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मोदी सरकार ने अमेरिका की आपत्तियों को किया दरकिनार, रूस से किया 1500 करोड़ रुपए का रक्षा सौदा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करगिल विजय दिवस के मौके पर कहा था कि हम राष्ट्र की सुरक्षा के मसले पर किसी तरह के अभाव, प्रभाव और दबाव की स्थिति में आने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसका बार-बार प्रमाण दिया है। रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद पर अमेरिकी ने आपत्तियां जतायी थी। लेकिन अमेरिका के दबाव में आए बिना सरकार ने रूस के साथ हवा से हवा में मार करने वाली R-27 मिसाइलों की खरीद के लिए 1,500 करोड़ रुपये का समझौता किया है। 

R-27 मिसाइलें हवा में लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। R-27 मिसाइलों को लड़ाकू विमान सुखोई-30MKI में तैनात किया जाएगा। इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना के पास हवा में लंबी दूरी तक मार करने की ताकत आ जाएगी।

10-I प्रॉजेक्ट के तहत मिसाइल खरीद का फैसला

इन मिसाइलों को सरकार ने 10-I प्रॉजेक्ट के तहत लेने का फैसला लिया है। इसके तहत यह तय किया गया है कि तीनों सेनाओं के पास जरूरी साजोसामान उपलब्ध रहे। रूस ने इन मिसाइलों को अपने मिग और सुखोई सीरीज के लड़ाकू विमानों में तैनात करने के लिए तैयार किया है। इससे भारत के पास मध्यम से लंबी दूरी तक की रेंज में मार करने की क्षमता होगी।

पिछले 50 दिनों में 7600 करोड़ रु. के सौदे

रक्षा मंत्रालय की ओर से आपातकालीन जरूरतों के लिए मंजूरी दिए जाने के बाद बीते 50 दिनों में भारतीय वायुसेना ने अब तक अपने साजोसामान के लिए 7,600 करोड़ रुपये तक का सौदा किया है। इससे पहले जून में भारत और रूस के बीच एंटी-टैंक मिसाइल ‘स्ट्रम अटाका’ खरीदने के लिए 200 करोड़ रुपए का समझौता हुआ था। इन मिसाइलों को एमआई-35 हेलिकॉप्टर में लगाया जाएगा।

मोदी सरकार ने सेना को दी शक्तियां

इसी साल 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले के बाद से सरकार ने तीनों सेनाओं को किसी भी साजोसामान की खरीद के लिए आपातकालीन शक्तियां दी हैं। इसके तहत सेना अपनी जरूरत के हिसाब से तीन महीनों में 300 करोड़ रुपए के हथियार खरीद सकती है।

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