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मोदी सरकार ने दिया तोहफा, अब घर खरीदना हुआ और सस्ता

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 2022 तक सभी के लिए अपना खुद का घर सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। इस लक्ष्य को लेकर जीएसटी परिषद ने निर्माणाधीन परियोजनाओं में मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी है और इसमें इनपुट कर का लाभ खत्म कर दिया है। इसके साथ ही किफायती दर के मकानों पर भी जीएसटी दर को आठ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया है। रीयल एस्टेट बाजार में नकदी के धंधे पर अंकुश लगाने के लिए बिल्डरों को निर्माण सामग्री का एक बड़ा हिस्सा जीएसटी में पंजीकृत डीलरों से खरीदना अनिवार्य करने का भी फैसला किया गया है। जीएसटी की ये नई दरें एक अप्रैल, 2019 से लागू होंगी। जीएसटी परिषद के इस फैसले से आवास निर्माण क्षेत्र को बल मिलेगा और नव-मध्यम वर्ग को अपने मकान के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस फैसले से मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

पहली बार घर खरीदने वालों को मोदी सरकार ने दी बड़ी राहत
इससे पहले मोदी सरकार ने पहली बार घर खरीदने के लिए होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली सब्सिडी स्कीम को सरकार ने मार्च 2020 तक जारी रखने का निर्णय किया था। इस योजना से उन लोगों को फायदा मिलता है जिनकी सालाना आय 6 लाख से 18 लाख रुपये तक होती है। सरकार के इस फैसले से पहली बार घर खरीदने वालों को 2.4 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिसका वे मकान की बुकिंग, कंस्ट्रक्शन या फ्लैट रिपरचेज में इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए सब्सिडी के दो स्लैब्स बना दिए हैं। दोनों स्लैब्स मौजूदा 15 साल की जगह अब 20 साल की अवधि तक के आवास ऋणों पर लागू होंगे। 31 दिसंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो सब्सिडी स्कीम्स की घोषणा की थी, लेकिन उन पर विस्तार से जानकारी अब दी गई है। नई योजना के तहत घर खरीदार को उनकी आय के आधार पर तय दर से सब्सिडी मिलेगी। अगर आपकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से कम है तो 6 लाख रुपये तक के लोन के ब्याज पर 6.5 फीसदी की दर से सब्सिडी दी जाएगी। अगर आपने 9 फीसदी की ब्याज दर पर 20 लाख रुपये होम लोन लिया है तो आपको 6 लाख रुपये पर सिर्फ 2.5 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा। बाकी 14 लाख रुपये पर 9 फीसदी का ही ब्याज चुकाना होगा।

कितनी मिलेगी सब्सिडी
अगर आपकी कमाई 12 लाख रुपये तक की सालाना है तो सरकार आपको 4 फीसदी की सब्सिडी देगी। 18 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वालों को 12 लाख रुपये तक के होम लोन के ब्याज पर 3 फीसदी की छूट मिलेगी। अगर 9 फीसदी की ब्याज दर पर लोन लिया जाए, तो तीनों कैटिगरीज की सब्सिडी से 20 साल के लोन पर अमूमन 2 लाख 40 हजार का फायदा होगा और लोन रीपेमेंट की मासिक किस्त में 2200 रुपया कम हो जाएगा। अच्छी बात यह है कि यह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होम लोन के ब्याज पर मिल रही यह सब्सिडी इनकम टैक्स में छूट के अलावा है। अगर आप सालाना 10 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं तो होम लोन पर आपको कुल यानी ब्याज पर सब्सिडी और इनकम टैक्स में छूट को जोड़कर 61,800 रुपये सालाना तक का फायदा हो सकता है।

हुडको और नेशनल हाऊसिंग बोर्ड देगा सब्सिडी
नेशनल हाऊसिंग बैंक- NHB- और हुडको पर सब्सिडी स्कीम्स को लागू करने की जिम्मेदारी है। कम आय वर्ग वालों को सब्सिडी देने की योजना के तहत सरकार ने अब तक पहली बार घर खरीदने वाले 18000 लोगों को कुल 310 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दे चुकी है।

साल 2022 तक देश के हर परिवार को घर देने का वादा
2022 तक सभी के लिए मकान सुनिश्चित करने के लक्ष्य को लेकर 25 जून, 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) शुरू की गई थी। केन्द्र सरकार ने पिछले महीने जनवरी में पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरों में रहने वाले गरीबों के लिए 4,78,670 और किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मंजूर मकानों की संख्‍या 72,65,763 हो गई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना को मिली बड़ी कामयाबी
साल 2015 में शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री आवास योजना को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत अब तक 72.65 लाख घरों को मंजूरी मिल चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण को भी 20 नवंबर 2016 को लांच किया गया और एक करोड़ मकान बनाने की समय सीमा मार्च 2019 रखी गई है।

अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए निगरानी
बेहतर गुणवत्ता के आवासों के तेजी से निर्माण के लिए लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष हस्तांतरण के जरिए आईटी-डीबीटी के जरिए सहायता राशि मुहैया कराई गई है। अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए घरों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। लाभार्थियों के मकानों के निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों पर नजर रखी जा रही है। राज्यों ने निर्माण सामग्री को रियायती दामों पर उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि आवासों का निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हों। कुछ राज्यों में इस योजना के तहत कलस्टर और कॉलोनियां भी बनाई गई हैं, जिससे आमतौर पर भूमिहीन लाभार्थी लाभांवित होंगे। इन आवासों का निर्माण दिल्ली के यूएनडीपी-आईआईटी ने किया है और संबंधित राज्यों के लाभार्थियों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपनी पसंद के अनुरूप आवासों का डिजाइन चुन सकें।

PMAY ने बढ़ाए रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री आवास योजना ने अब तक 1.2 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में निवेश किये गए हर 1 लाख रुपये पर 2.69 रोजगार लोगों को मिलते हैं। लगातार प्रयासों से यह आंकड़ा 4.06 तक पंहुचा जा सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 1,10,753 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। अनुमान है कि इस पूरी योजना के तहत लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिल सकता है।

सस्ते मकान क्षेत्र में जबरदस्त तेजी
प्रधानमंत्री आवास योजना पीपीपी मोड के आधार पर चल रही है। ऐसा अनुमान है कि इस कारण सस्ते आवासीय क्षेत्र में जबरदस्त तेजी आने वाली है। कई हाउसिंग कंपनियों के अनुसार ग्राहकों का जबरदस्त आकर्षण दिख रहा है। पीएमएवाई के तहत केंद्र सरकार ने मध्यम आयवर्ग के लोगों के लिए दो नई योजनाएं शुरू की। इन योजनाओं के तहत 9 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर ब्याज में 4 फीसदी और 12 लाख रुपये के आवास ऋण पर ब्याज में 3 फीसदी छूट दी गई है।

गुणवत्तापूर्ण मकानों के लिए राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम
इतना ही नहीं, गुणवत्तापूर्ण आवास के निर्माण के लिए प्रशिक्षित राजमिस्त्री की आवश्यकता होती है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 राज्यों में शुरू किए गए हैं। अब तक 25 हजार प्रशिक्षुओं ने इस कार्यक्रम में अपना नामांकन कराया जिसमें से 12,500 प्रशिक्षुओं की ट्रैनिंग पूरी हो गई, उन्हें प्रमाणपत्र भी मिल गया है। मार्च, 2019 तक एक लाख ग्रामीण राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी गुणवत्ता वाले आवासों का निर्माण संभव होगा। साथ ही देश में कुशल कारिगरों की संख्या बढ़ेगी। प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे।

मकानों के 168 प्रकार के डिजाइन
जो भी मकान बने, वह गरीब को सक्षम और सशक्त बनाने के लिए हो, इसको ध्यान में रखते हुए यूएनडीपी-आईआईटी दिल्ली ने आवासों के विभिन्न डिजाइन तैयार किए हैं। 15 राज्यों के लिए स्थानीय जलवायु और स्थानीय निर्माण सामग्री को ध्यान में रखते हुए बने। इसके लिए इस योजना के तहत 168 प्रकार के डिजाइन को सरकार ने मंजूरी दी है। इन डिजाइनों में से कोई भी डिजाइन प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी चुन सकते हैं और मकान बनवा सकते हैं। इन आवास डिजाइनों को केन्द्रीय आवास शोध संस्थान, रुडकी ने भी मंजूरी दी है। इन आवास डिजाइनों में लागत कम आती है तथा ये आपदा प्रतिरोधी भी हैं।

पीएमएवाई के तहत बनने वाले प्रत्येक पक्के घर में शौचालय, गैस कनेक्शन, बिजली आपूर्ति, पेयजल आपूर्ति आदि सुविधाओं से ग्रामीण भारत की तस्वीर बहुत तेजी से बदल रही है।

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