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#5YearChallenge : देखिए! पीएम मोदी ने पांच साल में देश को कैसे बदल दिया

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26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन हालातों में शपथ लिया था, वे हालात पांच साल में पूरी तरह बदल चुके हैं। पांच साल के अंतराल पर आज हम उस दौर को मुड़ कर पीछे देखते हैं, तो मन में एक सिहरन पैदा हो जाती है। 2004 से 2014 तक के वे दस साल कितना नकारात्मक और आत्मविश्वास तोड़ने वाला था, इसका अनुभव तब की अखबारों की हेडलाइन से कर सकते हैं।

आज आपको 2014 के अखबारों की कुछ हेडलाइन को 2019 की हेडलाइन्स के साथ दिखाते हैं। आप खुद ही अंदाजा लगा लेंगे कि प्रधानमंत्री मोदी के पांच सालों में हम कहां से कहां पहुंच चुके हैं।

आर्थिक स्थिति 
2014 में देश विश्व की 5 सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में एक था। लेकिन, 2019 में भारत, विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है।

सकल घरेलू उत्पाद की दर
2012-13 में देश का सकल घरेलू उत्पाद पिछले एक दशक का सबसे कम 5 प्रतिशत था। जबकि, 2018-19 में यह 7.1 प्रतिशत है।

रोजगार
2014 में बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ रही थी, जिससे ग्रामीण महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित थीं। वहीं 2018 के आठ महीने में संगठित क्षेत्र में ही 44 लाख नौकरियों का सृजन हुआ।

विदेशी पूंजी निवेश
2012-13 में विदेशी पूंजी निवेश मात्र 22.4 बिलियन डालर था। जबकि, 2018 में विदेशी पूंजी निवेश 20 साल में सबसे अधिक रहा और चीन भी इस मामले में हमसे पिछड़ गया।

ढांचागत निर्माण की स्थिति
2014 में ढांचागत निर्माण पूरी तरह से रुक चुके थे। जबकि, 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने ढांचागत निर्माण को तेजी से बढ़ाया है।

औद्योगिक उत्पादन
2012-13 में औद्योगिक उत्पादन बीस साल के सबसे निचले स्तर यानि 1 प्रतिशत तक पहुंच गया था। जबकि, 2018 में औद्योगिक उत्पादन 8.1 प्रतिशत रहा।

मातृत्व मृत्यु दर
यूपीए के शासन काल में मातृत्व मृत्यु दर सबसे अधिक थी। जबकि, 2018 में 77 प्रतिशत तक की कमी आई।

गंगा सफाई की स्थिति
गंगा सफाई की स्थिति 2014 और 2019 के अखबारों की हेडलाइन ही बता देती है। 



माओवादी आतंक की स्थिति
2014 में माओवादियों ने सरकार के नाक में दम कर रखा था। लेकिन, 2018 में सरकार ने माओवादियों के नाक में दम कर दिया और  44 जिलों से उनका पूरी तरह से सफाया कर दिया।

बिजली के उपलब्धता
2012 में पूरा उत्तर भारत ग्रिड फेल होने से अंधेरे में डूब गया था। 2018 में लगभग हर घर और हर गांव में बिजली पहुंच गई।

देश में शौचालयों की संख्या
यूपीए सरकार के दौरान 6 करोड़ शौचालयों की कमी थी। लेकिन 2019 तक यह स्थिति बदल गई, शौचालयों की पहुंच 94 प्रतिशत तक हो गई है।


महंगाई की स्थिति
2011 में महंगाई 9 प्रतिशत से भी अधिक थी। जबकि, जनवरी 2019 में महंगाई सबसे कम 2.19 प्रतिशत तक आ चुकी है।
देश में व्यापार करने का माहौल
यूपीए के शासन में व्यापार करने का माहौल बहुत ही खराब था। जबकि 2018 में ईज ऑफ डूंइिग बिजनेस इंडेक्स में 77 अंको के उछाल के साथ बेहतर स्थिति हुई।

बैंकों में आमलोगों के खातों की संख्या
2013 में आधे से अधिक भारतीयों के पास बैंक खाता नहीं था। जबकि, 2016 में ही 99 प्रतिशत भारतीयों के पास बैंक में खाता हो चुका था।


पाइप से घर तक गैस पहुंचाने की स्थिति
2011 में पाइप से गैस घरों तक पहुंचना एक सपना था। जबकि, 2018 में पाइप से गैस कई शहरों में पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति
2012 में विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कम होते हुए निचले स्तर पर पहुंच गया था। जबकि, पिछले चार साल में इस भंडार में 100 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई।

देश एक कर व्यवस्था-GST के लागू होने की स्थिति
2012 में यह सवाल उठ रहा था कि क्या देश में GST लागू हो पाएगा? जबकि, 2018 में GST लागू ही नहीं हुआ, बल्कि 1 लाख करोड़ का जीएसटी भी मिल गया।

देश में गरीबी की स्थिति
2012 में देश में गरीबी की स्थिति पाकिस्तान से भी खराब थी। जबकि 2018 में हर मिनट 44 भारतीय गरीबी रेखा से ऊपर आ रहे थे।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति
यूपीए सरकार के दौरान Twitter पर पाबंदी लगा दी गई थी, जबकि पिछले चार साल में आम लोगों को अभिव्यक्ति के कई अवसर मिले हैं।

सरकारी बालिका विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति
यूपीए शासनकाल में शौचालयों की कमी से बालिकाएं स्कूल छोड़ रहीं थी, जबकि पिछले चार वर्षों में सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय बन चुके हैं।

महिला सशक्तीकरण की स्थिति
यूपीए के शासनकाल में बिना किसी जमानत के महिलाओं को बैंकों से ऋण नहीं मिलता था, लेकिन आज मुद्रा योजना में 79 प्रतिशत लाभ महिलाओं को मिला है।

नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करना
यूपीए सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गुप्त फाइलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थी, लेकिन मोदी सरकार ने इन सभी फाइलों को सबके लिए उपलब्ध करा दिया है।

देश के सबसे लंबे पुल-बोगीबिल के निर्माण की स्थिति
यूपीए के शासनकाल में असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे लंबा पुल कब बनेगा इसका कोई अता-पता नहीं था, लेकिन मोदी सरकार ने 2018 में इस पुल का उद्घाटन भी कर दिया।

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