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संविधान दिवस विशेष: भारतीय संविधान से खिलवाड़ को कांग्रेस समझती रही है अपना मौलिक अधिकार

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महाराष्ट्र में चुनावपूर्व गठबंधन बनाकर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने बहुमत हासिल किया। लेकिन पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार शिवसेना ने अपनी महत्वाकांक्षा में जनमत का अपमान करते हुए लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने का काम किया। एक मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने के लिए वह उस कांग्रेस और उसी कांग्रेस से जन्मी एनसीपी की गोद में जाकर बैठ गई, जो देश के संविधान से खिलवाड़ को अपना मौलिक अधिकार समझती रही हैं। कांग्रेस ने तो पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जमाने से ही संविधान का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया था, जो आज तक रुका नहीं है। आइए, संविधान दिवस पर देखते हैं ऐसे पांच उदाहरण, जिनसे पता चलता है कि कैसे कांग्रेस हमेशा देश के पवित्र संविधान को ताक पर रखती रही है।

1. 31 जुलाई, 1959 को तत्कालीन नेहरू सरकार ने संविधान की मर्यादाओं को छिन्न-भिन्न करते हुए निर्दलियों के सहयोग से केरल में बनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। उन्हें इतनी जल्दी थी कि उन्होंने राज्यपाल की रिपोर्ट के एयर सर्विस से दिल्ली आने तक का भी इंतजार नहीं किया। टेलिफोन पर ही रिपोर्ट लिखवाकर, उसी के आधार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगवा दिया।     

2. नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी तो प्रधानमंत्री रहते हुए संविधान के साथ ऐसी मनमानी करती रहीं कि एक समय इसे ‘Constitution of India’ की जगह ‘Constitution of Indira’ कहा जाने लगा था। 25 और 26 जून, 1975 की मध्यरात्रि को देश पर आपातकाल थोपकर इंदिरा गांधी ने देशवासियों को किस दहशत के साये में जीने को मजबूर किया था, यह हमेशा भारतीय इतिहास के काले पन्ने में दर्ज रहेगा।

3. जेपी मूवमेंट से इंदिरा की सत्ता पहले ही खतरे में आ चुकी थी, ऊपर से 12 जून 1975 को उनके चुनाव को गलत बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे रद्द कर दिया। इसके महज 13 दिन बाद ही उन्होंने न सिर्फ आपातकाल थोपा, बल्कि संविधान में ऐसे संशोधनों का दौर शुरू कर दिया, जो लोकतंत्र की आत्मा पर लगातार चोट कर रहा था। 38वें संशोधन के साथ न्यायपालिका से आपातकाल की समीक्षा का अधिकार छीन लिया था, तो 39वां संशोधन पीएम की अपनी कुर्सी बचाने के लिए कराया।

4. संविधान, जो लोकतंत्र की आत्मा है, इंदिरा गांधी उसे कुचलने पर आमादा हो चली थीं। उन्होंने 41वें संशोधन के साथ कई नए प्रावधान कराए ही, 42वें संशोधन से उन्होंने देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार छीनने तक का कदम उठा लिया। यह एक ऐसा संशोधन था, जिसने हमारी न्यायपालिका की भूमिका तक को सीमित करने का काम किया था। हम सब जानते हैं नागरिक के रूप में हमारे अधिकारों की रक्षा हमारी न्यायपालिका की प्रमुख जिम्मेदारी है। ये आपातकाल के बाद आई जनता पार्टी की सरकार थी, जिसने इंदिरा के मनमाने प्रावधानों को रद्द कर संविधान की गरिमा को बचाए रखने का फर्ज निभाया।

5. बीजेपी और एनडीए की सरकार ने किसी राज्य में उसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया है, जो संविधान और लोकतंत्र के मानदंडों के अनुरूप हो। पिछले दिनों महाराष्ट्र में भी इसे तब लगाया गया, जब किसी भी दल या गठबंधन ने तय समयसीमा तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया था। वहीं हम सब देख चुके हैं कि क्यों कांग्रेसी शासन मनमाने तरीके से राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए भी कुख्यात रहा है। आंकड़े बताते हैं कि आजादी के बाद अलग-अलग राज्यों में अब तक कुल 121 बार राष्ट्रपति शासन लगाए गए हैं, जिनमें से करीब सौ बार कांग्रेस या उसके सहयोग से बनी सरकारों के दौरान लगे हैं। इमरजेंसी वाली इंदिरा इस मामले में भी सबसे आगे रही थीं, जिनके शासनकाल के दौरान कुल 49 बार राष्ट्रपति शासन लगाए गए थे।

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