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मोदी राज में 1 रुपए में मिलेगी सैनिटरी नैपकिन, महिलाओं को संक्रमण से मिलेगी आजादी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में ‘फिट इंडिया अभियान’ की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया में हर नागरिक को फिट करना सरकार का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मोदी सरकार ने महिलाओं में स्वच्छता को बढ़ावा देकर उन्हें स्वस्थ और फिट बनाने का फैसला किया है। सरकार अब महिलाओं को सिर्फ एक रुपये में सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराएगी। इसके लिए सरकार ने जन औषधि केंद्रों पर बिकने वाले सैनिटरी नैपकिन के मूल्य को घटा दिया है। ये पैड ऑक्‍सो बायोडीग्रेडेबल है और इससे महिलाओं को संक्रमण से मुक्ति मिलेगी।  

पीएम मोदी ने पूरा किया अपना वादा 

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा ने 27 अगस्त, 2019 को दिल्‍ली में मोबाइल एप्‍लीकेशन ‘जन औषधि सुगम’ की शुरुआत की। इस दौरान रसायन एवं उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुखलाल मांडविया ने बताया कि अभी सैनिटरी पैड का मूल्य ढाई रुपये प्रति पैड के हिसाब से है, जिससे चार पैड वाले एक पैक का दाम 10 रुपये है। अब यह पैक सिर्फ चार रुपये में मिलेगा। कीमत में 60 फीसद की कटौती के साथ नरेंद्र मोदी सरकार ने भाजपा की ओर से आम चुनाव 2019 में अपने घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा किया है।

अब स्कूल नहीं छोड़ेंगी लड़कियां

रसायन एवं उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुखलाल मांडविया ने कहा कि बेहतर सैनिटरी नैपकिन के अभाव के कारण 28 मिलियन लड़कियां बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं, क्‍योंकि नैपकिन पैड उन्‍हें उचित दाम पर नहीं मिल पाता। उन्‍होंने कहा कि औषधि विभाग देश भर में फैले प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्‍द्रों के नेटवर्क के जरिए सभी नागरिकों को सस्‍ती दरों पर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कदम से गरीबों के दवा खर्च में पर्याप्‍त कमी आई है।

‘स्‍वच्‍छता, स्‍वास्‍थ्‍य और सुविधा’ होगी सुनिश्चित

बाजार में सैनिटरी पैडों की सस्‍ती दरों पर उपलब्‍धता न होने के कारण देश की कई महिलाएं माहवारी के दौरान अस्‍वस्‍थ तरीके अपनाती हैं। इस संबंध में महिलाओं के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एक महत्‍वपूर्ण कदम है। इससे देश की वंचित महिलाओं के लिए ‘स्‍वच्‍छता, स्‍वास्‍थ्‍य और सुविधा’ सुनिश्चित होगी।

ऑक्‍सो-बायोडीग्रेडेबल और पर्यावरण अनुकूल

औषधि विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के सबके लिए ‘सस्‍ती और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा’ दृष्टिकोण को हासिल करना सुनिश्चित हो जाएगा। इस कदम के जरिए प्रधानमंत्री का ‘स्‍वच्‍छ भारत, हरित भारत’ का सपना भी पूरा होगा, क्‍योंकि ये पैड ऑक्‍सो-बायोडीग्रेडेबल और पर्यावरण अनुकूल हैं। जन औषधि सुविधा को देश भर के 5500 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्‍द्रों के जरिए बिक्री के लिए उपलब्‍ध कराया जा रहा है।

‘जन औषधि सु‍गम’ मोबाइल एप्प से मिलेगी जानकारी

‘जन औषधि सु‍गम’ मोबाइल एप्‍लीकेशन से नजदीक के जन औषधि केन्‍द्रों और गूगल मैप के जरिए उन केन्‍द्रों तक पहुंचने के मार्ग की जानकारी हासिल की जा सकती है। इस एप्प से जन औषधि जैविक दवाओं का पता लगाने, दवाओं के मूल्‍य के आधार पर जैविक तथा ब्रांडेंड दवाओं की तुलना, खर्च में होने वाली बचत की जानकारी मिलेगी। यह मोबाइल एप्‍लीकेशन एंड्राइड और आईओएस प्‍लेटफॉर्मों पर उपलब्‍ध है। इन्‍हें गूगल प्‍ले स्‍टोर और एप्‍पल स्‍टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है।

इस पहल से महिलाओं को होगा काफी फायदा

सैनिटरी नैपकिन योजना की घोषणा मार्च, 2018 में हुई थी। वहीं, मई 2018 से इन्हें जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध कराया गया है। पिछले एक साल में जन औषधि केंद्रों से करीब 2.2 करोड़ सैनिटरी नैपकिन बिकी हैं। बता दें कि बाजार में सैनिटरी नैपकिन का औसत दाम 6 से 8 रुपये के बीच है। ऐसे में सरकार की इस पहल से महिलाओं को काफी फायदा होने वाला है।

आइए एक नजर डालते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र के स्वच्छता की दिशा में उठाए गए कदम और उसकी सफलता पर… 

डब्ल्यूएचओ ने की स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की है। ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)’ के स्वास्थ्य लाभों पर अपने अध्ययन में डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस कार्यक्रम से तीन लाख से अधिक लोगों की जिंदगियां बच सकती हैं। डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ रिचर्ड जॉनस्टन ने कहा कि अनुमान है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)’ से 2014 और अक्तूबर, 2019 के बीच तीन लाख से अधिक लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया जाएगा। रिचर्ड ने कहा कि 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने से पहले स्वच्छता नहीं होने से हर साल डायरिया के 19.9 करोड़ मामले सामने आते थे। ये धीरे-धीरे घट रहे हैं और अक्तूबर, 2019 तक सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं का यूनिवर्सल इस्तेमाल पूरा हो जाने से इसका पूरी तरह सफाया हो जाएगा। अध्ययन में पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता सेवाओं, व्यक्तिगत स्वच्छता में सुधार का सबूत मिला जिसका सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव रहा।

स्वच्छ भारत अभियान से भूजल प्रदूषण में आई कमी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वच्छ भारत योजना ने कमाल कर दिया है। इंसान की बीमारी तो दूर हो ही रही, भूजल का प्रदूषण भी खत्म हो रहा है।  5 जून 2019 को जारी UNICEF के एक अध्ययन में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन’ ने कई गांवों में भूजल प्रदूषण को कम किया है। इसके साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फॉउंडेशन’ की रिपोर्ट में भी प्रधानमंत्री मोदी की स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा की गई।

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यूनिसेफ का अध्ययन तीन राज्यों – बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित है। खुले में शौच से मुक्त गांव और खुले में शौच वाले गांवों के भूजल का नमूना लिया गया। जब नमूने का परीक्षण किया गया, तो पाया गया कि खुले में शौच से मुक्त गांवों की तुलना में non-ODF गांवों के भूजल के दूषित होने की संभावना 11.25 गुना अधिक थी। अध्ययन के मुताबिक ‘ओपन डेफिकेशन फ्री’ ODF गांवों की तुलना में non-ODF गांवों में मिट्टी, पेयजल और खाने की चीजों में प्रदूषण अधिक पाया गया।

अक्टूबर तक खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा पूरा देश

स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक ग्रामीण भारत में 9.8 करोड़ से भी ज्यादा शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2 अक्टूबर, 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करने का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छता कवरेज आज 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि यह 2014 में 39 प्रतिशत था। इससे स्वच्छ भारत मिशन अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच से मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 5.61 लाख से अधिक गांव और 618 जिले खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किए गए हैं। अब तक 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने स्वयं को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है।

जन आंदोलन बना यह अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू करते हुए खुद हाथों में झाड़ू थामी थी तो पूरे देश ने हाथ में झाड़ू थाम लिया था। आज यह अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है। देश में शौचालय का इस्तेमाल न करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। शहरों में अब मात्र एक प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

99 प्रतिशत भारतीयों के घरों में शौचालय
प्रधानमंत्री मोदी ने जब स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था, तब देश का एक भी राज्य खुले में शौच की समस्या से मुक्त नहीं था। अब 99 प्रतिशत भारतीयों के घरों में शौचालय की सुविधा है। एनडीए सरकार ने 2014 से देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए 9.8 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया है। आज 99 प्रतिशत भारतीयों के पास शौचालय की सुविधा है, जोकि 2014 से पहले केवल 39 प्रतिशत थी।

पीएम मोदी ने रखी शौचालय की नींव
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने उस समय मिसाल पेश की, जब उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के शहंशाहपुर गांव में अपने हाथों से पहली बार शौचालय की नींव रखी। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि मैं जिस गांव में गया, वहां शौचालय में लिखा हुआ था- इज्जत घर। ये हमारी महिलाओं की इज्जत के लिए ही है। जो महिलाओं की इज्जत चाहेगा, वो शौचालय जरूर बनाएगा।

पीएम ने स्वयं कुदाल उठाकर की सफाई
प्रधानमंत्री इस कार्य को और आगे बढ़ाते रहे, वो अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी पहुंचे और वहां भी खुद आगे बढ़कर सफाई अभियान को गति देने का काम किया। पीएम मोदी ने काशी के अस्सी घाट पर गंगा के किनारे कुदाल से साफ-सफाई की। इस मौके पर भारी संख्या में स्थानीय लोगों ने स्वच्छ भारत अभियान में उनका साथ दिया।

हर वर्ग का मिल रहा है साथ
देश में एक से बढ़कर एक लोग इस अभियान से जुड़ते चले गए और स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय आंदोलन बनता चला गया। सरकारी अधिकारियों से लेकर, सीमा की रक्षा में जुटे वीर जवानों तक, बॉलीवुड कलाकारों से लेकर नामचीन खिलाड़ियों तक, बड़े-बड़े उद्योगपतियों से लेकर आध्यात्मिक गुरुओं तक, सभी इस पवित्र कार्य से जुड़ते चले गए। इसमें अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल और मैरी कॉम जैसी हस्तियों के योगदान बेहद सराहनीय हैं।

‘मन की बात’ में सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में लगातार देश के विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों के उन प्रयासों की सराहना की है, जिसने स्वच्छ भारत अभियान को व्यापक रूप से सफल बनाने में मदद की।

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