Home नरेंद्र मोदी विशेष मोदी राज में बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर, साल के अंत...

मोदी राज में बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर, साल के अंत तक ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां

998
SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तरक्की की ओर अग्रसर है। एक तरफ जहां अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर देश प्रतिदिन नए मुकाम हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को रोजगार के भरपूर अवसर भी मिल रहे हैं। वैश्विक स्टाफिंग रिपोर्ट के अनुसार भारत के फ्लेक्सी स्टाफिंग बाजार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार बीएसफएसआई, ई-कॉमर्स, खुदरा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में इस साल के अंत तक 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (आईएसएफ) के अनुसार वाहन, खुदरा और ई-कॉमर्स और बुनियादी ढांचा उन शीर्ष 15 क्षेत्रों में शामिल हैं, जिसमें 81 प्रतिशत औपचारिक क्षेत्रबल कार्यरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ऑटोमेशन और इनोवेशन की वजह से कार्य प्रकृति बदल रही है। देश के स्टाफिंग बाजार का आकार 3.6 अरब यूरो का है।

देश में अब रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं और युवाओं को अपनी मनचाही नौकरी मिल रही है। एक नजर डालते हैं उन क्षेत्रों में जहां नौकरियां मिल रही हैं और मोदी सरकार के उन कदमों पर जिनकी वजह से यह बदलाव हो रहा है।

मार्च तक सात महीने में 39 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार रोजगार के मोर्चे पर बेहतरीन काम कर रही है। मोदी सरकारी की नीतियों का ही असर है कि संगठित क्षेत्र में नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ताजा रोजगार आंकड़ों के अनुसार मार्च तक समाप्त सात महीने की अवधि में 39.36 लाख नए रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है। इन आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ मार्च महीने में ही 6.13 लाख नए रोजगार का सृजन हुआ है। यह फरवरी की तुलना में अधिक है, फरवरी में 5.89 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हुए थे।

ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार इनमें से आधी नौकरियां एक्सपर्ट सर्विस सेगमेंट में सभी आयु वर्ग में पैदा हुईं हैं। जिन क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से रोजगार पैदा हुए उनमें इलेक्ट्रिक, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, भवन एवं निर्माण उद्योग, ट्रेडिंग और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और टेक्सटाइल सेक्टर शामिल हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि संगठित क्षेत्र में जो रोजगार सृजित हुए उनमें से आधी नौकरियां महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में पैदा हुईं हैं। ईपीएफओ द्वारा रोजगार आंकड़ों का पहला सेट पिछले महीने जारी किया गया था।

अनुभवी कर्मचारियों के लिए नौकरियों की कमी नहीं –सर्वे
जीनियस कंसल्टेंट लिमिटेड के एक सर्वे में सामने आया है कि विभिन्न उद्योगों से जुड़ीं शीर्ष कंपनियों के चालू वित्त वर्ष में कर्मचारियों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की उम्मीद है। इसमें कहा गया है कि 42 प्रतिशत कंपनियों के अपने कर्मचारियों की संख्या में एक से 15 प्रतिशत के बीच वृद्धि करने का अनुमान है। सर्वेक्षण में सीमंस इंडिया , मारुति सुजुकी , भारती एयरटेल , बार्कले , ग्लैक्सो , एडेलवाइस , शापोरजी एंड पल्लोनजी जैसी 881 कंपनियों को शामिल किया गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2018-19 में पुरुष और महिलाओं की भर्ती आंकड़ा 57.77 प्रतिशत और 42.23 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। करीब 21 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि जॉब पोर्टल बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों की आपूर्ति करेंगी। वहीं , 35.17 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि 2018-19 में नई नौकरियों के सबसे ज्यादा अवसर एक से पांच वर्ष तक के अनुभव वाले लोगों को मिलेंगे।

टेलिकॉम सेक्टर में बहार, मिलेंगे नौकरियों के लाखों अवसर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जहां एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है, वहीं केंद्र की नीतियों की वजह से टेलिकॉम सेक्टर में वृद्धि देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र जिस रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले दो-तीन वर्षों में इस सेक्टर में रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 तक इस क्षेत्र में लगभग 9 लाख स्किल्ड युवाओं के लिए नौकरी के अवसर पैदा होंगे।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार ‘टेलिकॉम मंथन 2018’ में टेलिकॉम सेक्टर के विशेषज्ञों ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र को लेकर सकारात्मक राय व्यक्त की है। सेमिनार के दौरान टेलिकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल के सीईओ ले.ज. डॉ एसपी कोचर ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र की देश के विकास में अहम भूमिका है और वर्ष 2018 भारत के दूरसंचार उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस क्षेत्र में नई चुनौतियां और अवसर होंगे। श्री कोचर के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र में नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिसके लिए डिजिटल युग में कुशल जनशक्ति की आवश्यकता होगी। अनुमान है कि 2021 तक इस क्षेत्र में लगभग 8,70,000 लोगों के लिए नौकरी के नए रास्ते खुलेंगे।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में सृजित होंगी लाखों नौकरियां
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जोर हमेशा ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को विकसित करने पर रहा है। सौर ऊर्जा और विंड एनर्जी के क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार ने कई नीतिगत फैसले लिए हैं। इन्हीं फैसलों का असर है कि अब भविष्य में सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र लाखों युवाओं को रोजगार देने में सक्षम होंगे। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईओएल) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए आने वाले दिनों में लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आईओएल का कहना है कि 2030 तक भारत समेत दुनिया भर में करीब 2.4 करोड़ नए पद सृजित होंगे। रिपोर्ट में ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद और नेशनल रिसोर्सज डिफेंस काउंसिल के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सौर और पवन ऊर्जा कंपनियों, डेवलपरों और विनिर्माताओं के सर्वेक्षण के आधार पर भारत में सौर तथा पवन ऊर्जा क्षेत्र में तीन लाख से अधिक श्रमिकों की नियुक्ति होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लक्ष्य को पूरा करने के लिए पवन ऊर्जा परियोजनाओं और सौर ऊर्जा के कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाना होगा।

अगले तीन साल में पैदा होंगे एक करोड़ रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रोजगार के क्षेत्र में रोज नए अवसर खुल रहे हैं और आने वाले दिनों में ये मौके और बढ़ेंगे। स्टाफिंग फर्म टीमलीज सर्विसेज की हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में आने वाले तीन साल में बिक्री कारोबार के क्षेत्र में एक करोड़ रोजगार सृजित हो सकते हैं। फर्म की कार्यकारी उपाध्यक्ष ऋतुपर्णा चक्रवर्ती ने कहा है कि श्रम कानूनों में सुधार सहित विभिन्न नियामकीय सुधारों को आगे बढ़ाकर हम अगले तीन साल में बिक्री करने के काम में एक करोड़ नौकरियां सृजित कर सकते हैं। यह भारत के लिए एक अवसर है, जो कि इस समय अहम जनसांख्यकीय मोड़ पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण, मध्यम वर्ग के विस्तार, खुलकर खर्च करने वाली युवा पीढ़ी तथा सरकार की जीएसटी जैसी पहलों से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

2017-18 में 67 लाख नौकरियों का सृजन: SBI का आकलन
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की टीम के एक अध्ययन के अनुसार पिछले वित्त वर्ष यानि 2017-18 में देश में करीब 67 लाख नई नौकरियां पैदा हुई हैं। यह आकलन SBI के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. सौम्या कान्ति घोष की टीम के सर्वेक्षण से सामने आया है। आर्थिक मुद्दों पर समय-समय पर शोध प्रकाशित करने वाली SBI की टीम ने नौकरियों की यह तादाद सरकार की तरफ से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), नई पेंशन स्कीम (NPS) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की तरफ से दिए गए आंकड़ों के आधार पर ही निकाला है।

आंकड़े नकारात्मकता फैलाने वालों को खामोश करने वाले
गौर करने वाली बात है कि SBI के डॉ. घोष की टीम ने जब वित्त वर्ष 2018 में 70 लाख नई नौकरियों के सृजित होने का अनुमान लगाया था तो कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं और कुछ अर्थशास्त्रियों को यह हजम नहीं हो रहा था। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी सरकार का मजाक उड़ाया था। मोदी सरकार में रोजगार के लिए बन रहे स्थायी माहौल से नौकरियां की संख्या ने अनुमानित लक्ष्य के पास पहुंचकर हर सकारात्मक पहलुओं पर नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले राजनेताओं और अर्थशास्त्रियों को खामोश कर दिया है।

मौजूदा वित्त वर्ष में भी रोजगार के लाखों नए अवसर
रोजगार के हिसाब से मौजूदा वित्त वर्ष में भी नौकरियों की बहार बनी रहेगी। रिक्रूटमेंट कंपनी माइकल पेज ने इंडिया सैलरी बेंचमार्क 2018 रिपोर्ट में यह दावा किया है कि इकनॉमिक ग्रोथ तेज होने के कारण भारत में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के मेक इन इंडिया, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की ग्रोथ तेज होने और टेक्नॉलजी का रोल बढ़ने से हायरिंग में बढ़ोतरी होगी। नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, हर क्षेत्र में अच्छी लीडरशिप स्किल वाले प्रोफेशनल की मांग रहेगी। ई-कॉमर्स और इंटरनेट, एनर्जी, प्रोफेशनल सर्विसेज और केमिकल्स कंपनियां अधिक हायरिंग कर सकती हैं। 2018 में इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और ई-कॉमर्स सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी कंपनियां निवेश बढ़ा रही हैं। इनमें लोगों को आसानी से नौकरी मिलेगी। हेल्थकेयर, एफएमसीजी मैन्युफैक्चरिंग या इंडस्ट्रियल, ई-कॉमर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी रोजगार के लिहाज से टॉप इंडस्ट्रीज होंगी। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट कंपनियों, एग्रीगेटर्स, फिनटेक और ई-कॉमर्स कंपनियों में ऐसी स्किल रखने वालों लोगों की अच्छी मांग रहेगी।

रेलवे में नौकरियों की बहार
रेलवे में भी इन दिनों लगातार वैकेंसी निकल रही है। रेलवे जल्द ही 20 हजार और पदों पर भर्तियां करेगा। रेलवे ने 90 हजार रिक्तियों के लिए आवेदन पहले ही आमंत्रित किए थे। इस तरह कुल रिक्तियों की संख्या बढ़कर 1 लाख 10 हजार हो गई है। 20 हजार अतिरिक्त पदों के लिए अधिसूचना मई 2018 में जारी की जाएगी। आने वाले दिनों में रेलवे में और वैकेंसी आने की उम्मीद है। रेलवे में फिलहाल 2 लाख 40 हजार नॉन गेजटेड पद खाली पड़े हैं जिन पर जल्द ही भर्ती की तैयारी है।

मीडिया और मनोरंजन उद्योग में 7-8 लाख रोजगार
Confederation of Indian Industries (CII) और ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी Boston Consulting Group (BCG) की रिपोर्ट से यह अनुमान सामने आया है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सात से आठ लाख नौकरियां निकलने जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में मीडिया और मनोरंजन की सामग्रियों को लेकर रुझान काफी बढ़ा है जिसके चलते इस सेक्टर में रोजगार के अवसर काफी बढ़ने वाले हैं। CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा था: “डिजिटल प्लेटफॉर्म का काफी विस्तार हो रहा है और इस सेक्टर में इतने अवसर बनने जा रहे हैं जितने पहले कभी नहीं बने। विशेष रूप से रचनाकार, कथाकार और टेक्नोलॉजी मुहैया कराने वालों  के लिए बहुत सारे मौके उभरेंगे।”

मेट्रो ही नहीं छोटे शहरों में भी बढ़े नौकरी के अवसर
यह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की नीतियों का ही असर है कि रोजगार के अवसर सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि छोटे शहरों में नौकरी के समान अवसर पैदा हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक आठ मेट्रो शहरों में से सात में नौकरी के अवसर बढ़े हैं, इसके अलावा छोटे शहरों में नौकरियां बढ़ रही है। अगर अनुभव के आधार पर देखें तो फ्रेशर से लेकर तीन साल के एक्सपीरियेंस वाले युवाओं को 21 फीसदी ज्यादा नौकरी मिली है। वहीं 16 साल से ज्यादा तजुर्बे वाले पेशेवरों को भी 21 फीसदी ज्यादा नौकरी के मौके मिले हैं।

‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ रोजगार पैदा होंगे
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ योजना की शुरुआत की थी। यही वह योजना है जो रोजगार के क्षेत्र में क्रांति लाने की ताकत रखती है। हाल ही में नीति आयोग के महानिदेशक (डीएमईओ) और सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने कहा था कि ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हम चौथे तकनीकी रेवॉल्यूशन के दौर से गुजर रहे हैं। सरकार मेक इन इंडिया के जरिए 2020 तक 10 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के मिशन के साथ काम कर रही है।  

प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं से रोजगार के स्थायी मौके
जब भी नौकरियों की बात होती है तो सामने आता है कि युवाओं को सबसे ज्यादा नौकरियां आईटी सेक्टर में मिल रही हैं, लेकिन इस बार यह ट्रेंड बदला हुआ है। इस बार आईटी सेक्टर के अलावा दूसरे क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर ज्यादा सृजित हुए हैं। यह इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्टार्ट अप इंडिया, मुद्रा योजना, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी जो योजनाएं चलाई गई हैं, जमीनी स्तर पर उनका असर दिखने लगा है। अब देशभर में ज्यादातर सेक्टरों में एक समान तरीके से विकास हो रहा है, और युवाओं को नौकरियां भी मिल रही है। आने वाले महीनों में इन सब योजनाओं रोजगार और नौकरी के मौके बढ़ेंगे। सरकार के हर क्षेत्र में ई- क्रांति के कदम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में गांवों और गैर महानगरीय शहरों को नये उत्पाद और सेवा देने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। इसी तरह पर्यटन के क्षेत्र में भी डिजिटल क्रांति ने नये बाजार खोलकर युवाओं को रोजगार के काफी अवसर दिए हैं।

राजमार्ग योजना से 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार
देश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी कृत-संकल्प हैं। इस संकल्प की सिद्धि के लिए वे लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनसे सभी को रोजगार के अवसर मिलें और सबका विकास सुनिश्चित हो सके। इसी को ध्यान में रखते हुए, 83 हजार किलोमीटर के राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण की योजना को लागू करने के लिए 7 लाख करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई । इस योजना के साथ 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार युवाओं को मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद से देश में राजमार्गों के निर्माण कार्यों में तेजी आई है। आज राजमार्ग के साथ-साथ रोजगार के भी अवसरों की भरमार है।

Leave a Reply