Home समाचार आतंक पर प्रहार : कश्मीर में छह महीने में 43 घुसपैठिये ढेर

आतंक पर प्रहार : कश्मीर में छह महीने में 43 घुसपैठिये ढेर

LoC और कश्मीर में मोदी सरकार के सख्त एक्शन पर रिपोर्ट

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एक तरफ कश्मीर में शांति बहाली की प्रक्रिया तेज है तो दूसरी तरफ आतंकवाद पर मोदी सरकार की सख्ती का असर साफ दिख रहा है। शुक्रवार को उरी सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे पांच पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया। दरअसल घाटी में बर्फ पिघलने के साथ ही घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आई है, लेकिन भारतीय सेना के जवानों की सतर्कता से आतंकी मंसूबे नाकाम होते जा रहे हैं।

मोदी सरकार की कश्मीर नीति का नतीजा अब सामने आ रहा है। आतंक को मुंहतोड़ जवाब देने और अलगाववादियों से बात नहीं करने की नीति के साथ कश्मीर में जल्दी ही अमन लौटने की उम्मीद की जा रही है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर पत्थरबाजों को मिल रही फंडिंग के स्रोत पर भी कार्रवाई, कश्मीर में हर स्तर पर एक्शन जारी है।

तीन दिन में 12 घुसपैठिये ढेर
शुक्रवार को घुसपैठ की एक ऐसी ही कोशिश में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। पहले सुरक्षा बलों ने आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मार गिराए लेकिन शाम होते-होते तीन और आतंकवादी भारतीय सेना के जवानों की गोली का निशाना बन गए। शुक्रवार को आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में खबर लिखे जाने तक 5 आतंकी मारे जा चुके थे।
पिछले तीन दिनों में घुसपैठ की कोशिश करते हुए कुल 12 आतंकी मारे गए हैं। उरी और नौगाम सेक्टर में सेना ने घुसपैठ की एक से ज्यादा कोशिशें नाकाम की है। इस दौरान हुई मुठभेड़ में अब तक 7 आतंकियों को मार गिराया गया है। इसे लेकर सेना ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि घाटी में अलग-अलग घुसपैठ की कोशिशें हुईं हैं जिन्हें रोकते हुए अब तक सात आतंकियों को मार गिराया गया है।

2016 में आतंकी हमले में 18 जवान हुए थे शहीद
सेना ने अपनी कार्रवाई को जहां अंजाम दिया है वो उरी सेक्टर है। आपको याद होगा कि 18 सितम्बर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था। इस आतंकी हमले में हमारे 18 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि सैन्य बलों की कार्रवाई में सभी चार आतंकी मारे गए थे, लेकिन सेना को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था।

2017 में मारे गए 43 घुसपैठिये
आर्मी के अनुसार इस साल एलओसी पर 24 से ज्यादा बार घुसपैठ की कोशिश की गई। इस दौरान कुल 43 हथियारबंद घुसपैठिये मारे गए। कश्मीर में एलओसी पर पिछले तीन दिनों में घुसपैठ की पांच बड़ी कोशिशों को नाकामयाब किए जाने के बाद कुपवाड़ा, नौगाम, माछिल और बारामूला जिले के घने जंगलों में सिक्यूरिटी फोर्सेस ने सर्च ऑपरेशनों में तेजी ला दी है।

आतंक के पस्त होने तक जारी रहेगा ‘एक्शन’
मई 2017 में पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान आर्मी की बॉर्डर एक्शन टीम ने हमारे दो शहीदों के शवों के साथ बर्बरता की थी। इसके बाद सेना ने पाकिस्तान की कई पोस्ट्स तबाह कर दी थीं। सेना ने इसका वीडियो भी जारी किया था। भारतीय सेना का जवाब इतना करारा था कि पिछले दिनों पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हमारे डीजीएमओ को फोन कर बॉर्डर पर अमन बहाली की अपील की थी। लेकिन भारत के डीजीएमओ जनरल भट्ट ने अपने काउंटर से साफ कह दिया था कि जब तक बॉर्डर पर फायरिंग और घुसपैठ की साजिशें जारी रहेंगी, भारतीय सेना उनका माकूल जवाब देना भी जारी रखेगी।

नौगाम में पाकिस्तानी डिफेंस का मिला सामान
गुरुवार को नौगाम में घुसपैठ कर रहे तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। इन आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। लेकिन सबसे खास ये कि इनके पास से दवाइयां और दूसरे कुछ सामान मिले हैं, जिनके पाकिस्तान में बने होने के सबूत मिले हैं। आतंकियों के पास जो दवाइयां और सामान मिला है, उसमें साफतौर पर पाकिस्‍तान डिफेंस फोर्सेज लिखा है।

बॉर्डर पर सेना को मिली खुली छूट
भारतीय सेना ने कुछ दिन पहले ही जानकारी दी कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ में मददगार नौगाम और नौशेरा में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को ध्वस्त कर दिया गया। पहली बार सेना ने कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया। जाहिर है ये भारत की सैन्य कूटनीति के बदलाव की कहानी कहती है। पिछले साल सर्जिकल स्ट्राइक का खुला एलान और अब पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त करने का वीडियो जारी कर भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की चोरी छिपे युद्ध वाली नीति अब नहीं चलने वाली।

पत्थरबाजों पर नकेल कसने की छूट
कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी की साजिश की सच्चाई दुनिया के सामने पहले ही आ चुकी है। ये साफ है कि पत्थरबाजों को अलगावादी नेताओं द्वारा फंडिंग की जाती है और बेरोजगार नौजवानों को गुमराह कर पत्थरबाजी करवाई जाती है। पाकिस्तान इसके लिए बाकायदा फंडिंग भी करता है। लेकिन अब अलगाववादियों पर एक्शन के साथ पत्थरबाजों के खिलाफ एक्शन की भी छूट है। पत्थरबाज को जीप के बोनट पर बांधने वाले मेजर गोगोई को सम्मान देने जैसे कदम मोदी सरकार की नीति को साफ बता रहे हैं।

15 साल बाद कश्मीर में ‘कासो’ अभियान
कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को घेरने के लिए फिर से कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन यानी ‘कासो’ अभियान शुरू किया गया है। 15 साल बाद शुरू किए गए इस ऑपरेशन के तहत शोपियां, त्राल समेत आतंकवादियों की सक्रियता वाले इलाकों की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। कुलगाम के जंगलों में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर सेना ने साफ कर दिया है कि अब आतंकवाद को टिकने नहीं दिया जाएगा।

आतंकियों के खिलाफ एक्शन में गोलियों की गिनती नहीं
मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि आतंक को चाहे देश के भीतर से समर्थन हो या फिर बाहर से, सख्त एक्शन होते रहेंगे। बीते एक महीने में एक के बाद एक 20 से अधिक आतंकियों को मारा जा चुका है। इतना ही नहीं पाकिस्तान की हिंसात्मक कार्रवाई का जवाब भी भारत की तरफ से उसी अंदाज में दिया जा रहा है। सेना को इस नीति पर चलने की छूट दी गई है कि देश के दुश्मनों को मारने के समय वो गोलियों की चिंता न करें। 

अब अलगाववादियों की भी खैर नहीं
पाकिस्तान की फंडिंग से घाटी में पत्थरबाजी कराने की अलगाववादियों की रणनीति का एक निजी चैनल पर खुलासा होने के बाद कई अलगाववादी नेता एनआईए की जांच के दायरे में आ गए हैं। एनआईए अलगाववादियों से पूछताछ कर रही है। उनके कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं, हवाला के खुलासे किए जा रहे हैं।

अलगाववादियों से बात नहीं की नीति
मोदी सरकार ने पहले साल ही साफ कर दिया था कि देश विरोधी तत्वों से वो कोई बात नहीं करेगी। ये संदेश कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के लिए भी था। पाकिस्तानी उच्चायुक्त के डिनर में अलगाववादी नेताओं को न्योता देने के मामले पर भी मोदी सरकार ने साफ विरोध जता कर पाकिस्तान को कश्मीर मामले से दूर रहने के लिए आगाह कर दिया था। पाकिस्तान परस्तों को साफ संदेश है कि पहले मुख्यधारा में शामिल हों, फिर अपनी बात रखें, क्योंकि अब उनकी हेकड़ी के दिन लद चुके हैं। उन्हें भारतीय संविधान के दायरे में रहकर ही कोई भी मांग सरकार के सामने रखनी पड़ेगी, अन्यथा कानून के दायरे में ही अंजाम भुगतने को भी तैयार रहें।

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