Home समाचार मोदी राज में कई ऐतिहासिक फैसले, हर जटिल समस्या का समाधान मुमकिन

मोदी राज में कई ऐतिहासिक फैसले, हर जटिल समस्या का समाधान मुमकिन

193
SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद देश में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिन्होंने देश में वर्षों से जारी विवाद और समस्या का समाधान किया। जिनमें अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, अनुच्छेद- 370 और तीन तलाक से संबंधित विवाद शामिल है। करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति मोदी सरकार के दौरान ही बनी। वहीं जीएसटी को लागू करने को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत भी मोदी सरकार में ही हुआ। मोदी सरकार ने जहां नोटबंदी का साहसिक फैसला लेकर भ्रष्टाचार पर हमला किया, वहीं दो सर्जिकल स्ट्राइक कर दुनिया को बताया कि अब भारत बदल चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि मोदी राज में हर मुश्किल और जटिल समस्या का समाधान मुमकिन है।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान

9 नवंबर, 2019 का दिन ऐतिहासिक बन चुका है, क्योंकि आज के दिन 491 साल पुराने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान हो गया। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने एकमत से रामलला के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। बता दें कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद  विवाद के समाधान के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मंदिर निर्माण को लेकर मोदी सरकार पर भी काफी दबाव था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह संविधान के दायरे में इस फैसले का समाधान चाहते हैं। उन्होंने फैसला आने से पहले  लोगों से धैर्य और शांति बनाये रखने की अपील की, साथ ही कहा कि सभी लोगों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करना चाहिए।

करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पंजाब के गुरदासपुर में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया। उन्होंने डेरा बाबा नानक स्थित कॉरिडोर के चेकपोस्‍ट से 550 श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना किया। करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की मांग भी लंबे समय से होती रही है। 17-18 साल की कोशिशों के बाद पिछले साल भारत और पाकिस्तान की सरकारों की इस पर सहमति बनी। इसके बाद इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य 11 महीने में पूरा हुआ।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर चर्चा हुई। वर्ष 1999 में वाजपेयी सरकार में दिल्ली से लाहौर तक ‘दोस्ती बस सेवा’ शुरू की गई। वाजपेयी खुद इस बस में सवार होकर लाहौर पहुंचे थे और उस समय के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर दोबारा चर्चा की। लेकिन ठीक इसके बाद करगिल युद्ध छिड़ने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। इससे पहले आजादी के बाद अकाली दल ने 1948 में करतारपुर गुरुद्वारे को भारत में शामिल कराने की मांग रखी थी। इसके बाद 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुरु नानक देव की 500वीं जयंती पर करतारपुर को भारत में शामिल कराने के लिए जमीन की अदला-बदली का वादा किया था। लेकिन यहां भी बात नहीं बनी।

अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला

मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जीवन में कुछ बातें, समय के साथ इतनी घुल-मिल जाती हैं कि कई बार उन चीजों को स्थाई मान लिया जाता है। ये भाव आ जाता है कि, कुछ बदलेगा नहीं, ऐसे ही चलेगा। अनुच्छेद 370 के साथ भी ऐसा ही भाव था। लेकिन मोदी सरकार ने इस भाव को बदल दिया।

अनुच्छेद 370 और 35-ए ने जम्मू-कश्मीर को अलगाववाद-आतंकवाद-परिवारवाद और व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। इसकी वजह से पिछले तीन दशक में लगभग 42 हजार निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास उस गति से नहीं हो पाया, जिसका वो हकदार था। मोदी सरकार ने कश्मीर के अलगाववादियों, आतंकियों, पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय दवाब की परवाह किए बिना देश हित में अनुच्छेद-370 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया, जिसका समर्थन विश्व के दूसरे देशों ने भी किया। पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद उसे समर्थन नहीं मिला। मोदी सरकार की वजह से देश का मानचित्र भी बदल चुका है।

आइए जानते हैं देश की दशा और दिशा बदल देने वाले मोदी सरकार के अन्य फैसलों के बारे में-

तीन तलाक बिल
तीन तलाक बिल पर मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली। एक साथ तीन तलाक को अपराध करार देने वाला तीन तलाक बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया। राष्ट्रपति ने भी इस बिल को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आने के बाद से ही सदियों से चली आ रही इस कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाने के प्रयास में लगे हुए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी मोदी सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ जोरदार पैरवी की थी, और उसी का नतीजा था कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने बहुमत के साथ इस प्रथा को गैरकानूनी और इस्लाम विरोधी घोषित किया था। उसके बाद से ही केंद्र सरकार इसे कानूनी जामा पहनाने की कोशिश कर रही थी। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल ने उन्हें देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं का शुभचिंतक बना दिया है। प्रधानमंत्री ने बगैर किसी भेदभाव के, मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम किया है। इस बिल के लागू होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा और तलाक की स्थित में वो अपने पति पर अपने तथा नाबालिग बच्चों के गुजारा भत्ता का दावा ठोक सकेंगी। इतना ही नहीं इस गैरकानूनी कृत्य पर पति को जेल का भी प्रावधान है।

नोटबंदी से क्लीन और भ्रष्टाचार मुक्त हुई अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट हटाने का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री मोदी का मकसद देश की अर्थव्यवस्था में मौजूद काले धन को खत्म करना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना था। मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद पहली बार देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। मोदी राज में करदाता की संख्या ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई। नोटबंदी के बाद फर्जी कंपनियों और बेनामी संपत्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। हजारों करोड़ की अघोषित आय का पता चला और लाखों फर्जी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया।

जीएसटी- सबको मिल रहा है एक राष्ट्र-एक कर का लाभ
दो साल पहले 1 जुलाई, 2017 को देश को आर्थिक आजादी मिली थी। आजादी, उन 17 प्रकार के करों से मिली जिसके बोझ के नीचे लोग 70 साल से दबे हुए थे। देश को यह आर्थिक आजादी दिलाने का सेहरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर बंधा। दशकों से चली आ रही सरकारों की इस जंग को प्रधानमंत्री मोदी ने 1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को जीएसटी कानून लागू करके जीत लिया। इस दिन भारत में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का राज स्थापित हुआ। प्रधानमंत्री मोदी की जीएसटी लागू करने की सटीक योजना और दृढ़ निश्चय का परिणाम रहा कि जीएसटी के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हुई।

सर्जिकल स्ट्राइक -1
28-29 सितंबर, 2016 की दरम्यानी रात पीओके में घुसकर आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारतीय सेना ने बड़ी कार्रवाई की थी। सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए भारतीय सेना ने एलओसी पारकर आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। 18 सितंबर को उरी के आर्मी कैंप में हुई आतंकी वारदात में हमारे 20 सैनिक शहीद हो गये थे। इस वारदात ने देश को दहलाकर रख दिया था, पाकिस्तान पर लोगों का गुस्सा उबल रहा था। उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय फौज ने आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने के साथ पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। भारत ने पाकिस्तान को उसी के घर में घुसकर सबक सिखाया था। सर्जिकल स्ट्राइक को दो टीमों ने अंजाम दिया था, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान स्थित कई लॉचिंग पैड को ध्वस्त कर दिया गया था।

सर्जिकल स्ट्राइक-2
मोदी सरकार ने पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए 26 फरवरी, 2019 को पाकिस्तान की सीमा में घुसकर बालाकोट में एयरस्ट्राइक की। भारतीय वायुसेना ने सर्जिकल स्ट्राइक-2 के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के अड्डे पर बड़ी कार्रवाई की। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैएबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन के कैंप तबाह हो गए। जानकारी के मुताबिक हमले में जैश-ए-मोहम्मद का कश्मीर ऑपरेशन का चीफ मुफ्ती अजहर खान और जैश चीफ मसूद अजहर का बड़ा भाई इब्राहिम अजहर सहित कुल 250 से 300 आतंकी मारे गए।

Leave a Reply