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मुद्रा योजना से अपना कारोबार शुरू करने की राह हुई आसान, हुनर को मिली नई पहचान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को नरेन्द्र मोदी ऐप के माध्यम से मुद्रा योजना के लाभार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ”जब हुनर को प्रोत्साहन मिलता है तो उसे और बढ़त मिलती है।” गौरतलब है कि अप्रैल 2015 से शुरू की गई इस योजना ने अल्प समय में ही सफलता के नये आयाम स्थापित किए हैं। एक ओर जहां देशभर में छोटे और मध्यम स्तर के कारोबार शुरू करने के लिए आसान कर्ज लेने की राह सुगम हुई है, वहीं मुद्रा योजना ने हर स्तर के कारोबारियों को साहूकारों से भी मुक्ति दिलाई है।

मुद्रा योजना के तहत 12 करोड़ लोगों को मिला लोन
मुद्रा योजना के तहत अब तक कुल 12 करोड़ लोगों को लोन दिया गाय है। इसके तहत अब तक 6 लाख करोड़ रुपये के लोन दिए गए हैं। दरअसल मुद्रा एक ऐसी योजना साबित हुई है, जिसमें लक्ष्य से भी अधिक लोग लोन दिए गए। गौरतलब है कि इसमें कुल लोन के 28 प्रतिशत यानि तीन करोड़ से अधिक लोन ऐसे लोगों को दिए गए हैं, जिन्होंने पहली बार अपना कोई कारोबार शुरू किया है।

मुद्रा योजना के तहत 55 प्रतिशत कर्ज पिछड़े समाज को
मुद्रा योजना एक ऐसी स्कीम है, जिसने बिना किसी भेदभाव के पिछड़े समाज को मजबूत करने का काम सफलतापूर्वक किया है। योजना के तहत 12 करोड़ लोगों में से 55 प्रतिशत लोन देश के एससी-एसटी-ओबीसी समाज के युवाओं और महिलाओं को दिया गया है। विशेष बात यह है कि इस योजना के लाभार्थियों में कुल 9 करोड़ यानि 74 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं।

मुद्रा योजना ने छोटे कारोबारियों को साहूकारों से दिलाई मुक्ति
मुद्रा योजना शुरू होने से पहले ऊंची पहुंच वालों को तो लोन आसानी से मिल जाया करते थे, लेकिन छोटे कारोबारियों को साहूकारों के चक्कर लगाने पड़ते थे। साहूकारों का ब्याज देने के चक्कर में उनकी पूरी जिंदगी ब्याज के कर्ज में डूब जाती थी। मुद्रा योजना ने ब्याजखोर लोगों से देश के युवाओं को बचाया है। इसके तहत कागजी प्रक्रिया को भी आसान रखा गया है ताकि लोगों को डॉक्यूमेंट्स की समस्या न हो।

नया कारोबार शुरू करने वालों को ‘मुद्रा’ से मिल रहा प्रोत्साहन
मुद्रा योजना के तहत कर्ज बांटने के पीछे मोदी सरकार की मंशा कारोबार को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ देश में रोजगार के नए संसाधन पैदा करना भी है। गौरतलब है कि आज 110 बैंक के साथ 72 माइक्रो फाइनांस कंपनियां और 9 नॉन बैंकिंग फाइनांस कंपनियां भी मुद्रा लोन दे रही हैं। मुद्रा ने ऐसा अवसर उपलब्ध करवाया है कि आज गरीब से गरीब व्यक्ति को भी लोन मिल रहा है। जाहिर है सामान्य व्यक्ति भी मुद्रा लोन की मदद से उद्यमी बन सकता है।

लोन बांटने में अपने लक्ष्य से हर साल आगे रहा मुद्रा योजना
कागजी प्रक्रिया आसान होने से लोगों को लोन मिलने में आसानी हो रही है, जिससे हर साल लोन देने की रकम भी लक्ष्य से अधिक ही रही है। वर्ष 2015-16 में जहां 1.22 लाख करोड़ रुपये लोन देने का लक्ष्य था, वहीं 1.37 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए गए। इसी तरह 2016 -17 में 1.80 लाख करोड़ का लक्ष्य पूरा किया गया। जबकि 2017-18 में 2.44 लाख करोड़ के बदले 2.53 लाख करोड़ लोन दिए गए हैं।

रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर रहा है मुद्रा योजना
गौरतलब है कि छोटे व्यापारी आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में असमर्थ थे, उनके लिए मुद्रा योजना वरदान साबित हुआ है। व्यापार को बढ़ावा देने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। दर्जी, मैकेनिक, टैक्सी चलाने वाले, ऑटो चलाने वाले, बुनकर… सभी को आसानी से लोन मिल जा रहा है।   मुद्रा लोन लेने वाले 12 करोड़ लोगों में से 3 करोड़ लोगों ने भी अगर एक व्यक्ति को रोजगार दिया तो सीधे तौर पर छह करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलता है।

लोन चुकाने के मामले में बड़े उद्यमियों पर भारी हैं छोटे कारोबारी
मुद्रा योजना लाने के समय बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने कहा था कि इससे एनपीए बढ़ेगा, लेकिन तीन साल बाद आज ये आशंका गलत साबित हुई है। दरअसल बड़े व्यवसायों में एनपीए 25 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 3 वर्ष बाद भी मुद्रा योजना का एनपीए मात्र 4 प्रतिशत ही है। इतना ही नहीं लोन चुकाने वालों में हजारों लोग ऐसे हैं जिन्होंने कर्ज समय पर चुकता ही नहीं किया, बल्कि बाद में उससे भी बड़े लोन लिए।

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