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मोदी सरकार ने 5300 विस्थापित कश्मीरी परिवारों को दिया दिवाली तोहफा, मिलेंगे 5.5 लाख रुपए

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नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से विस्थापित होकर भारत के कई राज्यों में बसे 5300 कश्मीरी परिवारों को दिवाली का तोहफा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इन परिवारों को साढ़े 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी है,ताकि ये कश्मीर में बस सकें।

इन 5300 परिवारों का नाम शुरुआत में विस्थापितों की लिस्ट में शामिल नहीं था, लेकिन अब सरकार ने फैसला लिया है कि इनका नाम लिस्ट में भी शामिल किया जाएगा और आर्थिक सहायता दी जाएगी।

2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PoK से आए इन लोगों के लिए 5.5 लाख रुपये देने का ऐलान किया था, लेकिन तब इन 5300 परिवारों को लाभ नहीं मिल पाया था, जो अब केंद्रीय कैबिनेट ने इन परिवारों को भी ये सहायता राशि देनी की मंजूरी दे दी है। 

कौन हैं ये परिवार?

5300 परिवार वो हैं जो बंटवारे के बाद या कश्मीर के विलय के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को छोड़कर हिंदुस्तान आ गए थे, लेकिन तब ये कश्मीर में ना रुककर देश के अन्य हिस्सों में बस गए थे, हालांकि बाद में ये दोबारा जम्मू-कश्मीर में जा बसे, यही कारण रहा था कि इनके पास कोई अधिकार नहीं था और कोई सरकारी लाभ इन्हें नहीं मिल सका।

मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर में पहले वही नागरिक वोट दे सकते थे या फिर चुनाव लड़ सकते थे, जो वहां के मूल नागरिक थे, यानी बंटवारे के बाद जो लोग जम्मू-कश्मीर में आकर बसे थे उन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं था,  हालांकि, केंद्र सरकार के द्वारा अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद ये नियम निष्प्रभावी हो गए थे। 

सरकारी कर्मचारियों को मोदी सरकार का तोहफा

इसके अलावा दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 5 फीसदी बढोत्तरी का फैसला किया गया है।  ये बढोत्तरी इसी साल एक जुलाई से लागू हो गई है। मोदी सरकार के इस फैसले से 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 62 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। सरकार के इस फैसले से सरकारी खज़ाने पर 16 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में सरकार ने सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 9 फीसदी से 12 फीसदी किया था।

पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को भुनाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है लेकिन उसे कही से भी समर्थन नहीं मिल रहा है। अब चीन ने भी जम्मू-कश्मीर को द्विपक्षीय तरीके से हल करने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। 

चीन ने पाकिस्तान को दिया झटका 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने की कूटनीति अब पूरी तरह सफल साबित हो रही है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने और पुनर्गठन से बौखलाए पाकिस्तान को कहीं से कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है। हालात ऐसे है कि पाकिस्तान का ऑल वेदर फ्रेंड चीन भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है। चीन ने भी दोनों से अपने विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मसले को द्विपक्षीय तरीके से हल किया जाना चाहिए।

अमेरिका ने भी नहीं सुनी बात
आर्टिकल 370 खत्म करने के बाद अमेरिका ने साफतौर पर दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच का आपसी मामला है। पाकिस्तान उम्मीद लगाए बैठा था कि राष्ट्रपति ट्रंप मध्यस्थता की बात को आगे बढ़ाएंगे लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद उन्होंने भी साफ इनकार कर दिया।

दुनिया मानने लगी आतंकवादी देश है पाकिस्तान
प्रधानमंत्री मोदी ने जब से देश की कमान संभाली है आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक अभियान चला रखा है। पीएम मोदी के प्रयास से ही पश्चिमी दुनिया अच्छे और बुरे आतंकवाद में फर्क करना भूल गई है। वर्तमान दौर में दुनिया में सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। भारत आतंकवाद से सबसे अधिक त्रस्त है जिसकी एक मात्र वजह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है। दुनिया के अधिकतर देश भी यह मानने लगे हैं कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है और इसपर लगाम कसना आवश्यक है।

कश्मीर के मुद्दे पर पीएम मोदी के साथ खड़ी पूरी दुनिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के ऐतिहासिक फैसले का समर्थन दुनिया भर में किया जा रहा है। अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, इजरायल समेत विश्व के तमाम छोटे बड़े देश इसे भारत के अंदरूनी मामला बताकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े हैं और उनके साहसिक फैसले की सराहना कर रहे हैं। अब यूरोपियन आयोग के पूर्व निदेशक ब्रायन टोल ने जिनेवा में अनुच्छेद 370 पर भारत का समर्थन करते हुए कहा कि इसे हटाए जाने से कश्मीर में लोगों को सामान्य रूप से आर्थिक अवसर मिलेगा।

 

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