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वर्ल्ड बैंक ने जीएसटी को बताया बड़ा संरचनात्मक सुधार

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चैंजर कहा गया। इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार कहा गया। अब इस बात की तस्दीक विश्वबैंक की ताजा टिप्पणी ने कर दी है। जीएसटी को लेकर वर्ल्ड बैंक ने सकारात्मक टिप्पणी की है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि जीएसटी जैसे कर सुधार के परिणामस्वरूप भारत 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है।

क्यों है संरचनात्मक सुधार
जीएसटी भारत की कराधान नीति में संरचनात्मक बदलाव है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि जीएसटी का लागू होना एक संरचनात्मक बदलाव इसलिए है क्योंकि इसने पूरे देश को एक बाजार के रूप में बदलने का काम किया है। इस कर सुधार के बाद 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। देश में जीएसटी को लागू करना एक साहसिक निर्णय था। जीएसटी अगर कुशल तरीके से क्रियान्वित होता है, तो विकास की गति तेज होगी।

विपक्ष को मिला जवाब
वर्ल्ड बैंक का बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी किये जीडीपी दर में गिरावट के आंकडों के आधार पर जीएसटी और नोटबंदी की आलोचना करने में जुटा था और हर मंच पर यही राग अलाप रहा था कि देश विकास के मामले में पिछड़ रहा है, लेकिन वर्ल्ड बैंक के बयान से विपक्ष को करारा जवाब मिल गया है। देश की जीडीपी की वृद्धि दर अप्रैल-जून में 5.7 प्रतिशत, जनवरी-मार्च में 6.1 प्रतिशत और 2016-17 के दौरान 7.1 प्रतिशत रही थी। अब वर्ल्ड बैंक का मानना है यह निकट भविष्य में 8 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। 

परिवहन प्रणाली में भी बदलाव जरूरी
भारत के आर्थिक गलियारे को बदलने के लिए परिवहन प्रणाली में भी बदलाव करना जरूरी है। तभी जीएसटी का पूरा लाभ उठाया जा सकता है। जीएसटी के समुचित क्रियान्वयन से वस्तुओं के आतंरिक आवाजाही और विकास को काफी बल मिलेगा, लेकिन वृद्धि इस बात पर भी निर्भर होगी कि देश परिवहन तंत्र में किस से तरह निवेश करता है। यानी जीएसटी की सफलता-असफलता का काफी हद तक उसके क्रियान्वयन और परिवहन प्रणाली में निवेश पर निर्भर करती है। 

बाजारों का एकीकरण जोर
स्थानीय बाजारों के समुचित एकीकरण से देश इस मामले में ग्लोबल एकीकरण को भी पछाड़ सकता है। बंदरगाहों से जुड़ा आंतरिक एकीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था को नये आयाम दे सकता है। देश को प्रत्येक क्षेत्र में प्रोफेशनल सर्विस सिस्टम की आवश्यकता है। परिवहन, बिजली, पानी, रेलवे जैसे क्षेत्रों में हाई प्रोफेशनल सर्विस सिस्टम को अपनाने का कोई अन्य विकल्प नहीं है।

जीएसटीआईएन पर पंजीकरण
जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक व्यापारी को जीएसटीएन (वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क) पर अपना पंजीकरण करवाकर जीएसटीआईएन (पंजीकरण संख्या) प्राप्त करना आवश्यक है। इस कर प्रणाली में प्रत्येक व्यापार को मासिक या तिमाही विवरण प्रस्तुत करने होते हैं। इससे छोटी कंपनियां भी कर के दायरे में आ गयी हैं। एक आकलन के अनुसार जीएसटी लागू करने के बाद से आयकर भरने वालों की संख्या में 24.7 प्रतिशत बढ़ी है।

सरल भुगतान प्रणाली
जीएसटीएन प्लेटफॉर्म से भुगतान की प्रक्रिया भी सरल हो गई है। इससे लागत कम और अंतर्राज्यीय आवागमन सरल हो गया है, चेकपोस्ट पर लगने वाली वाहनों की लाइनें लगभग समाप्त हो गई हैं। निर्यात प्रतिस्पर्धा में भी वृद्धि के अलावा पूरी व्यापार प्रक्रिया और कर प्रणाली सरल, सहज और पारदर्शी हो गई है।स्पष्ट है कि जीएसटी से हमारी शिथिल अर्थव्यवस्था में नई गति आयेगी। 

डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
जीएसटी के अंतर्गत 1200 से अधिक वस्तुओं और 500 से ज्यादा सेवाओं पर लगने वाले टैक्स दर तय हो चुकी है। जीएसटी में जरूरी वस्तुओं की कर दरों में कमी लायी गई है। जीएसटी से एकल बाजार का सृजन हुआ है और डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला। डिजिटल लेनदेन में बढ़ने से व्यापार और कर प्रणाली में पारदर्शिता आई है।

प्रणालियों में सुधार
अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने पिछले 3 वर्षों में कई बड़े सुधार किये हैं। इन सुधारों में जीएसटी, नोटबंदी, एफडीआई की सीमा को बढ़ाना, डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना शामिल है। जिनका लक्ष्य भविष्य पर नजर रखते हुए देश की वर्तमान प्रणालियों में सुधार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था पर इसके नतीजे निकट भविष्य में दिखाई देंगे। सरकार के दूरदर्शी दृष्टिकोण से जन कल्याणकारी नीतियों और साहसिक निर्णयों से अर्थव्यवस्था विकास के पथ पर अग्रसर है।

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