Home विपक्ष विशेष कर्नाटक में जल्दी ही लदने वाले हैं कुमारस्वामी सरकार के दिन!

कर्नाटक में जल्दी ही लदने वाले हैं कुमारस्वामी सरकार के दिन!

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कर्नाटक में कुमारस्वामी के नेतृत्व में जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार आपसी खींचतान से आगे बढ़ ही नहीं पा रही। ऐसे में राज्य में विकास के किसी कामकाज की उम्मीद करना फिजूल है। विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा को दूर रखने के नाम पर सरकार तो बना ली गई लेकिन कांग्रेस की यह तकलीफ किसी ना किसी रूप में सामने आती रही है कि जेडीएस से बड़ी पार्टी होकर भी वह उसके सामने झुकने को मजबूर है।

सिद्धारमैया मुट्ठी में रखना चाहते हैं कुमारस्वामी को!
कांग्रेस की तकलीफ पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के रुख से समझी जा सकती है जिन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल उठा दिया। सिद्धारमैया ने सप्लीमेंट्री बजट पेश करने को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि जब राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार विधानसभा में बजट  पेश कर चुकी थी तो इसकी क्या जरूरत थी?  इतना ही नहीं सिद्धारमैया ने इसको लेकर भी संदेह जताया था कि 2019 लोकसभा चुनावों के बाद मौजूदा गठबंधन सरकार चल पाएगी। सिद्धारमैया का खुले तौर पर दिया ये ऐसा बयान था जिससे सरकार में शामिल कुछ कांग्रेसी नेता ही चिंता में पड़ गए। उन्हें लगता है कि एक तो वैसे ही सरकार कितने महीने चलेगी इसका पता नहीं, ऊपर से अपने ही नेता ऐसे बयान देने लगे तो पता नहीं, महीनों की जगह कुछ दिनों में ही सरकार दम ना तोड़ दे।

कर्नाटक कांग्रेस में वर्चस्व का टकराव तेज
संभावित खतरे को भांपकर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्य के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कुमारस्वामी के कामकाज पर सिद्धारमैया के बयान को लेकर अपनी आपत्ति जताई। परमेश्वरा ने कहा कि सिद्धारमैया या कोई भी दूसरा नेता सरकार को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश करेगा तो उस पर कांग्रेस की सेंट्रल कमेटी कार्रवाई करेगी। इस बात से जहिर है कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर वर्चस्व का दौर तेज हो चुका है, जिसका असर कुमारस्वामी सरकार की सेहत पर पड़ना तय है।  

विधायकों के साथ अलग से बैठक कर रहे सिद्धारमैया
कांग्रेस का सिरदर्द यह भी है कि सिद्धारमैया विधायकों के साथ अलग से बैठकें भी कर रहे हैं। बुधवार को भी उन्होंने आठ विधायकों के साथ बैठक की जिसमें राज्य के दो मंत्री भी शामिल रहे। इस तरह की बैठक को दरअसल सिद्धारमैया के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कर्नाटक में अस्वाभाविक रूप से बनी गठबंधन सरकार अपने पहले दिन से तनावों का बोझ लेकर चल रही है। ऐसे में सिद्धारमैया का मौजूदा रुख कुमारस्वामी सरकार को जल्दी ही ले डूबे तो हैरानी नहीं।

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