से 2016 के बीच भारत में रोजगार के 1.46 करोड़ मौके बने थे यानि हर साल 36.5 लाख अवसर। कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में 8.41 करोड़ का इजाफा हुआ, लेकिन वास्तिक श्रम बल में बढ़ोतरी केवल 2.01 करोड़ रही। काम काजी उम्र वाली आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा श्रम बल में जुड़ा, जबकि 76 प्रतिशत हिस्सा इससे बाहर रहा।

गरीबी के जाल से मुक्ति के प्रयास
क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 लाख से ज्यादा लोग हर महीने देश के जॉब मार्केट में रोजगार तलाशने आते हैं। वहीं, मानव श्रम पर निर्भरता घटाने वाले ऑटोमेशन की वजह से स्थिति गंभीर होती जा रही है। सरकार ज्यादा रोजगार पैदा करना चाहती है ताकि आमदनी बढ़े और लाखों लोग गरीबी के जाल से बाहर निकलें। सरकार अपनी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की भी समीक्षा भी कर रही है ताकि उसे रोजगार निर्माण के उद्देश्य के मुताबिक बदला जा सके।

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