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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जान को इनसे खतरा!

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देश के विकास में खुद को खपाये हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत कम वक़्त में अपने कई दुश्मन बना लिए हैं। भ्रष्टाचारियों, नक्सलियों और आतंकवादियों के खिलाफ पीएम मोदी ने जो अभियान छेड़ा हुआ है, उससे कइयों की नींदें हराम हो गयी हैं। मोदी विरोधी जब मोदी लहर को रोकने में नाकाम हो गए तो अब उन्हें रास्ते से हटाने की योजनाएं बना ली है।  

गृह मंत्रालय ने कहा है कि पीएम मोदी पर अबतक का सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है।  उनकी सुरक्षा के लिए नई गाइड लाइन जारी की गई है। गृह मंत्रालय के अनुसार स्पेशल प्रॉटेक्शन ग्रुप (SPG) से क्लियरंस मिले बिना किसी मंत्री और अधिकारी को भी पीएम मोदी के नजदीक आने की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि चार वर्षों तक बेखौफ घूमने वाले पीएम मोदी को किनसे खतरा है? जाहिर है यह जवाब भी आपके लिए जानना जरूरी है।

दरअसल नरेन्द्र मोदी जिस धैर्य से देश हित के निर्णय ले रहे हैं। सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। पर्सेंट और कमीशन वाले नेताओं की दुकान बंद कर रहे हैं।  काले धन का अंत कर रहे हैं।  आतंक का अंत कर रहे हैं। अलगाववादियों पर नकेल कस रहे हैं। माओवादियों का खात्मा कर रहे हैं। इसे देखते हुए मोदी जी की जान को खतरा इन आस्तीन के सांपों से ही है!

आशंका है कि मोदी विरोधी लॉबी उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते हैं। दरअसल सत्ता के लिये और नीचता की हद तक गिर जाने की प्रवृति इस देश के कई राजनीतिक दलों की भी है। जाहिर है इन खतरों के मद्देनजर ही गृह मंत्रालय ने नए निर्देश जारी किए हैं। बहरहाल आइये हम जानते हैं कि आखिर इन आस्तीन के सांपों के साथ मोदी जी ने क्या किया है जो ये उनकी जान के दुश्मन बन गए हैं।

आतंकवादी : चार वर्षों में 650 से अधिक आतंकवादी ढेर किए गए

कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ दिन दूनी-रात चौगुनी रफ्तार से जारी है। इसी कारण से आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं के दिन का चैन और रात की नींद उड़ी हुई है। मोदी सरकार के बनने से अब तक 640 आतंकवादी ढेर किए जा चुके हैं। 2018 में 27 जून तक जम्मू कश्मीर में इस साल अब तक 70 से अधिक आतंकवादियों का सफाया किया जा चुका है।

वर्ष 2014 में 110 आतंकवादी ढेर किए गए थे जबकि वर्ष 2015 में जम्मू कश्मीर में आतंकी हिंसा की 208 घटनाएं हुई, जिनमें 108 आतंकवादी मारे गए। वर्ष 2016 में राज्य में आतंकी हिंसा की 322 घटनाओं में 150 आतंकवादी मारे गए, वहीं वर्ष 2017 में आतंकी हिंसा की 342 घटनाएं हुई जिनमें  213 आतंकवादी मारे गए।

2017 की जनवरी से चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट में तो सुरक्षा बलों की तुलना में ढाई गुना से भी अधिक आतंकी मारे गए हैं।

माओवादी :  चार वर्षों में कसी नकेल, 36 प्रतिशत घटनाओं में कमी

माओवादी उग्रवाद, जिसे नक्सलवाद कहा जाता है, वर्ष 2013 में 76 जिलों से घटकर अब यह 58 जिलों तक सीमित रह गया है। यही नहीं, माओवादी उग्रवाद की घटनाओं में 36.6 प्रतिशत और कैजुअल्टी में 55.5 प्रतिशत की कमी आई है।

गौरतलब है कि गृह मंत्रलय द्वारा 126 जिलों को नक्सल प्रभावित घोषित किया गया था। इन्हीं में से 44 जिलों को अब नक्सलवाद के प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त पाया गया है। इनमें 32 जिले तो ऐसे हैं, जहां पिछले कुछ वर्षो से एक भी नक्सली हमला नहीं हुआ है। शेष जिलों में 30 ऐसे जिले बचे हैं, जहां नक्सलियों का प्रभाव अब भी कायम है।

मोदी सरकार नक्सलियों से निपटने के लिए केवल सशस्त्र संघर्ष के विकल्प तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि और भी कई तरीके अपनाकर उनको कमजोर करने का काम किया है। नक्सलियों की विदेशों से फंडिंग के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में सरकार अलग-अलग ढंग से प्रयासरत रही है।

नक्सलियों की फंडिंग के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों ईडी, एनआइए और आयकर विभाग की साझा टीम का गठन किया गया, जिसकी निगरानी केंद्रीय गृह मंत्रलय कर रहा है।

अलगाववादी : NIA के शिकंजे से बौखला गए हैं भारत विरोधी तत्व

टेरर फंडिंग को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि NIA  ने अलगाववादियों के कई नेताओं को अंदर किया। NIA के अनुसार कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों के पास हवाला के जरिए पैसा पहुंचाया जा रहा था। एनआईए ने करोड़ों रुपये जब्त किए हैं वहीं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह समेत कई बड़े-बड़े अलगाववादी नेता NIA और ED की गिरफ्त में हैं।

कट्टरपंथी :  सलाफी और वहाबी विचारधारा के प्रसार पर लगी रोक

कट्टरपंथ राष्ट्र की एकता, अखंडता और विविधता के लिए बड़ा खतरा हैं। देश के टुकड़े होने के खतरों के बावजूद कांग्रेस और वामपंथ की सरकारों के वक्त ऐसे कट्टरपंथी संगठनों को प्रश्रय मिलता था जो देश को आतंकवाद और कट्टरपंथ में धकेलने में लगे हुए हैं। मोदी सरकार ऐसी ही सोच पर नकेल कस रही है।

तथाकथित इस्लामी धर्मगुरु जाकिर नाईक भी सलाफी और वहाबी विचारधारा फैलाने का आरोपी है। मोदी सरकार ने उसे देश से निकाल दिया है।

नाईक के खिलाफ भादसं की धारा 153 (ए) (विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य फैलाना) और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराएं 10,13 और 18 (जिनका संबंध अवैध संघ से संबंधित होने, गैर कनूनी गतिविधियों को बढ़ावा और आपराधिक साजिश से है) के तहत मामला भी दर्ज किया गया है।

नाईक एनआईए और ईडी की जांच का इसलिए भी सामना कर रहा है क्योंकि बांग्लादेश ने कहा था कि पीस टीवी पर उसका भाषण ढाका में 2016 के हमले की एक वजह था। इस हमले में 22 लोगों की जान चली गयी थी। नाईक के गैर सरकारी संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को 2016 में ही अवैध घोषित किया जा चुका है और इस मामले में 18 करोड़ रूपए से अधिक की रकम के धन शोधन के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है।

कांग्रेस और वामपंथ की की सरपरस्ती में ही ऐसे संगठन बेखौफ होकर देश को तोड़ने के इरादे से अपनी साजिशों को अंजाम भी देते रहे हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानि PFI  जैसे संगठनों के ISIS  से संबंध जाहिर हो चुके हैं। संगठन कट्टरपंथ फैलाने से लेकर लव जिहाद जैसे घृणित कृत्य करने तक में शामिल रहा है। PFI की ऐसी ही गतिविधियों के कारण ही झारखंड की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया है।

मिशनरीज :  धर्म परिवर्तन पर सख्त कानून बनने से मोदी विरोध  

कांग्रेस राज में देश में अंधाधुंध तरीके से धर्म परिवर्तन कराये गए। मिशनरियों ने इस तेजी से गरीब आदिवासियों व् दलितों का धर्म परिवर्तन किया कि देश के कई राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक तक हो गए। आद देश के 8 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। कांग्रेस के छत्र तले कई एनजीओ को मिलने वाले फंड का दुरुपयोग करके इस गोरखधंधे को जोरशोर से चलाया गया। इसे रोकने में लगे हिन्दू संतों पर तरह-तरह के झूठे मुक़दमे तक ठोके गए। मोदी सरकार आते ही धर्म परिवर्तन के गोरखधंधे पर नकेल कसनी शुरू हो गयी। साफ है कि विदेशी चंदे से अराजकता फैला रहे मिशनरीज और NGO पर नकेल कसी गयी।

यह वो NGO होते हैं जो लोगों की मदद के नाम पर धर्म परिवर्तन का धंधा चलाते हैं। इसाई मिशनरी को सबसे ज्यादा पैसा डेनमार्क, नॉर्वे और लक्स्म्बुर्ग से मिलता था। जिसका इस्तेमाल देश में धर्मपरिवर्तन करवाने में किया जाता है। मोदी सरकार इस विषय पर बहुत ही गंभीर थी और सत्ता में आते ही इस समस्या को काबू करना शुरू किया।  NGO माफिया का तकरीबन 6000 करोड़ रुपया भारत सरकार ने सीज कर लिया।

भारत में अब विदेशों से मिलने वाला चंदा कैश नहीं हो पा रहा है। विदेशों से जो भी पैसा आता है वह डॉलर या यूरो में आता है भारत में यह दोनों ही इस्तेमाल नहीं होते तो रुपये में कन्वर्ट करना होता है और इसी कन्वर्ट वाले रूट में मोदी सरकार ने सख्ती दिखाई है।

दरअसल किसी भी NGO को चंदा कैश करवाने के लिए FEMA से सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। यह सर्टिफिकेट देने से पहले FEMA  लोकल पुलिस की मदद से जांच करवाती थी। लेकिन इसमें लोचा यह था कि रिश्वतखोरी के चक्कर में इसमें फर्जीवाड़ा हो गया था। विदेशों से पैसा बे रोक टोक भारत में आ रहा था जिसका इस्तेमाल धर्म परिवर्तन में किया जा रहा था।

लेकिन अब मोदी सरकार ने कानून ही बदल दिया है। FEMA लोकल पुलिस वालो की जगह इंटेलिजेंस ब्यूरो को देगी।  गौरतलब है कि IB एक ख़ुफ़िया संस्था है तो किसी को मालूम नहीं होगा की कौन क्या कहां जांच कर रहा है जिसके कारण रिश्वतखोरी मुमकिन ही नहीं होगी।

विदेशों से चंदा पाने वाले सभी NGO को यह बताना होगा कि वह पैसा कहां कैसे क्यूं खर्च किया| मतलब पूरी रिपोर्ट सरकार को देनी होगी जिसकी कुछ सीमाएं भी सरकार ने ही तय कर दी हैं। जाहिर है भारत में धर्म परिवर्तन के धंधे पर मोदी सरकार ने बहुत गहरी चोट की है।

भ्रष्टाचारी :  करप्शन पर नकेल कसी तो बिलबिला उठे भ्रष्टाचारी

मोदी सरकार में अगर सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कोई कर रहा है तो वे हैं भ्रष्टाचारी। आरोप है कि भ्रष्टाचार के प्रतीक बने लोग अब पीएम मोदी को ही रास्ते से हटाना चाहते हैं।

बीते चार वर्षों के कार्यकाल में यह बात हर बार साबित हुई है केंद्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर लगातार प्रहार कर रही है और बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी कानून की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, ललित मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, पी चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम, डी के शिवकुमार, अहमद पटेल, शरद पवार, लालू यादव, ममता बनर्जी, वीरभद्र सिंह जैसे कई बड़े नाम भी भ्रष्टाचार की जांच के जद में हैं या तो वे सजायाफ्ता हैं।

इन मामलों में सच्चाई कितनी है यह तो जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन लोगों को यकीन नहीं आ रहा है कि राजनीतिक पार्टियां मोदी विरोध में किस हद तक गिर सकती हैं कि एक व्यक्ति जो देश को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात एक किये हुए है। जो दिन में 18-18 घंटे काम कर रहा है। ऐसे व्यक्ति को रोकने का हर जतन फेल होने के बाद अब ये तथाकथित राजनेता उसे जान से मारने तक का षड्यंत्र कर रहे हैं।

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