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मोदी सरकार देगी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का हक, 50 करोड़ कामगारों को मिलेगा फायदा

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मोदी सरकार जब से दोबारा सत्ता में आई है, देश के गरीबों और कामगारों के हित में ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। अब मोदी सरकार ने देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने मजदूरी संहिता विधेयक-2019 को लोकसभा में पेश किया, जो मंगलवार को लोकसभा में पारित हो गया । केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इससे देश के 50 करोड़ कामगारों को लाभ होगा।

न्यूनतम मजदूरी में हर 5 साल बाद होगा संशोधन

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि न्यूनतम वेतन के साथ ही श्रमिकों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद श्रमिकों के वेतन में भेदभाव भी दूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों को शामिल कर यह विधेयक तैयार किया गया है। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में हर पांच साल बाद संशोधन किया जाएगा।

न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड

इस बिल में न्यूनतम वेतन तय करने की प्रणाली को युक्तिसंगत बनाया गया है। रोजगार के विभिन्न प्रकारों को अलग करके न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है। वेतन पर कोड सभी कर्मचारियों के लिए क्षेत्र और वेतन सीमा पर ध्‍यान दिए बिना सभी कर्मचारियों के लिए न्‍यूनतम वेतन और वेतन के समय पर भुगतान को सार्वभौमिक बनाता है। राज्यों में अलग-अलग न्यूनतम वेतन हैं, क्योंकि वेतन संबंधी कायदे-कानूनों में न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान वैधानिक तो है लेकिन बाध्यकारी नहीं है। लिहाजा हर राज्य अपने अपने स्तर पर मजदूरी तय करते हैं। इसलिए न्यूनतम मजदूरी का अंतर राज्यों में काफी देखा जाता रहा है। विकासशील देशों में भारत अकेला राष्ट्र है जिसने न्यूनतम वेतन कानून (1948) लागू किया है। इस कानून का मकसद गरीबी और असमानता कम करना है लेकिन ताज्जुब की बात है कि यहां जितने प्रदेश हैं, उनसे कई गुना ज्यादा न्यूनतम वेतन की दरें हैं। जानकार बताते हैं कि भारत में वेतन संबंधी अगर गंभीर शोषण है तो इसके पीछे अलग अलग दरें कारण हैं। मिल मजदूर के लिए अलग तो खेतिहर मजदूर के लिए अलग, ईंट भट्टा मजदूर के लिए कुछ तो राज मिस्त्री के लिए कुछ। बिहार में अलग मजदूरी तो अरुणाचल में कुछ और। ये असमानताएं बताती हैं कि मजदूरी के स्लैब में जितने अंतर होंगे, शोषण की गंभीरता उतनी बढ़ेगी। मोदी सरकार इस समस्या से कामगारों को मुक्ति दिलाना चाहती है। 

कार्यस्थलों के कंप्यूटरीकृत निरीक्षण योजना

विधेयक में कार्यस्थलों के निरीक्षण की व्यवस्था को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया गया है । इसमें कई बदलाव किए गए हैं।  इनमें वेब आधारित कंप्यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्त निरीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्माने का प्रावधान शामिल हैं। मोदी सरकार के इस कदम से सुरक्षा और कार्यस्थलों में कामकाज की बेहतर स्थितियां बनेंगी। इनसे देश का स्वस्थ कार्यबल ज्यादा उत्पादक होगा।

हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा

इस विधेयक से हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा और मौजूदा लगभग 40 से 100 प्रतिशत कार्यबल को न्‍यूनतम मजदूरी के विधायी संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कामगार को न्‍यूनतम वेतन मिले, जिससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन का भुगतान

इस विधेयक में राज्‍यों द्वारा कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन के भुगतान को अधिसूचित करने की परिकल्‍पना की गई है। इसमें कहा गया है कि विभिन्‍न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएं हैं, जिन्‍हें लागू करने में कठिनाइयों के अलावा मुकदमेबाजी को भी बढ़ावा मिलता है। इस परिभाषा को सरल बनाया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम होने और एक नियोक्‍ता के लिए इसका अनुपालन सरल करने की उम्‍मीद है। इससे प्रतिष्‍ठान भी लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि रजिस्‍टरों की संख्‍या, रिटर्न और फॉर्म आदि न केवल इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे और उनका रख-रखाव किया जा सकेगा।

मोदी सरकार ने हमेशा कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखा है, एक नजर डालते हैं बीते पांच वर्षों में कर्मचारियों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों पर-

हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल 2019 को मंजूरी

मोदी सरकार ने कामगारों के दफ्तर, सुरक्षा, स्वास्थ्य आदि को लेकर “हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल 2019” को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कर्मचारियों के कार्यालय, सुरक्षा, स्वास्थ्य और वर्किंग कंडीशन को लेकर कई कदम उठाए गए है। वहीं, दफ्तर में अब महिलाओं के लिए वर्किंग आवर 6 बजे सुबह से 7 बजे शाम के बीच ही रहेगा। लेकिन 7 बजे शाम के बाद वर्किंग आवर तय किया जाता है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। ओवरटाइम लेने से पहले कर्मचारी की सहमति लेनी जरूरी होगी। महीने में अधिकतम ओवरटाइम 100 घंटे की बजाय 125 घंटे हो सकेंगे। वहीं, ग्रैंड पैरेंट्स को मिलने वाली सुविधाएं अब डिपेंडेंट ग्रैंड पैरेंट्स को भी मिल सकेंगी। कंपनी में बच्चों के लिए क्रेच, कैंटीन जैसी सुविधा जरूरी होगी। तय उम्र के बाद कर्मचारियों के लिए मुफ्त हेल्थ चेकअप की सुविधा होगी।

ईएसआई अंशदान 6.5 से घटाकर किया 4 प्रतिशत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया। केंद्र ने राज्य कर्मचारी बीमा (ईएसआई) स्कीम में अंशदान की दर 6.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया। इससे 3.6 करोड़ कर्मचारी और 12.85 लाख नियोक्ता लाभान्वित होंगे। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने कहा कि घटी हुई दरें एक जुलाई से प्रभावी होंगी। अंशदान की घटी हुई दर से कामगारों को बहुत राहत मिलेगी। इससे और अधिक कामगारों को ईएसआई योजना के अंतर्गत नामांकित करना और ज्यादा से ज्यादा श्रमिक बल को औपचारिक क्षेत्र के अंतर्गत लाना सुगम हो सकेगा। अंशदान में नियोक्ता के हिस्से में कमी होने से प्रतिष्ठानों का वित्तीय उत्तरदायित्व घटेगा, जिससे इन प्रतिष्ठानों की व्यावहारिकता में सुधार होगा। इससे कारोबार करने की सुगमता में और भी ज्यादा बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी भी संभावना है कि ईएसआई अंशदान की दर में कटौती से कानून के बेहतर अनुपालन का मार्ग प्रशस्त होगा। ईएसआई कानून के अंतर्गत नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही अपना-अपना योगदान देते हैं।

EPFO ने बढ़ाईं ब्याज दरें 8.65 प्रतिशत हुई
प्रधानमंत्री मोदी संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को लेकर काफी फिक्रमंद दिखाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में मोदी सरकार ने भविष्य निधि पर ब्याज दर बढ़ाकर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दर बढ़ाकर 8.65 प्रतिशत कर दिया गया। इस फैसले से EPFO के 6 करोड़ से अधिक अंशधारकों को फायदा मिलेगा।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिम बजट में असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PMSYM) योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। 15 फरवरी, 2019 से इस योजना की शुरूआत हो चुकी है। इस योजना का लाभ लेने के लिए देशभर के 3.13 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर कामगार को 3,000 रुपए महीने पेंशन दी जाएगी। इस योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को मिलेगा। जिनकी न्यूनतम मासिक आय 15 हजार रुपए या उससे कम तथा आयु सीमा 18-40 वर्ष के बीच है।

कर मुक्त ग्रेच्युटी सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर हुई 20 लाख
मोदी सरकार ने अंतरिम बजट-2019 में कर्मचारियों को एक और तोहफा दिया। बजट में ग्रेच्युटी सीमा (Gratuity) 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया। हालांकि इससे संबंधित विधेयक ‘ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2018’ को 29 मार्च 2018 से लागू कर दिया गया था।इसके साथ ही मोदी सरकार निजी क्षेत्र में ग्रेच्युटी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 5 साल से घटाकर 3 साल कर दिया। यानि अगर किसी कर्मचारी ने किसी कंपनी में 3 साल तक नौकरी कर ली है तो उसे ग्रेच्युटी मिलेगी।

NPS में 14% योगदान देगी मोदी सरकार
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर मूल वेतन का 14 प्रतिशत कर दिया है। जबकि एनपीएस में कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 प्रतिशत पर बना रहेगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को 10 प्रतिशत तक व्यक्तिगत योगदान पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर योग्य आय से छूट भी मिल जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी कर्मचारियों को कुल कोष में से 60 प्रतिशत अंतरित करने को मंजूरी दी गई जो फिलहाल 40 प्रतिशत है।

मोदीराज में देश के कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा हुई मजबूत
प्रधानमंत्री मोदी ने पांच साल में देश के करोड़ों कामगारों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए हैं। ये फैसले ऐसे हैं, जिन्हें कांग्रेस की सरकारों ने दशकों से लटकाये रखा था। इन फैसलों से कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है। देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के अधिकारों को प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया। देश में, आजादी के बाद से कांग्रेस की सरकारों के दौरान कामगारों के अधिकार सिर्फ और सिर्फ फाइलों में ही बंद होकर रह गये थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कामगारों को उपक्रमों से अधिकार दिलवाने के लिए कानूनी उलझनों को खत्म कर दिया।

कामगारों को अधिकार मिलना सुनिश्चित किया
कामगारों के स्वास्थ्य, पेंशन, भत्ते, सुरक्षा आदि से संबंधित अधिकारों को सुनिश्चित कराना सरकार के लिए सरल हो चुका है। देश के 5.85 करोड़ उपक्रमों को मात्र 5 रजिस्टरों में सारी जानकारी वेबपोर्टल-श्रम सुविधा पोर्टल- के माध्यम से देनी होती है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना पूरी तरह से बंद हो गया है, साथ ही इंस्पेक्टर राज भी बंद हो चुका है।

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा 
मोदी सरकार देश के 47 करोड़ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सम्मानजनक और सुविधापूर्ण बनाने के लिए असंगठित श्रमिक सूचकांक संख्या (UWIN) कार्ड दे रही है। सभी कामगारों की UWIN को आधार संख्या से जोड़ कर बैंक खातों से जोड़ा जा रहा है। खातों के जरिए, सरकार असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता को सीधे खातों में दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी डीबीटी के जरिए, कामगारों को न केवल आर्थिक सहायता दे रहे हैं बल्कि हजारों करोड़ रुपये से अधिक के धन का दुरुपयोग होने से बचाया है।

संगठित क्षेत्र में गरीब कामगारों के लिए बेहतर अवसर बनाया
प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सम्मानजनक जीवन की परिस्थितियां बना रहे हैं तो दूसरी तरफ संगठित क्षेत्र के 8 प्रतिशत कामगारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने और समाजिक सुरक्षा को उन्नत करने का काम किया है। संगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सीधे खाते में वेतन को दिए जाने को सुनिश्चिचत करने के लिए 50 लाख से अधिक जन धन खाते खोले गये। Employees’ Provident Fund में एक करोड़ नये श्रमिकों का खाता खोला जा चुका है। संगठित क्षेत्र के गरीब कामगारों को स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा देने के लिए ESIC की सुविधा को उन्नत करने के साथ साथ सदस्यों की संख्या बढ़ायी जा रही है। 

पेंशनधारियों के लिए पेंशन मिलना सरल किया
प्रधानमंत्री मोदी कामगारों की छोटी से छोटी समस्याओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं तभी सरकार कामगारों के जीवन को सरल और खुशहाल बनाने के लिए कई फैसले लिए। पेंशनधारियों के लिए हर साल बैंकों में जाकर सत्यापन कराने की समस्या को पूरी तरह से खत्म कर दिया, अब डिजिटल सत्यापन के माध्यम से घर बैठे ही कोई बुजुर्ग अपना भत्ता पा सकता है। अब तक 1.94 करोड़ से भी अधिक पेंशनधारियों को यह सुविधा मिल चुकी है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं से सभी कामगारों को तेजी से लाभ मिल रहा है।

जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले पांच सालों में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सरल और सशक्त बनाने के लिए योजनाओं को जितनी तेज गति से लागू किया है वह अपने आपमें एक मिसाल है।

 

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