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पीएम मोदी के पलटवार से कांग्रेस में घिर गए राहुल और सोनिया, नेता-कार्यकर्ताओं में बढ़ने लगा असंतोष

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कांग्रेस पार्टी और उसके नेता बार बार ‘चायवाला’ बताकर अपमान करने की कोशिश करते हैं लेकिन जब उनपर पलटवार होता है तो फिर उन्हें जवाब देते नहीं बनता।  शशि थरूर ने हाल ही में एक बार फिर पीएम मोदी के संघर्ष का मजाक उड़ाया था, और कहा था कि जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के चलते ही ‘चायवाला’ प्रधानमंत्री बन पाया। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि ‘अगर कांग्रेस ये दावा करती है कि पंडित नेहरू की भूमिका के कारण मोदी, एक चायवाला, प्रधानमंत्री बन गया तो केवल एक बार कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष, अपने परिवार से बाहर, किसी अच्छे कांग्रेसी को बनाकर देखे।’

दरअसल हकीकत ये है कि आजादी के बाद से कांग्रेस संगठन और सरकार पर नेहरू-गांधी परिवार ने कब्जा कर लिया है। इन 71 सालों में कांग्रेस संगठन या सरकार की कमान किसी न किसी रूप में 62 साल से ज्यादा वक्त तक नेहरू-गांधी परिवार के पास रही है।

राहुुल सोनिया को कब तक ढोती रहेगी कांग्रेस ?

जाहिर है पीएम के इस बयान के बाद खुद राहुल और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। मां-बेटे की जोड़ी के नेतृत्व से कांग्रेस नेताओं की खीझ बाहर आ रही है। बताया जा रहा है कि खुद कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता ये सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर वो कब तक राहुल और सोनिया गांधी के नाकारा नेतृत्व को ढोते रहेंगे ? राहुल गांधी की अगुवाई में लगातार कांग्रेस चुनाव हार रही है, ज्यादातर राज्यों में वो सत्ता से बाहर हैं। इसके बावजूद उन्हें अध्यक्ष पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा है ? कांग्रेस के बाहर जब भी गांधी परिवार से अलग किसी और को अध्यक्ष बनाया गया, उसे इन लोगों ने परेशान या अपमानित कर हटा दिया।

सोनिया गांधी कैसे बनीं कांग्रेस अध्यक्ष ?

सोनिया गांधी ने 1998 में कांग्रेस की औपचारिक सदस्य बनी थी और प्राथमिक सदस्य बनने के 62 दिन बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गई। ऐसा इतिहास में शायद ही कहीं और हुआ होगा। सोनिया गांधी का रास्ता साफ करने के लिए तब के निर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को अपमानजनक तरीके से हटाया गया। सोनिया गांधी ने धीरे धीरे अपने सभी प्रतिद्वंदियों को कांग्रेस से बाहर कर दिया और बीस साल तक बेरोकटोक कांग्रेस अध्यक्ष बनी रही।

‘खानदानी अध्यक्ष’ की परंपरा जारी 

2004 से 2014 कहने को तो प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे लेकिन सब जानते हैं कि इस सरकार में सोनिया गांधी की मर्जी के बिना पत्ता तक नहीं हिलता था। सोनिया के बाद राहुल गांधी की भी कांग्रेस में एंट्री सीधे राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर हुई। बीस साल तक कांग्रेस का अध्यक्ष रहने के बाद सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल को पार्टी सौंप दी। वैसे सच ये भी है कि आजादी के बाद जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे, तब उनके कार्यकाल में ही इंदिरा गांधी को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया था।

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