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पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने जताई साथ मिलकर आतंक से लड़ने की प्रतिबद्धता

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता जताई है। व्हाइट हाउस के मुताबिक दोनों नेताओं ने ने संकल्प लिया कि भारत और अमेरिका आतंकवाद के वैश्विक खतरे के खिलाफ एक साथ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। पीएम मोदी ने न्यूयार्क में हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर शोक जाहिर किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मृतकों के परिजन एवं घायलों के प्रति संवेदना जाहिर की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत दुनिया की एक ऐसी शक्ति बनकर उभरा है जिसे झुकाया नहीं जा सकता। अर्थव्यवस्था के साथ सामरिक क्षेत्र में भी भारत ने अपनी हनक का अहसास कराया है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख ने जहां देश-दुनिया को सोचने को मजबूर किया है, वहीं विश्व शांति की ओर भारत के प्रयासों को दुनिया के देशों ने मान्यता दी है।

आतंक पर वैश्विक सहयोग
भारत सरकार आतंकवाद की समस्या पर वैश्विक सहयोग नीति अपना रही है। अमेरिका और अन्य देशों के साथ आतंकवादी जानकारियां साझा कर रहा है। भारत और अमेरिका आतंक से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इससे सरकार को आतंकियों की रियल टाइम जानकारी मिलती रहेगी। आतंकवाद पर वैश्विक सहयोग नीति के अंतर्गत बडे़ आतंकी संगठनों के अलावा मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की लिस्ट का भी आदान-प्रदान किया जा रहा है। मोदी सरकार की सफल विदेश नीति भी आतंकवादियों पर नकेल कसने मददगार साबित हो रही है।

आतंकवाद पर कड़े रुख से बनी साख
पीएम मोदी दुनिया के हर मंच से आतंकवाद के विरुद्ध मुखर रहे हैं। उन्होंने आतंकवाद के मसले पर एक के बाद एक हमले बोले और विश्व के अधिकतर देशों को ये समझाने में कामयाब रहे हैं कि दुनिया में अच्छा और बुरा आतंकवाद नहीं होता, बल्कि आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद है। आज अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, यूरोपियन यूनियन और इजरायल जैसे देश भारत के इस पक्ष के साथ खड़े हैं। कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों पर अमेरिकी रोक और सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों पर बैन भारत के बढ़े हुए प्रभुत्व का ही परिणाम है। दरअसल विश्व के कई देश आतंकवाद और कट्टरपंथ से परेशान हैं जिसे पीएम मोदी ने दुनिया के सामने चुनौती के तौर पर पेश किया है। दुनिया के अधिकतर देश पीएम मोदी के आतंकवाद विरोधी अभियान के साथ हैं।

आतंकवाद पर सार्क देशों का कड़ा रुख
वर्ष 2016 में पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में जब भारत ने शामिल नहीं होने की घोषणा की तो संगठन के अन्य कई देशों, जैसे- श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। हालांकि पाकिस्तान ने अन्य देशों को बुलाने की कोशिश की, लेकिन वो विफल रहा और अंत में सार्क सम्मेलन रद्द करने को मजबूर होना पड़ा। पीएम मोदी की कोशिशों से जी-20 हो या हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन, ब्रिक्स हो या सार्क समिट सभी ने हमारे साथ आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एक होने का आह्वान किया है।

अमेरिका ने पाक को लगाई लताड़
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद में कटौती कर पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया। इसका अलावा अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कड़ा संदेश दिया है। 21 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टम्प ने अपने संबोधन के दौरान कहा है कि अमेरिकी लोग बिना कारण युद्ध नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। पाकिस्तानी लोग भी आतंकवाद की मार झेल रहे हैं लेकिन पाकिस्तान आतंकवाद का स्वर्ग बना हुआ है।

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अमेरिका ने हबीब बैंक पर लगाया ताला
आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए आठ सितंबर को अमेरिका ने पाकिस्तान के हबीब बैंक के न्यूयार्क स्थित ऑफिस का शटर गिरा दिया। अमेरिका के वित्तीय नियामक प्राधिकरण ने हबीब बैंक के खिलाफ यह कार्रवाई उसके आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने के आरोपों के बाद की है। बार-बार चेतावनी जारी करने के बाद भी हबीब बैंक आतंकवादियों के वित्तपोषण और उनके पक्ष में मनी लॉन्ड्रिंग से बाज नहीं आ रहा था। दरअसल पूर्व में कई बार बैंक के आतंकी समूहों से संबंध और उनकी मदद करने के मामले सामने आ चुके थे। राज्य के वित्तीय सेवा विभाग ने बैंक पर 22.5 करोड़ डॉलर का जुर्माना भी ठोका।

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ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद शामिल
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आतंकी लिस्ट में शामिल करवाने के भारत के प्रयासों पर चीन ही अंतिम वक्त पर अडंगा लगाता रहा है, लेकिन ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के आतंकवाद पर रुख को चीन ने ना केवल भरपूर समर्थन दिया, बल्कि अपने ‘ऑल वेदर फ्रैन्ड’ पाकिस्तान का साथ छोड़ने को भी तैयार हो गया। ब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे दस आतंकी संगठनों का नाम शामिल किया जाना पीएम मोदी के आतंकवाद विरोधी आह्वान की बड़ी सफलता है। 

सैयद सलाउद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित
26 जून को अमेरिका ने हिजबुल सरगना सैयद सलाउद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। जम्मू-कश्मीर में कई हमलों के पीछे उसका हाथ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे अभियान की यह एक बड़ी सफलता है। अमेरिका इससे पहले लश्कर के मुखौटा संगठन जमात उद दावा और संसद हमले में शामिल जैश ए मोहम्मद पर पाबंदी लगा चुका है।

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आतंकवादी देश घोषित हुआ पाकिस्तान
भारत को सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली जब प्रधानमंत्री मोदी के दबावों के चलते ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को आतंकवादियों की शरणस्थली वाले देशों की सूची में डाल दिया। अमेरिका ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देता है। पाकिस्तान में इनको ट्रेनिंग मिलती हैं और यहां से ही इन आतंकवादी संगठनों की फंडिंग हो रही है।

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