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मोदी सरकार की नीतियों का असर, बैंकों ने दी 59-मिनट पोर्टल से 30,000 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार आगे बढ़ रही है। मोदी राज में अब लघु एवं मझोले कारोबारियों को एक घंटे से भी कम समय में एक करोड़ रुपये का लोन मिल रहा है। 59 मिनट लोन पोर्टल से कारोबारियों को 59 मिनट के भीतर 1 करोड़ रुपये तक के लोन की मंजूरी मिल जा रही है। बैंकों ने पिछले साल सितंबर से अब तक 59-मिनट पोर्टल के माध्यम से 30,000 करोड़ रुपये के एमएसएमई ऋण को मंजूरी दी है। इस पोर्टल के माध्यम से 24,000 नए लोगों ने लगभग 6,400 करोड़ रुपये का लोन लिया है, जबकि 68,000 लोगों ने 23,439 करोड़ लोन लिए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सिडबी से 1 घंटे से भी कम समय में लघु व्यवसाय ऋण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने psbloansin59minutes पोर्टल की शुरूआत की थी।

पिछले 4 साल में छोटे कारोबारियों ने 10 करोड़ लोगों को दिया रोजगार
पिछले चार वर्षों में छोटे कारोबारियों (एमएसएमई सेक्टर) ने 10 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार एमएसएमई सेक्टर ने 2014-18 के दौरान 10 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। सिंह ने कहा कि मौजूदा एमएसएमई ने कम से कम 7 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है जबकि नए उद्यमियों ने 3 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है।

छोटे कारोबारियों को 40 लाख रुपये के टर्नओवर पर जीएसटी में छूट
जीएसटी काउंसिल ने हाल ही में कंपोजिशन स्कीम को लेकर बड़ा फैसला किया। अभी 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले कारोबारी जीएसटी के दायरे में आते हैं। अब 40 लाख रुपये टर्नओवर वाले जीएसटी के दायरे में आएंगे। छोटे राज्यों में जो लिमिट 10 लाख थी वो लिमिट 20 लाख रुपये कर दी गई है। इस कारण कई छोटे कारोबारी जीएसटी के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इन छोटे कारोबारियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।

कंपोजीशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ा कर 1.5 करोड़ रुपये की
जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम की सीमा को 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अभी तक ये सीमा 1 करोड़ रुपये थी। ये नई सीमा 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी। इसके अलावा जीएसटी काउंसिल ने एसएमई को वार्षिक रिटर्न फाइल करने की छूट दे दी है। इसका अर्थ है 1 अप्रैल 2019 से इन कारोबारियों को साल में 1 ही रिटर्न भरना होगा। हालांकि इन छोटे कारोबारियों को हर तिमाही टैक्स भरना होगा। पहले इनको हर तिमाही में रिटर्न भी भरना होता था।

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