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दिल्ली के लिए वरदान साबित हुआ ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे, 30 प्रतिशत ट्रक घटे, प्रदूषण हुआ कम

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अभी दिल्ली के बाहरी इलाके में बने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे को शुरू हुए एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है और इसका सकारात्मक असर दिखना शुरु हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक बाहरी राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या में 30 प्रतिशत की कमी आई है। दिल्ली में ट्रकों की आवाजाही कम होने से प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 मई को उत्तर प्रदेश और हरियाणा को दिल्ली के बाहर से जोड़ने वाले 6 लेन के इस एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था। इस एक्सप्रेस वे को बनाने का मकसद ही यही था कि दिल्ली में बाहर के राज्यों के ट्रकों की आवाजाही बंद हो, जिससे प्रदूषण में कमी आए।

सौजन्य

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक अभी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एंट्री प्वाइंट्स पर ट्रक चालकों को इस एक्सप्रेस वे के बारे में बताने की जरूरत है। यदि पुलिस और परिवहन विभाग के लोग ऐसा करते हैं तो दिल्ली से होकर बाहरी राज्यों में जाने वाले ट्रकों को पूरी तरह से दिल्ली में प्रवेश से रोका जा सकता है। प्रदूषण नियंत्र बोर्ड की टीमों ने कुंडली और पलवल के एंट्री प्वाइंट्स से दो दिनों में ट्रकों की आने-जाने की संख्या भी रिकॉर्ड की है और इसी के अध्ययन से पता चला है कि दिल्ली से होकर गुजरने वाले ट्रकों की संख्या में कमी आई है।

मोदी सरकार के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से दिल्ली को मिली कई सौगातें
दिल्ली की प्रदूषित आबो हवा से हर साल लगभग तीस हजार लोगों की जान चली जाती है, ये आंकड़ें 2016 में सीएसई द्वारा किए गये एक अध्ययन में सामने आए। सड़कों पर काम करने वाले, रेहड़ी लगाने वाले, आटो व रिक्शा चलाने वाले और सड़कों के किनारे रहने वाले गरीब लोगों को इस प्रदूषण की सबसे अधिक मार झेलनी पड़ती है, क्योंकि इन्हीं का अधिकांश समय दिल्ली के खुले वातावरण में बीतता है, जो जहरीला है। दिल्ली में वायु को प्रदूषित करने के सबसे बड़े दोषी सड़कों पर दौड़ती पेट्रोल व डीजल की गाडियां हैं और दिल्ली से प्रतिदिन गुजरने वाले लगभग तीन लाख ट्रक हैं। पंजाब और हरियाण के खेतों में जलाई जाने वाली पराली और मकानों के निर्माण से भी दिल्ली की हवा खराब होती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हवा के जहर को कम करने के लिए ऑड ईवन का तरीका निकाला, जिससे सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या को कम किया जा सके, लेकिन यह तरीका भी हवा को स्वच्छ रखने में कारगर साबित नहीं हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक ही कदम से दिल्ली की हवा को जहरीला होने और सड़कों को जाम से मुक्त रहने की सौगात दे दी।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से प्रदूषण हुआ कम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 मई को उत्तर प्रदेश और हरियाणा को दिल्ली के बाहर से जोड़ने वाले 6 लेन के राजमार्ग का उद्घाटन किया। इसी दिन दिल्ली में प्रवेश करने वाले एक तिहाई यानि 50,000 ट्रकों को ट्रैफिक पुलिस ने एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए मजबूर कर दिया। ट्रैफिक पुलिस को उम्मीद है कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले लगभग 1,50,000 से 2,00,000 ट्रक जल्द ही इस एक्सप्रेस वे से जाने लगेंगे। सीएसई का अध्ययन बताता है कि एक्सप्रेस वे से दिल्ली की हवा में 2.5 मिमी आकार के धूल के कणों में 30 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे दिल्ली की हवा स्वच्छ होगी और उन गरीबों के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होगा, जो सड़कों पर काम धंधा या जीवन बसर करते हैं।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से दिल्ली के ट्रैफिक जाम में कमी
हर रोज दिल्ली की सड़कों पर 1,50,000-2,00,000  गुजरने वाले ट्रकों और सड़कों पर एक करोड़ से भी अधिक रजिस्टर्ड वाहनों के चलने से भयावह जाम की स्थिति बनी रहती है। इस स्थिति में वाहनों की गति 5 किमी प्रति घंटे तक हो जाती है, ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये का अप्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने 11 हजार करोड़ रुपये में इसका निर्माण करके, देश की आर्थिक प्रगति को तेज ही नहीं कर दिया बल्कि लाखों करोड़ के नुकसान से भी बचा दिया।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से रोजगार बढ़ा
उत्तर प्रदेश से हरियाणा को दिल्ली के बाहर ही बाहर जोड़ने वाले इस 135 किमी लंबे एक्सप्रेस वे के आस पास सैकड़ों गांवों में युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर उपलब्ध हुए हैं। इन गांवों में बाजार, और रिहायशी मकानों के बनने का सिलसिला तेज हुुआ है। विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं, जिससे हजारों युवकों को रोजगार के साथ साथ स्वरोजगार के अवसर मिलने लगे हैं।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे रिकार्ड समय में तैयार हुआ
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के बारे में यूपीए सरकार ने 2006 में ही परियोजना बनायी थी और इसको लेकर अपने बजट में प्रस्ताव भी किया था, लेकिन कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2006 से 2014 तक, आठ सालों में एक भी ईंट इधर से उधर नहीं कर सके। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2015 में इसकी आधारशिला ही नहीं रखी बल्कि 27 मई 2018 को इसका उदघाटन कर दिया। 910 दिनों में पूर्ण किए जाने वाले इस काम को प्रधानमंत्री मोदी ने 500 दिनों के रिकार्ड समय में पूरा करवा दिया।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे कांग्रेस की यूपीए सरकार नहीं बनवा सकी
एक्सप्रेस वे को 2008 तक बनकर तैयार हो जाना चाहिए था, लेकिन राहुल गांधी की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के पास काम करने और करवाने का तरीका ही नहीं था। कागजों पर ईस्टर्न एक्सप्रेस वे को 2006 में कागज पर तैयार कर लेने के आठ साल बाद तक कांग्रेस कुछ नहीं कर सकी और दिल्ली की हवा को जहरीला होने दिया। कांग्रेस के काम करने में लापारवाही और टाल मटोल करने के कारण पिछले दस सालों से दिल्ली में हर साल प्रदूषण से 30,000 लोग मर रहे हैं।

कांग्रेस ने अपनी कार्यसंस्कृति से देश के हर क्षेत्र में विपदा की स्थिति पैदा कर दी । किसानों की स्थिति से लेकर सीमा की सुरक्षा तक में निर्णय लेने में राजनीतिक भय और टालने के मानसिक रोग से ग्रसित कांग्रेस ने देश में विकास को भयावह और दुरुह बना दिया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सरल और समय पर पूर्ण होने वाला बना दिया है।

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