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मोदी राज में मजबूत होती अर्थव्‍यवस्‍था, नोमुरा ने विकास दर को किया अपग्रेड

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को अगले पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना देखा है। तमाम विपरीत परिस्थियों के बावजूद मोदी सरकार इस सपने को पूरा करने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाने के लिए लगातार उपाय कर रही है। पिछले हफ्ते वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाएं कीं, जिनसे अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली। इसका असर भी दिखाई देने लगा है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने भारत की अर्थव्यवस्था को अपग्रेड करते हुए ‘overweight’ श्रेणी में शामिल किया है।

स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संकेत

नोमुरा के मुताबिक बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को अपग्रेड करने का फैसला किया गया। वैश्विक विकास में औसत से कम लाभ के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत बेहतर कर सकता है।

दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार

नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुधार के उपाय और विभिन्न सेक्टरों को दी गई राहत अर्थव्यवस्था के लिए उत्प्रेरक साबित हो सकते हैं। नोमुरा का अनुमान है कि 2019 की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता है और विकास दर 6.6 प्रतिशत हो सकती है। जबकि नोमुरा ने इससे पहले 5.8 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया था।

सरचार्ज वापसी से FPI में होगी बढ़ोतरी

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने बजट में घोषित विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) पर विवादास्पद सरचार्ज वापस लेने की घोषणा की। निर्मला सीतारमण ने कहा फाइनेंस एक्ट, 2019 के तहत दीर्घकालिक और अल्पकालिक पूंजी लाभ पर वसूला गया बढ़ा हुआ सरचार्ज वापस लिया जाएगा। इससे भारत में निवेश का इंतजार कर रहे निवेशकों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। सरकार फैसले से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि एफपीआई ने घरेलू पूंजी बाजार में जून में 10,384.54 करोड़ रुपये, मई में 9,031.15 करोड़ रुपये, अप्रैल में 16,093 करोड़ रुपये, मार्च में 45,981 करोड़ रुपये और फरवरी में 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।-

2018-19 में मिला अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का एफडीआई
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारत में विदेशी कंपनियां खूब निवेश कर रही हैं। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भारत में किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले पांच साल के दौरान 286 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। 2018-19 में देश में अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। डीपीआईआईटी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान उठाए गए सुधार उपायों से भारत 2016-17 में हासिल एफडीआई के आंकड़े को पार करने में सफल रहा और 2017-18 में 60.98 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह उस समय तक एफडीआई का सबसे ऊंचा आंकड़ा था।

सर्विस सेक्टर में 37 प्रतिशत बढ़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
मोदी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिये कई कदम उठाए हैं, इसमें मंजूरी के लिए नियत समयसीमा और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिये प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 36.5 प्रतिशत बढ़कर 9.15 अरब डॉलर रहा। उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अनुसार इस क्षेत्र में वर्ष 2017-18 में 6.7 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। सेवा क्षेत्र में यह वृद्धि इसलिए अहम है क्योंकि यह जीडीपी में इसका योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है।

FDI के मोर्चे पर 20 वर्ष में पहली बार भारत ने चीन को पछाड़ा
भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका। पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार और नए क्षेत्रों में भारी अवसरों के कारण भारत विदेशी निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के 235 सौदे हुए। पिछले 20 वर्षों से चीन विदेशी निवेशकों की पसंदीदा जगह बना हुआ था। पिछले साल चीन के बाजारों में आंशिक मंदी और अमेरिका के साथ ट्रेड वार के चलते विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर बढ़ा है।

विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 430 अरब डॉलर के पार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 430 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 9 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 1.62 अरब डॉलर बढ़कर पहली बार 430.57 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक के अनुसार, 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.39 अरब डॉलर बढ़कर 401.09 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार 24.30 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

विदेशी निवेशक जमकर कर रहे हैं निवेश
मोदी सरकार की प्रचंड जीत के बात वे भारतीय बाजार में जमकर निवेश कर रहे हैं। ज्यादातर निवेशक, खासतौर पर विदेशी निवेशक भारत में एक मजबूत सरकार चाहते थे। ऐसे में मोदी सरकार की शानदार जीत ने शेयर बाजार के साथ-साथ निवेशकों में जोश भर दिया। आम चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद कारोबार के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बनने की उम्मीदों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने मई में भारतीय पूंजी बाजार में शुद्ध रूप से 9,031 करोड़ रुपये की पूंजी डाली। डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निवेश बढ़ा दिया। निवेशकों ने शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 7,919.73 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि बॉन्ड बाजार में 1,111.42 करोड़ रुपये डाले। इस तरह निवेशकों ने शुद्ध रूप से 9,031.15 करोड़ रुपये का निवेश किया।

मोदी सरकार ने 2018 में जुटाये रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये
मोदी सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। विनिवेश में यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

पिछले पांच साल में जुटाई यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि
पिछले पांच साल में सरकार ने विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड राशि जुटाई है। विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। पिछले 5 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी ज्यादा है।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

 

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