Home विचार ‘मॉब लिंचिंग’ के बहाने मुस्लिम वोट बैंक की सियासत कर रही कांग्रेस

‘मॉब लिंचिंग’ के बहाने मुस्लिम वोट बैंक की सियासत कर रही कांग्रेस

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पिछले एक साल में वॉट्सऐप पर फर्जी मैसेज की वजह से 29 लोगों की हत्याएं हुई हैं। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनाओं पर काबू पाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि कांग्रेस इन घटनाओं में भी राजनीति देख रही है। पार्टी के नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि पीएम मोदी को इन घटनाओं को रोकने के लिए आवाज उठानी चाहिए। जाहिर है यह कांग्रेस की हताशा ही है कि वह हर घटना को राजनीतिक एंगल देने की कोशिश करती है।

दरअसल कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सामना करने में समर्थ नहीं हो पा रहा है। इसी झल्लाहट में अनाप-शनाप आरोप और निगेटिव प्रोपेगेंडा का दौर चल पड़ा है। हालांकि समय के साथ इन सियासतदानों के चेहरे का ‘मुखौटा’ भी हटता रहा है।

केरल और पश्चिम बंगाल में होती है सबसे अधिक मॉब लिंचिंग
आंकड़ों पर नजर डालें तो मॉब लिंचिंग के मामलों में केरल और पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर हैं। केरल में वामपंथी गठबंधन की सरकार है। उससे पहले कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ की सरकार थी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। वर्ष 2014 में केरल और कर्नाटक में देश में सबसे अधिक 65 और 46 घटनाएं हुईं थी। इसी तरह वर्ष 2016 में समाजवादी सरकार के उत्तर प्रदेश में 116 लोगों को भीड़ ने मार डाला था। पश्चिम बंगाल में 53 और  केरल में 50 लोगों को इसी हत्यारी भीड़ ने मार डाला था, लेकिन तब कांग्रेस और तथाकथित सेक्यूलरवादियों की जुबानों पर ताले लगे रहे।  

मॉब लिंचिंग को मजहबी रंग देती रही है कांग्रेस
यूपी के दादरी में वर्ष 2015 में गोमांस रखने के आरोप में भीड़ ने अखलाक की हत्या कर दी। वर्ष 2017 में वल्लभगढ़ में सीट के झगड़े में कुछ लोगों ने जुनैद नाम के एक युवक की हत्या कर दी। इसी तरह 2017 में राजस्थान के अलवर में पहलू खां नाम के व्यक्ति को गोवध के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया। हालांकि यह स्थानीय कानून व्यवस्था का मामला था, लेकिन कांग्रेस ने इन तीनों ही घटनाओं को मजहबी रंग दे दिया। कांग्रेस और सेक्यूलर मीडिया ने मोदी सरकार के विरुद्ध असहिष्णुता कैंपैन, अवार्ड वापसी अभियान और ब्लैक ईद जैसे कार्यक्रम तक कर डाले थे।

अयूब पंडित और कार्तिक की मॉब लिंचिंग पर खामोश रही कांग्रेस
जुलाई 2017 में फेसबुक पर एक पोस्ट डालने के कारण पश्चिम बंगाल के बशीरहाट थाना क्षेत्र में हिंसा हुई। इसमें मुसलमानों की उन्मादी भीड़ ने कार्तिक घोष को पीट-पीट कर मार डाला। जून, 2017 में ही कश्मीर के श्रीनगर में डीएसपी अयूब पंडित को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। निर्वस्त्र कर उनकी मौत के बाद भी उन पर पत्थर फेंके जाते रहे। ऐसी क्रूर भीड़ थी जिसने अयूब पंडित के शव तक को नाली में फेंक दिया। लेकिन कांग्रेस समेत हमारे ‘सेक्यूलर’ पंडितों को ये ‘आजादी’ की मांग लगी थी। तब धर्मनिरपेक्षता के किसी लंबरदार की जुबान तक नहीं खुली थी।

हिंसा की निंदा करते रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
15 अगस्त, 2017
“आस्था के नाम पर हिंसा प्रसन्न होने की बात नहीं है. भारत में यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत शांति, एकता और सौहार्द का देश है। जातिवाद और सांप्रदायिकता से हमें कुछ लाभ नहीं होगा।”

27 अगस्त, 2017
”कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी, चाहे वो व्यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी।”

08 अक्टूबर, 2015
”हिंदुओं और मुसलमानों का आपस में लड़ने से देश का भला नहीं होगा। हमारे देश का भला तब होगा जब हिंदू और मुसलमान एक होकर गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ें। हम गरीबी को परास्त करें।”

9 अगस्त, 2016
”हिंसा का रास्ता, इस देश में कभी भी चल नहीं सकता, यह देश कभी स्वीकार नहीं कर सकता है। इसलिए, मैं देशवासियों से आग्रह करूंगा, उस समय ‘भारत छोड़ो’ का नारा था, आज नारा है ‘भारत जोड़ो’।”

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